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क्या आपने देखा है राजस्थान का यह अनोखा पैनोरमा? जहां हर चित्र सुनाता है प्राचीन धौलपुर की गौरवशाली गाथा

Last Updated:June 24, 2026, 15:09 IST

Machkund Panorama Dholpur: धौलपुर स्थित मचकुंड पैनोरमा राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए एक अनूठा पर्यटन स्थल है. यहां चित्रों, प्रतिमाओं और आकर्षक प्रदर्शनों के माध्यम से प्राचीन इतिहास को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है. मचकुंड से जुड़ी पौराणिक कथाओं, ऐतिहासिक घटनाओं और क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को बेहद प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है, जिससे पर्यटकों को अतीत को करीब से समझने का अवसर मिलता है. यह पैनोरमा न केवल इतिहास प्रेमियों बल्कि विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र है. यहां स्थापित कलात्मक प्रतिमाएं और दृश्यावलियां दर्शकों को उस दौर की यात्रा का अनुभव कराती हैं.

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धौलपुर: धौलपुर स्थित तीर्थराज मचकुंड का पैनोरमा इतिहास, संस्कृति और धार्मिक आस्था का अनूठा संगम है. राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति विभाग द्वारा तैयार किए गए इस पैनोरमा का उद्घाटन सितंबर 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने किया था. इसके माध्यम से मचकुंड से जुड़ी पौराणिक गाथाओं और ऐतिहासिक घटनाओं को बेहद आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया गया है.

पैनोरमा में प्रवेश करते ही पर्यटकों को मचकुंड महाराज के जीवन से जुड़ी घटनाओं की झलक देखने को मिलती है. यहां भव्य प्रतिमाओं, सुंदर पेंटिंग्स, चित्रकारी और फुल साइज सीनरी के माध्यम से उस दौर की कहानियों को जीवंत बनाया गया है. इसमें जरासंध और कालयवन द्वारा युद्ध की रणनीति बनाना, कंस की मृत्यु के बाद उसकी पत्नियों का अपने पिता जरासंध के पास पहुंचना, श्रीकृष्ण का पीछा करता कालयवन और रणछोड़ रूप में श्रीकृष्ण की कथा को विस्तार से दर्शाया गया है.

प्रतिमाओं के माध्यम से मचकुंड की पूरी गाथाइसके अलावा पैनोरमा में मचकुंड महाराज की प्रतिमा, श्रीकृष्ण-बलराम, ऋषि शेषिरायन की शिवोपासना, देवसेना के सेनापति स्वामी कार्तिकेय, मचकुंड को नींद का वरदान मिलने की घटना और देवताओं की रक्षा का वचन देने जैसे प्रसंग भी आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किए गए हैं. गंधमादन गुफा में विश्राम करते मचकुंड महाराज की झांकी भी दर्शकों का विशेष ध्यान खींचती है. जयपुर के कलाकारों द्वारा तैयार की गई यह कलाकृतियां न केवल धार्मिक महत्व को दर्शाती हैं, बल्कि इतिहास को समझने का भी बेहतरीन माध्यम हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक चित्रों व प्रतिमाओं के माध्यम से मचकुंड की पूरी गाथा को आसानी से समझ सकते हैं.

इतिहास, कला और आस्था तीनों का अनुभवपैनोरमा पर तैनात कर्मचारी किशोर कुमार झा ने बताया मचकुंड पैनोरमा प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक खुला रहता है. प्रवेश शुल्क भी काफी कम रखा गया है। वयस्कों के लिए 10 रुपये और बच्चों व विद्यार्थियों के लिए 5 रुपये शुल्क निर्धारित है. मचकुंड सरोवर के आसपास बने प्राचीन मंदिर भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. ऐसे में मचकुंड पैनोरमा धौलपुर आने वाले लोगों के लिए एक ऐसा स्थल बन गया है, जहां इतिहास, कला और आस्था तीनों का अनुभव एक साथ किया जा सकता है.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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Location :

Dhaulpur,Rajasthan

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