Guava Fruit Protection Tips | Guava Fruit Fly Management | अमरूद को फल मक्खी से कैसे बचाएं, जानें expert उपाय

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अमरूद की फसल बचानी है तो अभी करें ये काम, जानें असरदार उपाय
Last Updated:August 17, 2026, 10:50 IST
Guava Fruit Protection Tips: अमरूद की खेती में बरसात के दौरान फल मक्खी का प्रकोप तेजी से बढ़ता है. मादा फल मक्खी छिलके के नीचे अंडे देती है और लार्वा फल को अंदर से खोखला कर सड़ने पर मजबूर कर देते हैं. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह के अनुसार फल के 4 से 6 सेमी होने पर फ्रूट बैगिंग करना सबसे प्रभावी उपाय है. इसके अलावा बगीचे में मिथाइल यूजेनॉल ट्रैप लगाना, नीम तेल का छिड़काव करना, संक्रमित फलों को नष्ट करना और मिट्टी की हल्की गुड़ाई करना इस कीट को नियंत्रित करने के लिए बेहद जरूरी उपाय हैं.
अमरूद की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा मानी जाती है. लेकिन बरसात के मौसम में इस फसल पर फल मक्खी का प्रकोप तेजी से बढ़ जाता है. यह कीट फलों को अंदर से खराब कर किसानों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. मादा फल मक्खी अमरूद के छिलके के नीचे अंडे देती है. इन अंडों से निकलने वाले लार्वा फल के गूदे को खाते हैं. इससे फल समय से पहले पीले होकर सड़ने और गिरने लगते हैं.
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह ने बताया कि अमरूद की फसल को फल मक्खी से बचाने के लिए अमरूद की बैगिंग करना सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है. जब अमरूद का फल अखरोट के आकार यानी करीब 4 से 6 सेंटीमीटर का हो जाए, तभी उसे बैग से कवर कर देना चाहिए. इसके लिए सफेद या हल्के रंग के छिद्रयुक्त पॉलीबैग अथवा विशेष फ्रूट बैग का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे फल मक्खी कीट फल तक पहुंचकर अंडे नहीं दे पाती.
बैगिंग करते समय किसानों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. बैग के निचले हिस्से में 2 से 4 छोटे छेद कर देने चाहिए, ताकि बारिश का पानी अंदर जमा न हो और हवा का आवागमन बना रहे. इसके अलावा बैग को फल समेत डंठल के पास हल्के हाथ से बांधना चाहिए. ध्यान रखें कि बैग बहुत कसकर न बांधा जाए, क्योंकि इससे फल का प्राकृतिक विकास प्रभावित हो सकता है. कटाई से करीब 3 से 5 दिन पहले किसान बैग हटा सकते हैं.
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बैगिंग से अमरूद के फलों की गुणवत्ता भी बेहतर हो सकती है. फल मक्खी का प्रकोप कम होने से अमरूद साफ, चमकदार और अच्छी गुणवत्ता वाला तैयार होता है. साथ ही कीटनाशकों के इस्तेमाल की जरूरत भी कम हो सकती है. बेहतर परिणाम के लिए किसानों को बगीचे में गिरे और संक्रमित फलों को तुरंत इकट्ठा कर नष्ट कर देना चाहिए. क्योंकि इनमें मौजूद लार्वा बाद में मिट्टी में जाकर प्यूपा बना सकते हैं.
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट ने बताया कि फल मक्खी की संख्या कम करने के लिए बगीचे में मिथाइल यूजेनॉल ट्रैप भी लगाए जा सकते हैं. इन ट्रैप में मौजूद गंध नर फल मक्खियों को आकर्षित करती है और वे ट्रैप में फंस जाती हैं. इससे नर मक्खियों की संख्या कम होने के साथ उनके प्रजनन चक्र पर भी असर पड़ता है. उन्होंने बताया कि बगीचे में साफ-सफाई रखने और खराब फलों को समय पर हटाने से भी फलों में रोगों का प्रकोप कम किया जा सकता है.
इसके अलावा इस समस्या के समाधान के लिए किसान नीम के तेल का भी उपयोग कर सकते हैं. करीब 15 दिन के अंतराल पर 5 मिलीलीटर नीम तेल प्रति लीटर पानी में मिलाकर उसमें थोड़ी मात्रा में डिटर्जेंट डालकर पेड़ों पर छिड़काव किया जा सकता है. नीम का छिड़काव फल मक्खियों को फलों पर बैठने और अंडे देने से रोकने में मदद कर सकता है. नीम की गंध फल मक्खियों को पसंद नहीं होती, इसलिए वे पौधों और फलों पर कम बैठ सकती हैं.
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह ने बताया कि फल मक्खी के प्यूपा अक्सर पेड़ के आसपास की मिट्टी में छिपे रहते हैं. इसलिए बरसात शुरू होने से पहले या बारिश के दौरान पेड़ के आसपास की मिट्टी की हल्की गुड़ाई करना उपयोगी उपाय हो सकता है. मिट्टी की ऊपरी परत खुलने से प्यूपा धूप और प्राकृतिक परिस्थितियों के संपर्क में आते हैं, जिससे उनके बचने की संभावना कम हो सकती है.
First Published :
August 17, 2026, 10:50 IST



