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Last Updated:December 20, 2025, 23:02 IST
Mustard Crop Protection Tips: सरसों की फसल इस समय पाले और चेपा रोग के खतरे से जूझ रही है. ठंड बढ़ने पर पाला फसल को नुकसान पहुंचाता है, वहीं चेपा रस चूसकर उत्पादन घटा देता है. समय पर सिंचाई, धुआं करना, नीम आधारित कीटनाशक और संतुलित खाद का प्रयोग कर इन खतरों से बचाव किया जा सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार सही समय पर उपाय अपनाने से सरसों की पैदावार सुरक्षित रखी जा सकती है.
सर्दी के मौसम में सरसों की फसल किसानों के लिए आमदनी का बड़ा सहारा होती है, लेकिन दिसंबर के अंत और जनवरी की शुरुआत में पड़ने वाला पाला और चेपा (माहू) कीट इस फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. यदि समय रहते सही उपाय नहीं किए जाएं तो उपज और दानों की गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो जाती हैं.

पाले का असर सरसों के पौधों की ऊपरी बढ़वार पर पड़ता है. इससे पौधों में द्वितीयक शाखाएं निकल आती हैं और दाने छोटे व कमजोर रह जाते हैं. पाले से बचाव का सबसे सरल और प्रभावी तरीका समय पर सिंचाई करना है. पाले की आशंका होने पर हल्की सिंचाई करने से खेत का तापमान संतुलित रहता है और पौधों को नुकसान नहीं होता.

इसके अलावा किसान पौधों की सहनशीलता बढ़ाने के लिए सल्फर युक्त यौगिक, थायोयूरिया या कुछ अनुशंसित फफूंदनाशकों का छिड़काव किया जा सकता है. ये उपाय पौधों को ठंड के झटके से बचाने में मदद करते हैं.
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सरसों की फसल में सफेद रोली, तना गलन और अल्टरनेरिया झुलसा जैसे रोग अधिक देखने को मिलते हैं. यदि खेत में रोग के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत रिडोमिल एमजेड का छिड़काव करना लाभकारी रहता है. इससे रोग का फैलाव रुकता है और फसल सुरक्षित रहती है.

सरसों में चेपा सबसे गंभीर कीट माना जाता है, खासकर देर से बोई गई फसलों में इसका प्रकोप ज्यादा होता है. यह कीट फूलों और फलियों का रस चूसकर पौधे को कमजोर कर देता है, जिससे दानों में तेल की मात्रा भी कम हो जाती है.

यदि 10 पौधों में से एक पौधे पर चेपा दिखाई दे या एक पुष्प गुच्छे में 20 से 30 माहू हों, तो तुरंत ऑक्सीडीमेटोन मिथाइल या डाइमेथोएट का छिड़काव करना चाहिए. लेकिन यह छिड़काव किसान हमेशा दोपहर बाद करें, ताकि मधुमक्खियों और लाभकारी कीटों को नुकसान न पहुंचे.
First Published :
December 20, 2025, 23:02 IST
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सरसों की तैयार फसल खतरे में! पाले और चेपा रोग से बचाव के आसान कृषि टिप्स



