Samantha Ruth Prabhu: सुबह की इस आदत से कोई समझौता नहीं, समांथा रुथ प्रभु रोज 30 मिनट करती हैं ये एक काम, फायदे चौंका देंगे

Last Updated:October 16, 2026, 14:55 IST
Samantha Morning Habit: साउथ इंडियन एक्ट्रेस समांथा रुथ प्रभु जल्द ही मां बनने वाली हैं. हाल ही में उन्होंने अपने एक ऐसे मॉर्निंग हैबिट के बारे में बताया है, जो वो किसी भी हालत में मिस नहीं करती हैं. उनकी ये आदत आपकी भी जिंदगी बदल सकती है. खासतौर पर यदि आप तनाव और रोजमर्रा की जिम्मेदारियां के कारण मेंटली डिस्टर्ब महसूस कर रहे हैं.
ख़बरें फटाफट
आमतौर पर सेलिब्रिटी सुबह उठने के साथ अपनी मॉर्निंग ड्रिंक को लेकर काफी सीरियस होते हैं. लेकिन साउथ एक्ट्रेस समांथा रुथ प्रभु अपनी सुबह की एक खास आदत को लेकर काफी गंभीर हैं. वो चाहे कितनी भी व्यस्त क्यों न हों, ग्रैटिट्यूड जर्नल के लिए 30 मिनट से एक घंटे तक का समय जरूर निकालती हैं. समांथा के मुताबिक, इस आदत ने मुश्किल दौर में उनके सोचने के तरीके को बदलने में मदद की. इसके बाद वह सुबह की धूप लेती हैं और मेडिटेशन करती हैं.
हालांकि कि ये कोई नयी चीज नहीं है. भारतीय घरों में सदियों से सुबह उठकर ईश्वर को प्रमाण करने और आभार व्यक्त करने की परंपरा रही है. लेकिन आज की जनरेशन इसे पूरी तरह से भूला चुकी है. ज्यादातर लोग सुबह उठते से ही सबसे पहले फोन चेक करते हैं, सोशल मीडिया पर घटों बर्बाद कर देते हैं. शायद यही कारण है कि इस मॉर्डन एज में ज्यादातर लोग मेंटल हेल्थ इश्यू का सामना कर रहे हैं. इसलिए भी ये समझना जरूरी है कि ग्रैटिट्यूड के साथ दिन की शुरुआत लोग क्यों करते हैं? और इसके फायदे क्या हैं. (फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम @samantharuthprabhuoffl)
समांथा क्यों लिखती हैं ग्रैटिट्यूड डायरी?समांथा रुथ प्रभु ने हाल ही में चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान अपनी मॉर्निंग रूटीन के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि वह सुबह उठकर सबसे पहले अपनी ग्रैटिट्यूड डायरी में एक पन्ना लिखती हैं. इसमें वह उन चीजों को लिखती हैं, जिनके लिए वह आभारी महसूस करती हैं. एक्ट्रेस ने बताया कि जब वह जिंदगी के मुश्किल दौर से गुजर रही थीं, तब उन्हें ग्रैटिट्यूड डायरी लिखने की सलाह दी गई थी. शुरुआत में उनके लिए सकारात्मक बातें लिखना आसान नहीं था, क्योंकि उस समय उनकी भावनाएं अच्छी नहीं थीं. हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने महसूस किया कि भले ही उनकी स्थिति में तुरंत बड़ा बदलाव नहीं आया, लेकिन उनके सोचने का तरीका बदलने लगा. इससे उन्हें मानसिक रूप से बेहतर महसूस करने में मदद मिली.
View this post on Instagram



