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रणबीर कपूर से लेकर रणवीर सिंह तक, 40 में पिता तो बन गए लेकिन आम लोगों की बायलॉजी ज्यादा कठिन, आती हैं कई जटिलताएं

Fertility Problem after 40 : आजकल बड़ी-बड़ी सेलीब्रिटीज में 40 के बाद पिता बनने का चलन बढ़ गया है. रणबीर कपूर हों या रणवीर सिंह ये दोनों करीब-करीब 40 में ही पिता बने हैं. शाहरूख खान तो 50 के आसपास पिता बने थे. वैसे समाज अब बदल रहा है. लोग कैरियर को प्राथमिकता दे रहे हैं और सैटल होने के बाद शादी करने को तवज्जो देने लगे हैं. पहले लड़कियां कामकाजी बनीं. इस कारण लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ गई. जाहिर है इससे लड़कों की भी शादी की औसतन उम्र बढ़ गई. पर यहां मसला ये है कि क्या 40 की उम्र में या इसके बाद पुरुषों का पिता बनना सही है. अगर बायलॉजी के हिसाब से देखें तो यह फैसला बहुत अच्छा नहीं है. ऐसा क्यों है? इसके बारे में हमने पुरुष फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. विनीत मल्होत्रा से विस्तार से बात की. इसलिए यह पूरी स्टोरी में आपको पुरुष प्रजनन से जुड़ी कई जटिलताओं के बारे में पता चल जाएगा.

ट्रेंड बनने लगा है 40 के बाद पिता बननाडॉ. विनीत मल्होत्रा ने बताया कि यह सच है कि आजकल लोग 40 के बाद पिता बनना पसंद करने लगे हैं. मेरे पास भी कुछ बड़े घरों के लड़के स्पर्म फ्रीज कराने के लिए आते हैं. उन्हें लगता है कि कुछ साल बाद ही बच्चा करें तो हमारे लिए बेहतर है. यह सिर्फ सेलीब्रिटीज ही नहीं कर रहे हैं बल्कि ऐसा कई लोग कर रहे हैं. इसलिए यह एक ट्रेंड बनने लगा है. लेकिन एक उम्र के बाद स्पर्म की क्वालिटी कमजोर होने लगती है. इसलिए स्पर्म को फ्रीज कराना एक अच्छा तरीका है. पर 40 के बाद पिता बनना रिस्क की आशंका को बढ़ा देता है. वास्तव में 40 की उम्र के बाद पुरुषों में प्रजनन चक्र की जैविक घड़ी धीमी पड़ने लगती है. महिलाओं में जहां मेनोपॉज़ के साथ अंडों का बनना पूरी तरह बंद हो जाता है, वहीं पुरुषों में स्पर्म का निर्माण तो जारी रहता है लेकिन 40 के बाद टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर हर साल 1 प्रतिशत की दर से घटने लगता है. जाहिर है इससे स्पर्म की जैविक गुणवत्ता गिरने लगती है.

स्पर्म होने लगते हैं कमजोर40 साल की उम्र के बाद मर्दो में स्पर्म कई तरह से कमजोर होने लगते हैं. डॉ. विनीत मल्होत्रा ने बताया कि स्पर्म में मुख्य रूप से चार चीजों को देखा जाता है. स्पर्म की मात्रा (Concentration), स्पर्म की गतिशीलता (motility), स्पर्म का आकार (morphology) और स्पर्म का डीएनए. ये चार चीजें महिलाओं के अंडाणु से फ्यूज होने के लिए बहुत जरूरी मानक है. लेकिन 40 की उम्र के बाद स्पर्म की संख्या, सीमेन की मात्रा और स्पर्म की गतिशीलता कम होने लगती है और स्पर्म के आकार में परिवर्तन होने शुरू होने लगता है. टेस्टिस की सेमिनीफेरस ट्यूब्युल्स का फंक्शन घटने लगती है, जिससे स्पर्म उत्पादन की दर धीमी हो जाती है. वहीं प्रोस्टेट ग्लैंड और सेमिनल वेसिकल्स का फंक्शन घटने से वीर्य की मात्रा और उसमें मौजूद पोषक तत्वों जैसे कि फ्रूक्टोज, जिंक आदि की कमी हो जाती है. 40 के बाद फ्री रेडिकल्स और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के कारण स्पर्म के डीएनए स्ट्रैंड टूटने लगते हैं. ये सब पिता बनने के अच्छे संकेत नहीं है. अंडाणु बेहद शक्तिशाली खोल में बंद रहता है जिसे तोड़कर स्पर्म को पार करना होता है. यही कारण है कि पुरुषों में करोड़ों स्पर्म एक साथ निकलकर अंडाणु को भेदने के लिए प्रतिद्वंद्विता करते हैं लेकिन एक ही सफल हो पाता है. इसी से समझा जा सकता है कि स्पर्म का ताकतवर होना कितना जरूरी है. अगर स्पर्म के लिए ये चार मानक कमजोर है तो महिला के अंडाणु से फ्यूज होने के बाद भी कई तरह की जटिलताएं आ सकती है.

