Innovative Farming Jodhpur Farmer Income 15 Lakh | जोधपुर किसान सुमेरसिंह नवाचार

Last Updated:August 29, 2026, 10:49 IST
Jodhpur farmer Sumer Singh adopted Innovative Farming: जोधपुर के किसान सुमेरसिंह कछवाहा ने आधुनिक तकनीक, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग अपनाकर अपनी 13 बीघा जमीन से सालाना आय 3 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपए कर ली है. कृषि विज्ञान की पढ़ाई के साथ उन्होंने काजरी के वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन लिया. साढ़े तीन बीघा में नर्सरी बनाकर वे हाइब्रिड पौध बेचते हैं जिससे 5 लाख कमाते हैं. इसके अलावा सब्जी, अनाज और डेयरी से देसी घी बनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं. सुमेरसिंह ने सीमित संसाधनों में कृषि नवाचार की एक नई मिसाल पेश की है.
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Jodhpur: जोधपुर जिले के पीपाड़ क्षेत्र के जालीवाड़ा खुर्द निवासी सुमेरसिंह कछवाहा ने खेती में नवाचार और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आमदनी में एक बड़ा बदलाव हासिल किया है. कृषि विज्ञान से अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले सुमेरसिंह के परिवार की परंपरागत खेती से पहले सालाना केवल 3 से 3.5 लाख रुपए की ही आय हो पाती थी. इस सीमित आय के कारण परिवार के दैनिक खर्च पूरे करने के लिए उन्हें दूसरे काम भी करने पड़ते थे.
सरकारी नौकरी की तैयारी के साथ सुमेरसिंह ने खेती को भी पूरी गंभीरता से लिया और मल्चिंग जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना शुरू किया. काजरी के कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन और आत्मा परियोजना के तहत हरियाणा व गुजरात के कृषि संस्थानों के भ्रमण से उन्हें खेती में कई नए प्रयोग करने की प्रेरणा मिली.
सीमित जमीन पर वैज्ञानिक प्रयोग और ज्वार का उत्पादनसुमेरसिंह के परिवार के पास कुल 60 बीघा जमीन है, लेकिन 12 महीने खेती योग्य जमीन सिर्फ 13 बीघा ही उपलब्ध है. इसी सीमित जमीन पर वे लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं. उन्होंने मल्चिंग और बूंद-बूंद सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) जैसी तकनीकों को अपनाकर सब्जियों का उत्पादन काफी हद तक बढ़ाया है. काजरी के कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में उन्होंने ज्वार की खेती भी शुरू की. इस बार उन्होंने आईसीएआर दिल्ली द्वारा विकसित ज्वार की विशेष किस्म बोई है, जो महज एक महीने में लगभग 12 फीट तक बढ़ चुकी है. आज अपनी सीमित 13 बीघा जमीन पर सही प्रबंधन करके उनकी सालाना कृषि आय बढ़कर करीब 14 से 15 लाख रुपए तक पहुंच गई है.
साढ़े तीन बीघा की नर्सरी से 5 लाख रुपए की सालाना कमाईसुमेरसिंह ने केवल फसलों पर निर्भर रहने के बजाय सब्जियों की पौध तैयार करने की वैज्ञानिक तकनीक सीखी और अपने खेत के साढ़े तीन बीघा हिस्से में एक आधुनिक नर्सरी विकसित की.
पौध उत्पादन: इस नर्सरी में फूलगोभी, पत्तागोभी, मिर्च, बैंगन और टमाटर की करीब 2 लाख हाइब्रिड पौध सालाना तैयार की जाती है.
वार्षिक आय: केवल इस नर्सरी व्यवसाय से उन्हें करीब 5 लाख रुपए की सालाना शुद्ध आय प्राप्त होती है.
स्थानीय लाभ: उनकी इस नर्सरी से आसपास के अन्य किसानों को भी गुणवत्तापूर्ण और स्वस्थ पौधे आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं.
सब्जी, अनाज और डेयरी से बढ़ी त्रिकोणीय आमदनीसुमेरसिंह ने अपनी आय को बढ़ाने के लिए विविधता का मॉडल अपनाया है. वे मुख्य रूप से तीन अलग-अलग रास्तों से अपनी आमदनी अर्जित कर रहे हैं:
सब्जी उत्पादन: करीब सात बीघा जमीन में गोभी, टमाटर, हरी प्याज, मिर्च, लौकी और चौलाई जैसी सब्जियां उगाकर सारे खर्च निकालने के बाद करीब 8 लाख रुपए सालाना बचत करते हैं.
पारंपरिक फसलें: बाकी जमीन पर मूंग, मोठ, बाजरा, ग्वार, तिल, ईसबगोल, गेहूं और रायड़ा जैसी फसलें उगाकर 2.5 से 3 लाख रुपए की अतिरिक्त बचत करते हैं. सिंचाई के लिए खेत में दो कुएं और एक डिग्गी है तथा पूरी 13 बीघा जमीन पर ड्रिप सिंचाई का जाल बिछा हुआ है.
डेयरी और जैविक खाद: उनके पास चार उन्नत नस्ल की गायें हैं, जिनसे रोजाना 8 से 10 लीटर दूध मिलता है. परिवार की खपत के बाद बचे दूध से देसी घी बनाकर वे 1 से 1.5 लाख रुपए सालाना अतिरिक्त कमाते हैं. इसके साथ ही पशुओं के अपशिष्ट से जैविक खाद तैयार कर रासायनिक उर्वरकों पर होने वाले खर्च को भी कम कर रहे हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan
First Published :
August 29, 2026, 10:49 IST



