मौसम की मार से सूनी हुई खेजड़ी, सांगरी की कमी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर असर

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मौसम की मार से सूनी हुई खेजड़ी, सांगरी की कमी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संकट
मौसम की मार से सूनी हुई खेजड़ी, सांगरी की कमी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संकट
Sangri Production Reduced: पश्चिमी राजस्थान में इस बार सांगरी की पैदावार में गिरावट ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है. जोधपुर के धुंधाड़ा सहित कई क्षेत्रों में मौसम की मार के कारण खेजड़ी के पेड़ों पर कम सांगरी लगी है. इससे किसानों के साथ मजदूर वर्ग भी प्रभावित हुआ है, क्योंकि सांगरी तुड़ाई और प्रोसेसिंग से जुड़ा रोजगार घट गया है. कई परिवारों की मौसमी आय पर असर पड़ा है. बाजार में सांगरी की कमी के कारण कीमतों में उछाल देखा जा रहा है. सूखी सांगरी 900 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि कच्ची सांगरी 300-400 रुपये प्रति किलो बिक रही है. व्यापारियों का कहना है कि मांग अधिक और आपूर्ति कम है. ग्रामीण इसे सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानते हैं, क्योंकि खेजड़ी पर अच्छी पैदावार समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है.




