JLN अस्पताल में बदली व्यवस्था, पर्ची के काउंटर बढ़े, अब लंबी लाइनों से ऐसे मिलेगा छुटकारा

Last Updated:September 17, 2026, 15:44 IST
Nagaur JLN Hopital Counter Line For Registration : नागौर के जेएलएन अस्पताल में मरीजों को अब कम इंतजार करना पड़ेगा. ओपीडी काउंटर और मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के लिए मैनपावर बढ़ाया गया है. अस्पताल प्रशासन का मानना है कि इससे पर्ची बनवाने में लगने वाला समय कम होगा और मरीजों को इलाज के लिए ओपीडी तक पहुंचने में आसानी होगी. खासकर बुजुर्ग मरीजों को इसका फायदा मिलेगा.
नागौर के जेएलएन अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को अब लम्बा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. मरीजों या उनके परिजनों को ओपीडी पर्ची बनवाने और मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना से जुड़े काम के लिए लंबी कतारों में ज्यादा समय नहीं लगेगा. अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की सुविधा को देखते हुए काउंटरों की संख्या बढ़ाने के साथ मैनपावर में भी बढ़ोतरी की है. नई व्यवस्था से भीड़ कम होगी और मरीजों का काम तेज होगा.
अस्पताल में पहले ओपीडी पर्ची बनाने के लिए दो काउंटर संचालित किए जा रहे थे. अब इनकी संख्या बढ़ाकर तीन कर दी गई है. नए काउंटर की शुरुआत के बाद मरीजों को पर्ची बनवाने के लिए कम समय तक इंतजार करना पड़ेगा. अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की सुविधा के लिए महिला, पुरुष और बुजुर्ग मरीजों के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था भी की है, ताकि भीड़ को व्यवस्थित किया जा सके.
अलग-अलग कतारों की व्यवस्था होने से पर्ची काउंटर पर मरीजों की भीड़ एक ही जगह जमा नहीं होगी. महिला, पुरुष और बुजुर्ग मरीज अपनी निर्धारित लाइन में जाकर पर्ची बनवा सकेंगे. अस्पताल प्रशासन का मानना है कि इससे पर्ची बनवाने में लगने वाला समय कम होगा और मरीजों को इलाज के लिए ओपीडी तक पहुंचने में आसानी होगी. खासकर बुजुर्ग मरीजों को इसका फायदा मिलेगा.
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मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना यानी मां योजना के काम को भी तेज करने के लिए अस्पताल में ऑपरेटरों की संख्या बढ़ाई गई है. पहले की तुलना में अब योजना से जुड़े काम के लिए ज्यादा कर्मचारी लगाए गए हैं. अस्पताल प्रशासन के अनुसार, योजना के तहत 8 ऑपरेटर काम संभालेंगे. इससे मरीजों की एंट्री, दस्तावेजों और क्लेम से जुड़े कार्यों को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी.
एमसीएच विंग में चार ऑपरेटर पहले से काम कर रहे हैं. इसके अलावा जेएलएन अस्पताल में दो और एमसीएच में दो नर्सिंग स्टाफ को भी इस व्यवस्था से जोड़ा गया है. इस तरह कुल 16 कर्मियों की स्पेशल टीम योजना से जुड़े काम को संभालेगी. मैनपावर बढ़ने से मरीजों के दस्तावेज और क्लेम संबंधी प्रक्रिया तेजी से पूरी होगी.
अस्पताल प्रशासन का फोकस केवल मरीजों का इंतजार कम करने पर ही नहीं, बल्कि योजना के क्लेम समय पर दर्ज कराने पर भी है. क्लेम की एंट्री तेजी से होने से अस्पताल को मिलने वाले फंड में भी बढ़ोतरी हो रही है. जुलाई में अस्पताल को करीब 40 लाख रुपए का फंड मिला था. अगस्त में यह राशि बढ़कर करीब 65 लाख रुपए हो गई. सितंबर में प्रशासन ने 80 लाख रुपए फंड हासिल करने का लक्ष्य रखा है.
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, फंड में बढ़ोतरी होने से जेएलएन अस्पताल में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. नई काउंटर व्यवस्था, अलग-अलग कतारें और मां योजना के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती से मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है. पर्ची बनाने से लेकर योजना से जुड़े काम तक प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश की जा रही है, ताकि अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों का समय बचे.
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September 17, 2026, 15:44 IST



