Kanchan Dham Bundi 12 Jyotirlinga Temple

Last Updated:August 12, 2026, 07:55 IST
Kanchan Dham Bundi 12 Jyotirlinga Temple: राजस्थान के हाड़ौती अंचल में बूंदी के गैंडोली के पास अरावली की तलहटी में स्थित ‘कंचन धाम’ आस्था का बड़ा केंद्र है. 27 बीघा में फैले इस धाम में देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के स्वरूप एक ही परिसर में स्थापित हैं. इनकी खास बात यह है कि इन्हें मूल ज्योतिर्लिंगों की पवित्र मिट्टी लाकर बनाया गया है. वर्ष 2007 में कंचनदास महाराज द्वारा स्थापित इस मंदिर में 3-3 फीट के ज्योतिर्लिंगों के बीच तालाब में शिव परिवार विराजमान है, जहां सावन में भारी भीड़ उमड़ रही है.
कोटा. सावन के महीने में भगवान शिव के भक्त देशभर के ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. लेकिन हाड़ौती की धरती पर एक ऐसा धाम भी है, जहां देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के एक साथ दर्शन किए जा सकते हैं. अरावली की तलहटी में गैंडोली के पास स्थित कंचन धाम में द्वादश ज्योतिर्लिंगों को एक ही परिसर में स्थापित किया गया है. खास बात यह है कि इन ज्योतिर्लिंगों की स्थापना देशभर में स्थित संबंधित ज्योतिर्लिंगों की पवित्र मिट्टी लाकर की गई है.
कोटा से करीब 72 किलोमीटर और बूंदी से लगभग 32 किलोमीटर दूर लाखेरी मार्ग पर स्थित कंचन धाम करीब 27 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है. यहां सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं. धाम के आचार्य गोपाल कृष्ण पांडे के अनुसार, ब्रह्मलीन कृष्णदास कंचन महाराज ने वर्ष 2007 में कंचन धाम का निर्माण करवाया था.
कंचन धाम में भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों के स्वरूप एक ही परिसर में स्थापित हैं. इनमें सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, वैद्यनाथ, भीमाशंकर, रामेश्वरम, नागेश्वर, विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, केदारनाथ और घृष्णेश्वर शामिल हैं. प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की जलधारी सहित ऊंचाई करीब तीन फीट है.
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कंचन धाम सेवा संस्था ट्रस्ट के अध्यक्ष भगवान सहाय ने बताया कि ट्रस्ट की स्थापना वर्ष 2014 में हुई थी. देशभर में स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों की पवित्र मिट्टी यहां लाकर धार्मिक विधि-विधान के साथ ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की गई. मंदिर के निर्माण में दक्षिण भारत और धौलपुर के बंशीपुर पहाड़ के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है. इन्हीं पत्थरों से मंदिर के साथ विशेष छतरियां भी तैयार की गई हैं.
धाम की बनावट भी इसे खास बनाती है. सभी ज्योतिर्लिंगों को गोलाकार स्वरूप में स्थापित किया गया है और इनके बीच बने तालाब में भगवान शिव का पूरा परिवार विराजमान है. यहां प्रतिदिन सुबह 5 बजे पूजा-अर्चना होती है. सुबह भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है, जबकि शाम 7:30 बजे महाआरती होती है. ट्रस्ट की ओर से गुरु महाराज कंचनदास महाराज के समाधि स्थल का निर्माण कार्य भी पूरा किया जा चुका है. सावन के दौरान यहां शिवभक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है.
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August 12, 2026, 07:55 IST



