Rajasthan

कोटा के दंपती ने हुनर को बनाया समाजसेवा का जरिया, 116 स्कूलों में 15,500 से ज्यादा बच्चों के बाल मुफ्त काटे

Last Updated:August 22, 2026, 09:57 IST

Kota Unique Social Service: कोटा में बृजेश कुमार सेन और उनकी पत्नी ममता सेन अपने हुनर को समाजसेवा का जरिया बनाकर सरकारी स्कूलों और आश्रमों के बच्चों की मुफ्त हेयर कटिंग कर रहे हैं. 11 जुलाई 2024 से शुरू हुई इस मुहिम के तहत अब तक करीब 116 स्कूलों और आश्रमों में 15 हजार 500 से ज्यादा बच्चों की कटिंग की जा चुकी है. बृजेश अपनी टीम के साथ सप्ताह में चार दिन अलग-अलग स्कूलों में कैंप लगाते हैं और एक दिन में करीब 300 से 350 बच्चों की हेयर कटिंग करते हैं. शुरुआत में अभियान सिर्फ लड़कों के लिए था, लेकिन छात्राओं की मांग के बाद बृजेश की पत्नी ममता भी इस मुहिम से जुड़ गईं. बृजेश का अपना हेयर सैलून और ममता का ब्यूटी पार्लर है. दोनों अपने व्यवसाय के साथ बच्चों के बीच स्वच्छता, समानता और आत्मविश्वास का संदेश पहुंचा रहे हैं.

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कोटा दंपती की अनोखी सेवा, 116 स्कूलों में 15,500 बच्चों के बाल मुफ्त काटेZoomकोटा के दंपति अपने हुनर को समाजसेवा का जरिया बनाकर सरकारी स्कूलों और आश्रमों के बच्चों की मुफ्त हेयर कटिंग कर रहे हैं

कोटा. समाजसेवा के लिए हमेशा बड़ी रकम या संसाधनों की जरूरत नहीं होती. अगर इंसान के पास हुनर और दूसरों के लिए कुछ करने का जज्बा हो, तो वही हुनर किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकता है. कोटा में ऐसा ही उदाहरण बृजेश कुमार सेन और उनकी पत्नी ममता सेन पेश कर रहे हैं. दोनों अपने हुनर को समाजसेवा का जरिया बनाकर सरकारी स्कूलों और आश्रमों में पढ़ने वाले बच्चों की नि:शुल्क हेयर कटिंग कर रहे हैं.

कोटा के बालिता क्षेत्र में रहने वाले इस दंपती ने 11 जुलाई 2024 से यह अभियान शुरू किया था, जो अब लगातार आगे बढ़ रहा है. बृजेश अपनी टीम के साथ सप्ताह में चार दिन अलग-अलग सरकारी स्कूलों और आश्रमों में कैंप लगाते हैं. अब तक करीब 116 स्कूलों और आश्रमों में 15 हजार 500 से ज्यादा बच्चों की मुफ्त हेयर कटिंग की जा चुकी है. इस पहल की खास बात यह है कि बच्चों को सिर्फ मुफ्त कटिंग ही नहीं मिल रही, बल्कि साफ-सफाई, आत्मविश्वास और समानता का संदेश भी दिया जा रहा है.

सप्ताह में चार दिन लगाते हैं कैंप

बृजेश कुमार सेन पेशे से हेयर स्टाइलिस्ट हैं और उनका अपना हेयर सैलून है. उन्होंने बताया कि 11 जुलाई 2024 से इस अभियान की शुरुआत की गई थी. इसके बाद से वह अपनी टीम के साथ सप्ताह में चार दिन सरकारी स्कूलों और आश्रमों में जाकर बच्चों की कटिंग करते हैं. एक दिन में करीब 300 से 350 बच्चों की हेयर कटिंग की जाती है. अब तक 116 स्कूलों और आश्रमों में 15 हजार 500 से अधिक बच्चों की कटिंग की जा चुकी है. बृजेश का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ बच्चों के बाल काटना नहीं है, बल्कि उनमें स्वच्छता और समानता की भावना पैदा करना भी है.

छात्राओं के लिए पत्नी ने संभाली कमान

अभियान की शुरुआत सिर्फ छात्राओं के लिए नहीं, बल्कि लड़कों की हेयर कटिंग से हुई थी. बाद में जब छात्राओं ने भी नि:शुल्क हेयर कटिंग की जरूरत बताई, तो बृजेश की पत्नी ममता सेन इस मुहिम से जुड़ गईं. ममता खुद ब्यूटी पार्लर चलाती हैं और अब वह भी स्कूलों में जाकर छात्राओं की मुफ्त हेयर कटिंग करती हैं. ममता का कहना है कि बच्चों के चेहरे पर कटिंग के बाद आने वाली खुशी ही उनके लिए सबसे बड़ा इनाम है. इससे उन्हें इस सेवा को लगातार जारी रखने की प्रेरणा मिलती है.

छह लोगों की टीम भी अभियान में शामिल

बृजेश और ममता अपने व्यवसाय के साथ समाजसेवा के इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं. उनके सैलून में काम करने वाले छह लोग भी इस टीम का हिस्सा हैं. पूरी टीम स्कूलों और आश्रमों में पहुंचकर बच्चों की हेयर कटिंग करती है. कोटा के इस दंपती की पहल समाजसेवा की एक अलग तस्वीर पेश करती है. बृजेश और ममता ने दिखाया है कि किसी की मदद करने के लिए सिर्फ आर्थिक सहयोग ही जरूरी नहीं है. व्यक्ति अपने हुनर और समय का इस्तेमाल भी समाज के जरूरतमंद वर्ग के लिए कर सकता है. बच्चों के बीच स्वच्छता, आत्मविश्वास और समानता की भावना बढ़ाने वाली यह मुहिम अब कोटा के कई सरकारी स्कूलों तक पहुंच चुकी है. दोनों का लक्ष्य इस सेवा को आगे भी लगातार जारी रखना है.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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August 22, 2026, 09:57 IST

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