Jalor Temple: तीन प्राचीन देवालय और 250 साल पुरानी बावड़ी; कभी इसी से बुझती थी पूरे इलाके की प्यास

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प्राचीन देवालय-250 साल पुरानी बावड़ी; कभी इसी से बुझती थी पूरे इलाके की प्यास
Last Updated:September 16, 2026, 19:51 IST
Jalore Ki Puraani Mandir : जालौर की 250 साल पुरानी गोगड़ी बावड़ी का पानी 2025 में भारी बारिश के बाद शिवलिंग तक पहुंचा. 35 साल बाद दिखा यह नजारा, जो पातालेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ा है. इसी बावड़ी के पानी से पातालेश्वर महादेव के शिवलिंग का जलाभिषेक किए जाने की मान्यता है.
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जालौर. 2025 में भारी बारिश के बाद जब 250 साल पुरानी इस बावड़ी का पानी बढ़ा, तो जल सीधे शिवलिंग तक पहुंच गया. ऐसा नजारा करीब 35 साल बाद देखने को मिला. लेकिन इस बावड़ी की कहानी सिर्फ बारिश में बढ़े पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इतिहास इस प्राचीन मंदिर और यहां मौजूद तीन देवालयों से भी जुड़ा है.
स्थानीय लोग इसे गोगड़ी बावड़ी के नाम से जानते हैं. इस मंदिर में पातालेश्वर महादेव, गोगाजी और खेतलाजी के प्राचीन देवालय बने हुए हैं. कभी इसी परिसर की बावड़ी पूरे इलाके के लिए पानी का प्रमुख स्रोत हुआ करती थी. आज घर-घर पानी पहुंच गया है, लेकिन ढाई सौ साल पुरानी यह बावड़ी अब भी सुरक्षित है और इसका रखरखाव किया जाता है.
इतिहासकार ने बताई आस्था से जुड़ी कहानीइतिहासकार बंसीलाल सोनी ने लोकल 18 को बताया कि इस स्थान के नामकरण का संबंध यहां मौजूद गोगाजी के मंदिर और गोगाजी के भक्तों से भी माना जाता है. इस इलाके में गोगाजी की आस्था रखने वाले लोगों की संख्या काफी रही है, इसलिए इस जगह का नामकरण भी इसी आस्था से जुड़ा बताया जाता है.
पातालेश्वर था इस मंदिर का नामपहले इस मंदिर का नाम पातालेश्वर बताया जाता था. मंदिर के अंदर से सीढ़ियां नीचे की ओर जाती थीं और वहां एक प्राचीन बावड़ी बनी हुई थी. इसी बावड़ी के पानी से पातालेश्वर महादेव के शिवलिंग का जलाभिषेक किए जाने की मान्यता है. सदियों पुरानी यह बावड़ी कभी लोगों की प्यास बुझाने का प्रमुख जलस्रोत थी, तो दूसरी ओर मंदिर की पूजा-पद्धति से भी इसका गहरा संबंध रहा है.
2025 की बारिश में शिवलिंग तक पहुंचा पानीसाल 2025 में जालोर में हुई भारी बारिश के बाद इस प्राचीन बावड़ी में पानी का स्तर तेजी से बढ़ गया. बारिश इतनी हुई कि बावड़ी का पानी ऊपर तक आ गया और शिवलिंग तक पहुंच गया. इसके बाद यहां एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसमें शिवलिंग का जलाभिषेक अपने आप होता हुआ नजर आया.
35 साल बाद देखने को मिला ऐसा नजारास्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 35 साल बाद ऐसा नजारा देखने को मिला था. बारिश के बाद बावड़ी में जमा हुआ पानी सीधे शिवलिंग तक पहुंचा और मंदिर से जुड़ी पुरानी मान्यता एक बार फिर लोगों के सामने दिखाई दी. इसके बाद साल 2026 में करीब दो-तीन महीने पहले बावड़ी के पानी को मोटर और पाइप की मदद से बाहर निकाला गया. इस दौरान इसकी प्राचीन संरचना को भी देखा गया और यह सामने आया कि इतने वर्षों बाद भी बावड़ी काफी सुरक्षित स्थिति में है. आज यह बावड़ी पहले की तरह इलाके का प्रमुख जलस्रोत भले नहीं है, लेकिन इसकी अहमियत कम नहीं हुई है. घरों तक पानी पहुंचने के बाद इसका रोजमर्रा का इस्तेमाल कम हुआ है, फिर भी इसका रखरखाव किया जा रहा है.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Jalor,Jalor,Rajasthan
First Published :
September 16, 2026, 19:51 IST



