Kota New Medical College Hospital | प्रसूताओं की मौत पर भड़का जनआक्रोश

Last Updated:October 19, 2026, 13:59 IST
Kota New Medical College Hospital News: कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत और अन्य महिलाओं की तबीयत बिगड़ने से लोगों में भारी आक्रोश है. लोकल 18 की ग्राउंड रिपोर्ट में स्थानीय लोगों और पूर्व पार्षद ओम गुंजल ने वरिष्ठ डॉक्टरों की गैर-मौजूदगी, जूनियर डॉक्टरों द्वारा फोन पर इलाज, विभागों में समन्वय की कमी और सरकारी दवाओं की खराब गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं. आमजन ने हेल्प डेस्क सुधारने और दवाओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.
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कोटा: राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी (Cesarean Delivery) के बाद दो प्रसूताओं की अचानक हुई मौत और कई अन्य महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है. इस दुखद घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है. स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलती इस घटना के बाद लोकल 18 की ग्राउंड रिपोर्ट में आमजन ने अस्पताल प्रशासन, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और सरकारी दवाओं की गुणवत्ता को लेकर अपनी गंभीर चिंता और नाराजगी व्यक्त की है.
पूर्व पार्षद ओम गुंजल ने अस्पताल प्रशासन और राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि अस्पताल में पिछले कई महीनों से लापरवाही की ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में वरिष्ठ डॉक्टरों और विभागाध्यक्षों (HODs) की नियमित रूप से मौजूदगी नहीं रहती है. इसके चलते जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को वरिष्ठ डॉक्टरों से फोन पर सलाह लेकर गंभीर मरीजों का इलाज करना पड़ता है. उन्होंने गायनिक और नेफ्रोलॉजी विभागों के बीच बेहतर सामंजस्य की जरूरत जताते हुए सरकारी सप्लाई में आने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की.
विशेषज्ञों की अनुपस्थिति और दवाओं की क्वालिटी जांच की मांगस्थानीय निवासी डॉ. दीपांशु श्रृंगी ने बताया कि अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर काम का अत्यधिक दबाव रहता है, जिससे गंभीर मरीजों की देखभाल प्रभावित होती है. उन्होंने मांग की कि आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर में वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉक्टरों की 24 घंटे मौजूदगी सुनिश्चित की जानी चाहिए. साथ ही अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन और दवाओं की गुणवत्ता की नियमित लैब जांच कराई जानी चाहिए ताकि मरीजों की जान से खिलवाड़ न हो.
डॉक्टरों के बीच तालमेल की कमी और दवाओं पर संदेहस्थानीय निवासी अतुल शर्मा ने डॉक्टरों के बीच आपसी तालमेल की कमी पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि कोटा संभाग और आसपास के दूर-दराज इलाकों से लोग बेहतर इलाज की आस लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल आते हैं, लेकिन वरिष्ठ और जूनियर डॉक्टरों के बीच उचित समन्वय न होने का खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ता है. उन्होंने मांग की कि सरकारी अस्पतालों में दी जाने वाली निशुल्क दवाओं की क्वालिटी की नियमित मॉनिटरिंग और जांच होनी चाहिए.
हेल्प डेस्क और इमरजेंसी सेवाओं में सुधार की जरूरतवहीं स्थानीय नागरिक हरिओम मीणा ने अस्पताल में हेल्प डेस्क और मार्गदर्शन व्यवस्था को बदहाल बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि दूर-दराज से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को सही वार्ड और डॉक्टर तक पहुंचने में ही काफी समय बर्बाद हो जाता है. समय पर सहायता न मिलने के कारण गंभीर मरीजों की स्थिति बिगड़ जाती है. स्थानीय निवासियों ने अस्पताल में हेल्पलाइन व्यवस्था दुरुस्त करने, डॉक्टरों की उपस्थिति अनिवार्य करने और मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की मांग की है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Kota,Kota,Rajasthan
First Published :
October 19, 2026, 13:59 IST



