राजस्थान के ही पास रहा राजस्थान रॉयल्स, जानिए लक्ष्मी निवास मित्तल का खास कनेक्शन

जयपुर. राजस्थान का नाम आते ही शाही विरासत, परंपरा और खेलों के प्रति जुनून की तस्वीर सामने आती है. आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स इसी पहचान को वैश्विक मंच तक ले जाने वाली टीम मानी जाती है. अब इस टीम से जुड़ा एक बड़ा बदलाव सामने आया है, जिसने राजस्थान और देशभर के क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान खींचा है. राजस्थान की मिट्टी से जुड़े उद्योगपति लक्ष्मी निवास मित्तल का परिवार अब राजस्थान रॉयल्स से जुड़ गया है.
दुनिया के दिग्गज स्टील कारोबारी लक्ष्मी निवास मित्तल और उनके बेटे आदित्य मित्तल ने अरबपति अदार पूनावाला के साथ साझेदारी में राजस्थान रॉयल्स को करीब 1.65 बिलियन डॉलर (लगभग 15,660 करोड़ रुपये) की बड़ी डील में खरीदा है. इस सौदे के तहत मित्तल परिवार को फ्रेंचाइजी में करीब 75 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली है. इस डील में राजस्थान रॉयल्स के साथ-साथ साउथ अफ्रीका की पार्ल रॉयल्स और वेस्टइंडीज की बारबाडोस रॉयल्स टीम भी शामिल हैं. यह सौदा 2026 की तीसरी तिमाही तक बीसीसीआई, सीसीआई और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल की मंजूरी के बाद पूरा होने की संभावना है.
चुरू के सादुलपुर में एलएन मित्तल का हुआ था जन्म
लक्ष्मी निवास मित्तल का जन्म 15 जून 1950 को राजस्थान के चूरू जिले के सादुलपुर (राजगढ़) में हुआ था. एक साधारण मारवाड़ी परिवार में जन्मे मित्तल का बचपन संघर्षों से भरा रहा. बताया जाता है कि उनके गांव में 1960 तक बिजली तक नहीं पहुंची थी. वे बचपन में एक छोटे से घर में परिवार के कई सदस्यों के साथ रहते थे और जमीन पर दरी बिछाकर सोते थे. उनके पिता मोहनलाल मित्तल बाद में कोलकाता चले गए और वहां एक छोटी स्टील मिल शुरू की. लक्ष्मी मित्तल भी पढ़ाई के साथ-साथ पिता के काम में हाथ बंटाते थे.
2008 में पद्म विभूषण से हो चुके हैं सम्मानित
अपनी मेहनत और दूरदर्शिता के दम पर मित्तल ने स्टील उद्योग में वैश्विक पहचान बनाई और आज आर्सेलर मित्तल के चेयरमैन हैं, जो दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनियों में से एक है. उन्हें 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया और वे फोर्ब्स की अमीरों की सूची में भी शामिल रहे हैं. यूके के केन्सिंगटन पैलेस जैसे आलीशान निवास तक का उनका सफर उनकी मेहनत की कहानी बयां करता है.
पैत्रिक गांव से मित्तल परिवार का जुड़ाव है कायम
व्यापारिक सफलता के साथ-साथ मित्तल परिवार का अपने पैतृक गांव सादुलपुर से जुड़ाव आज भी कायम है. उन्होंने अपनी मां गीता देवी के नाम पर 2007 में एक कम्युनिटी सेंटर बनवाया. इसके अलावा स्थानीय अस्पताल, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में भी योगदान दिया. सादुलपुर और चूरू में उनके द्वारा संचालित केंद्रों पर बेटियों को कंप्यूटर शिक्षा दी जा रही है, जहां प्रवेश लेने वाली छात्राओं को 50 प्रतिशत तक छूट भी दी जाती है.
साथ ही स्वरोजगार से जुड़े कई कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं. राजस्थान के एक छोटे से गांव से निकलकर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले लक्ष्मी निवास मित्तल की कहानी आज युवाओं के लिए प्रेरणा है. अब राजस्थान रॉयल्स में उनकी हिस्सेदारी से राज्य का यह जुड़ाव और भी मजबूत होता नजर आ रहा है.