हार्मोन की कमी और बीमारियां विलेन डॉ. विनीत मल्होत्रा 40 के बाद मर्दो में प्रजनन क्षमता के लिए जरूरी टेस्टोस्टेरॉन, फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन, ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन, गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन सहित कई हार्मोन में कमी आने लगती है. टेस्टोस्टेरोन के कम होने से स्पर्म बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और कामेच्छा में कमी आने लगती है. FSH की कमी होने पर टेस्टिस नए और स्वस्थ स्पर्म नहीं बना पाते हैं. LH का स्तर घटने से टेस्टोस्टेरोन बनना कम हो जाता है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से स्पर्म काउंट गिर जाता है. अगर थायरॉइड हार्मोन का स्तर भी कम होने लगे तो शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ने लगता है जिससे स्पर्म की गतिशीलता और आकार प्रभावित होते हैं. डॉ. विनीत मल्होत्रा कहते हैं कि ये हार्मोन स्पर्म की गुणवत्ता को मैंटेन रखने के लिए बहुत जरूरी है. लेकिन कुदरत की बनाई मानक उम्र के बाद दुर्भाग्य से यह सब कम होने लगता है और यही सब पुरुष को पिता बनाने में विलेन का काम करने लगते हैं.

प्रजनन क्षमता में भी कमजोरीडॉ. विनीत मल्होत्रा बताते हैं कि 40 के बाद अक्सर पुरुषों में यौन संबंध बनाने में कुछ न कुछ दिक्कतें होने लगती है क्योंकि तब यौन क्षमता में कमजोरी आने लगती है. इसलिए 40 की उम्र का कट-ऑफ को सबसे सही मानते हैं क्योंकि इस उम्र के बाद पुरुषों में फर्टिलिटी पर असर पड़ने लगती है. कुछ पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन यानी यौन संबंध बनाने के दौरान लिंग का ढीलापन शुरू हो जाती है. इस स्थिति में चूंकि वह संबंध नहीं बना पाता है इसलिए स्पर्म के निकलने का कोई चांस ही नहीं है. दूसरा जब स्पर्म टेस्टिस के अंदर जमा होने लगेगा तो यह पुराना हो जाएगा जिससे इसकी गुणवत्ता कम हो जाएगा.

बच्चों पर सीधा असरडॉ. विनीत मल्होत्रा कहते हैं कि अगर पुरुषों के स्पर्म में ये सारी दिक्कतें हैं तो अंडा के साथ फ्यूज होने के बाद जो गर्भ में बच्चा होगा उसमें सबसे पहले मिसकैरिज यानी गर्भपात का डर रहेगा. इसके बाद बच्चे के प्रीमेच्योर जन्म यानी समय से पहले डिलीवरी का खतरा रहेगा. इसके साथ ही अगर बच्चा पैदा ले लेता है तो उसमें ऑटिज्म, सिजोफ्रेनिया, एडीएचडी बीमारियों का जोखिम भी रहेगा. कुछ बच्चे बौने हो सकते हैं. हालांकि ये सब रेयर होते हैं लेकिन खतरा तो रहेगा.

पुरुषों के लिए सही उम्र क्या हैडॉ. विनीत मल्होत्रा ने बताया कि पुरुषों के लिए पिता बनने का सही उम्र वैसे 25-30 सबसे आइडियल है लेकिन 35 तक पिता बन जाए तो यह कुदरत के अनुकूल है. अगर आप 35 में पहला बच्चा कर रहे हैं तो 40 में दूसरा भी कर सकते हैं. हालांकि आजकल विज्ञान ने तरक्की कर ली है. ऐसे में यदि डॉक्टरों की निगरानी में पिता बनने की तैयारी करते हैं तो बहुत कुछ ठीक ही रहेगा.

पुरुष फर्टिलिटी सही कैसे रखेंपुरुषों में फर्टिलिटी सही रखने का सबसे बेहतर तरीका है कि वे खुश रहें, ज्यादा तनाव न लें. पर्याप्त नींद लें. स्मोकिंग न करें. मोटोपा नहीं होना चाहिए. शराब का सेवन न करें. इसके साथ ही रोज एक्सरसाइज करें और एंटीऑक्सीडेंट्स फूड्स का सेवन करें. पुरुषों की फर्टिलिटी और स्पर्म क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए टमाटर, अखरोट, अनार और बेरीज जैसे ब्लूबेरी व स्ट्रॉबेरी, पालक व हरी पत्तेदार सब्जियां , डार्क चॉकलेट, कद्दू के बीज बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट्स फूड्स हैं, जो स्पर्म को फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाकर उनकी काउंट और मोटिलिटी को बढ़ाते हैं. इसके साथ ही मछलियां, ड्राई फ्रूट्स, फल, सीड्स आदि का सेवन करें.

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