Health

Health Tips : सांसों के लिए ठीक नहीं…दीवार की सीलन को आज ही कराएं ठीक, इनको खतरा ज्यादा

Last Updated:September 16, 2026, 17:09 IST

Why wall dampness dangerous : क्या आप भी बारिश में घर की दीवारों पर लगने वाली सीलन को सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसा करना खतरनाक हो सकता है. लंबे समय तक बनी रहने वाली सीलन के बीच पैदा होने वाली फफूंदी सेहत के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है. गाजियाबाद की सीनियर कंसलटेंट पल्मोनोलॉजी डॉ. खुशबू लोकल 18 से बताती हैं कि फफूंदी के स्पोर्स सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं. कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों में संक्रमण का खतरा रहता है. अगर हर बार सीलन बढ़ने के साथ खांसी, बलगम या सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है तो डॉक्टर से जरूर मिलें. बच्चों और बुजुर्गों को घर की सीलन से बचाए रखना ज्यादा जरूरी है.

गाजियाबाद. बारिश में घर की दीवारों पर दिखाई देने वाली सीलन को अक्सर लोग सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक बनी रहने वाली सीलन के बीच पैदा होने वाली फफूंदी स्वास्थ्य के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है. खासकर इसका असर सांस और फेफड़ों पर पड़ सकता है. फफूंदी से निकलने वाले सूक्ष्म कण सांस के साथ शरीर में पहुंचकर एलर्जी और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं. पहले से अस्थमा, एलर्जी या कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को इससे अधिक परेशानी हो सकती है.

गाजियाबाद के यशोदा हॉस्पिटल संजयनगर की सीनियर कंसलटेंट पल्मोनोलॉजी डॉ. खुशबू लोकल 18 से बताती हैं कि घर में लगातार मौजूद नमी और फफूंदी को हल्के में नहीं लेना चाहिए. फफूंदी के स्पोर्स सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं. इससे कुछ लोगों में एलर्जी की समस्या बढ़ सकती है, जबकि कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों में संक्रमण का खतरा भी रहता है. डायबिटीज जैसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को भी ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है.

परेशानी बढ़ने पर क्या करें

डॉ. खुशबू कहती हैं कि फफूंदी के संपर्क में आने के बाद लगातार खांसी, सांस फूलना या सांस लेने में परेशानी, बलगम और एयरवेज में जलन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. कुछ मामलों में भूरे रंग का बलगम भी नजर आ सकता है. अगर किसी व्यक्ति को अस्थमा है और सामान्य इलाज के बावजूद बार-बार परेशानी बढ़ रही है तो इसके पीछे फफूंदी से जुड़ी एलर्जी या दूसरी फंगल समस्या की जांच की जरूरत हो सकती है. ऐसी ही एक स्थिति एलर्जिक ब्रोंकोपल्मोनरी एस्परगिलोसिस (ABPA) है जो कुछ अस्थमा मरीजों में देखी जाती है. बच्चों और बुजुर्गों को भी घर की सीलन को लेकर सतर्क रहना चाहिए. जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है या पहले से सांस संबंधी संवेदनशीलता है, उनमें नमी और फफूंदी परेशानी बढ़ा सकती है. अगर हर बार सीलन बढ़ने के साथ खांसी, बलगम या सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है और लक्षण लगातार बने रहते हैं तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है.

केवल ऊपरी सफाई ठीक नहीं

डॉ. खुशबू कहती हैं कि फफूंदी दिखाई देने वाले हिस्से की केवल ऊपरी सफाई न करें बल्कि सीलन के मूल कारण का स्थायी समाधान कराएं. घर में पानी का रिसाव, पाइपलाइन लीकेज या दीवार में नमी की समस्या है तो उसे समय रहते ठीक करा लें. कमरों में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें और नमी जमा न होने दें. फफूंदी ज्यादा हो तो सफाई के दौरान उचित सुरक्षा बरतें. लगातार लक्षण रहने पर खुद इलाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है.

About the AuthorPriyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

और पढ़ेंLocation :

Ghaziabad,Uttar Pradesh

First Published :

September 16, 2026, 17:09 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj