Jhunjhunu News I 400 साल पुराना गांव, नई सोच की पहचान…घोड़ीवारा खुर्द

Last Updated:August 07, 2026, 12:49 IST
झुंझुनूं जिले का घोड़ीवारा खुर्द गांव करीब 400 वर्षों का इतिहास समेटे हुए है. कभी शाही घोड़ों की घुड़साल के लिए पहचान रखने वाला यह गांव आज लोक आस्था, शिक्षा, देशसेवा और सामाजिक बदलाव की मिसाल बन चुका है. नेतदादा मंदिर की धार्मिक मान्यता, पर्यावरण संरक्षण की परंपरा और युवाओं के सर्विंग हड्स अभियान ने इस गांव को अलग पहचान दिलाई है.
झुंझुनू जिला मुख्यालय से करीब 24 किलोमीटर दूर बसा घोड़ीवारा खुर्द (छोटा) गांव अपने भीतर करीब चार शताब्दियों का इतिहास समेटे हुए है. गांव के बुजुर्गों के अनुसार इसकी बसावट लगभग 400 वर्ष पहले हुई थी. जागीरदारी के दौर में यहां घोड़ों की घुड़साल हुआ करती थी. उस समय यही भारी मात्रा में महंगे घोड़ों की मौजूदगी रहती थी. शाही घोड़ो की घुड़साल इस इलाके की खास पहचान मानी जाती थी. यही पहचान आगे चलकर गांव के नाम का आधार बनी और इसे घोड़ीवारा कहा जाने लगा.
घोड़ीवारा खुर्द और मोहब्बतसरी की सीमा पर रेलवे फाटक के पास लोक देवता नेतदादा का प्रसिद्ध मंदिर भी मौजूद है, यहां दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मंदिर परिसर में विशाल मेला भरता है. ग्रामीणों में मान्यता है कि नेतदादा की कृपा से इलाके में प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप नहीं होता. इसी विश्वास ने इस स्थान को धार्मिक आस्था के साथ-साथ गांव की सांस्कृतिक पहचान से भी जोड़ दिया है.
लोक देवता नेतदादा के इस मंदिर में बड़ी मात्रा में किसान आते हैं. किसान इस मंदिर में आकर अपनी फसल में उत्पादन में बढ़ोतरी और उसे प्राकृतिक आपदाओं से बचाने की दुआ करते हैं. इसके अलावा मंदिर के आसपास के क्षेत्र में पेड़ों को भी नहीं काटा जाता है. मान्यता है कि लोक देवता नेतदादा प्रकृति में निवास करते हैं, इसलिए यहां के लोग प्रकृति से बहुत प्रेम करते हैं. इस कारण गांव में समय समय पर बड़े स्तर पर पौधारोपण कार्यक्रम के आयोजन भी होते रहते हैं.
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इस गांव में और आसपास के इस क्षेत्र की एक बड़ी खासियत यहां के लोगों की शिक्षा और सेवाभाव भी है. ग्रामीणों के अनुसार औसतन हर घर से कोई न कोई व्यक्ति शिक्षा, चिकित्सा, सेना, पुलिस अथवा सरकारी और निजी क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा है. गांव के हवलदार मोहनलाल धानिया को राष्ट्रपति पुलिस मेडल से सम्मानित हो चुके हैं. वहीं शिक्षक कैलाश पूनिया, प्राचार्य नितिन पूनिया और अंजू सुंडा भी बेहतरीन सेवाओं के लिए सम्मानित हो चुके हैं.
घोड़ीवारा खुर्द और पंचायत क्षेत्र की मिट्टी ने देशसेवा के लिए भी कई सपूत दिए हैं. मुकुंदगढ़-मंडावा रोड पर पंचायत के गांव जांटवाली में प्राचीन गोगामेड़ी मंदिर स्थित है, जहां गोगानवमी के अवसर पर बड़ा मेला आयोजित होता है. धार्मिक आस्था के इस केंद्र के साथ ही यह क्षेत्र देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों की याद भी संजोए हुए है. यहां के सपूत महेंद्र सिंह ढाका ने देश की रक्षा करते हुए शहादत दी थी.
गांव के सर्विंग हँड्स कैंपेन के जरिए गांव में प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने के लिए कपड़े और जूट के थैलों का वितरण किया जाता है. पर्यावरण को बचाने और गांव को हरा-भरा बनाने के लिए नियमित रूप से पौधरोपण अभियान भी चलाया जाता है. इसके साथ ही दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता अभियान, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया जाता है. इस गांव में अधिकांश लोग दहेज मुक्त शादी करते हैं, इसके अलावा प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग नहीं करते हैं.
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August 07, 2026, 12:49 IST



