कितना कोलेस्ट्रॉल लेवल दिल के लिए बन सकता है मुसीबत? अपोलो की कार्डियोलॉजिस्ट से जानिए

How Much Cholesterol Is Too Much: कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए एक जरूरी फैट है, जो सेल्स के निर्माण, हार्मोन बनाने और विटामिन D के प्रोडक्शन में अहम भूमिका निभाता है. जब इसका स्तर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है, तो यही कोलेस्ट्रॉल दिल की सेहत के लिए खतरा बन सकता है. बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे धमनियों की दीवारों पर जमा होने लगता है, जिससे ब्लड फ्लो प्रभावित होता है. इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. यही कारण है कि डॉक्टर समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराने की सलाह देते हैं. इससे हार्ट डिजीज से बचने में मदद मिल सकती है.
दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल की सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वनीता अरोरा ने को बताया हाई कोलेस्ट्रॉल हार्ट डिजीज की वजह बन सकता है, लेकिन सिर्फ टोटल कोलेस्ट्रॉल देखना ही पर्याप्त नहीं होता है. यह समझना भी जरूरी है कि शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल, गुड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर कितना है. बैड कोलेस्ट्रॉल धमनियों में फैट जमा करने का काम करता है, जबकि गुड कोलेस्ट्रॉल अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को हटाकर दिल की सुरक्षा करने में मदद करता है.
कोलेस्ट्रॉल लेवल कितना होना चाहिए?
कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार ब्लड में टोटल कोलेस्ट्रॉल 200 mg/dL से कम होना चाहिए. बैड कोलेस्ट्रॉल यानी LDL का स्तर 100 mg/dL से कम होना बेहतर माना जाता है. जिन लोगों को पहले से हार्ट डिजीज, डायबिटीज या स्ट्रोक का खतरा है, उनके लिए LDL का टारगेट इससे भी कम रखा जा सकता है. गुड कोलेस्ट्रॉल पुरुषों में कम से कम 40 mg/dL और महिलाओं में 50 mg/dL या उससे अधिक होना चाहिए. ट्राइग्लिसराइड्स 150 mg/dL से कम रहना अच्छा माना जाता है. अगर इनमें से कोई भी लेवल गड़बड़ होता है, तो हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ जाता है.
कब बढ़ता है हार्ट डिजीज का खतरा?
डॉ. अरोरा बताती हैं कि जब शरीर में LDL और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर लगातार बढ़ा रहता है, तो धमनियों में प्लाक बनने लगता है. इससे धमनियां संकरी हो जाती हैं और हार्ट तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता है. समय के साथ यह स्थिति हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हार्ट रिलेटेड बीमारियों का कारण बन सकती है. सबसे बड़ी बात यह है कि हाई कोलेस्ट्रॉल के शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए इसे साइलेंट रिस्क फैक्टर भी माना जाता है.
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
एक्सपर्ट के मुताबिक जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा या हार्ट डिजीज की फैमिली हिस्ट्री है, उन्हें समय-समय पर कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए. इसके अलावा स्मोकिंग करने वाले, शारीरिक रूप से कम सक्रिय रहने वाले और ज्यादा तला-भुना या प्रोसेस्ड फूड खाने वाले लोगों में भी हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा अधिक होता है.
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर आपकी लिपिड प्रोफाइल रिपोर्ट में LDL या ट्राइग्लिसराइड्स लगातार बढ़े हुए हैं या आपको सीने में दर्द, सांस फूलना, जल्दी थकान या अन्य लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह लें. समय पर जांच और सही इलाज से हार्ट डिजीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. दिल को स्वस्थ रखने के लिए बैलेंस्ड डाइट बेहद जरूरी है. अपने खाने में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, ओट्स और स्वस्थ वसा वाले खाद्य पदार्थ शामिल करें. तली-भुनी चीजें, ट्रांस फैट, प्रोसेस्ड फूड और अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें.



