Rajasthan

बारिश में खुले आसमान के नीचे अंतिम विदाई! केकड़ी के गणेशपुरा में टीन शेड तक नहीं, 3 घंटे भीगते रहे ग्रामीण

Last Updated:July 08, 2026, 11:25 IST

Ajmer Hindi News: अजमेर जिले के केकड़ी क्षेत्र स्थित सावर पंचायत समिति की ग्राम पंचायत घटियाली के गणेशपुरा गांव में एक दर्दनाक और संवेदनशील तस्वीर सामने आई. 70 वर्षीय नर्मदा देवी के निधन के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचे, लेकिन वहां बारिश से बचाव के लिए टीन शेड जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी. लगातार बारिश के कारण चिता जलाने में परेशानी हुई और मजबूरी में टायरों का सहारा लेना पड़ा. परिजन और ग्रामीण करीब तीन घंटे तक खुले आसमान के नीचे भीगते हुए अंतिम संस्कार की रस्में निभाते रहे. इस घटना ने ग्राम पंचायत के विकास दावों और श्मशान घाटों की बदहाल स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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बारिश में आसमान के नीचे अंतिम विदाई! केकड़ी के गणेशपुरा में टीन शेड तक नहींZoomबारिश में खुले आसमान के नीचे अंतिम विदाई!

अजमेर: केकड़ी में बारिश की बूंदों के बीच अपनों को अंतिम विदाई देना किसी भी परिवार के लिए सबसे पीड़ादायक पल होता है. लेकिन जब अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी व्यवस्था भी न मिले, तो यह केवल एक परिवार का दर्द नहीं बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता की तस्वीर बन जाता है. ऐसा ही मार्मिक दृश्य मंगलवार को सावर पंचायत समिति की ग्राम पंचायत घटियाली के गणेशपुरा गांव में देखने को मिला, जहां तेज बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे एक बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार करना पड़ा. गणेशपुरा निवासी रामप्रसाद गुर्जर की माता नर्मदा देवी (70 वर्ष) का मंगलवार सुबह आकस्मिक निधन हो गया। अंतिम संस्कार के लिए परिजन जब श्मशान घाट पहुंचे तो वहां बारिश से बचाव के लिए टीन शेड तक उपलब्ध नहीं था.

लगातार हो रही बारिश के कारण चिता को जलाने में भी परेशानी आई, जिसके चलते मजबूरी में टायरों का सहारा लेना पड़ा. परिजन और ग्रामीण भीगते हुए धार्मिक रीति-रिवाज निभाते रहे, जबकि अंतिम संस्कार में शामिल लोगों को करीब तीन घंटे तक खुले आसमान के नीचे रहना पड़ा. यह घटना ग्राम पंचायत घटियाली के विकास कार्यों के दावों पर सवाल खड़े कर रही है. पंचायत के अधीन आने वाले गणेशपुरा, नाड़ी और रात्या गांवों के श्मशान घाट आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से टीन शेड, पक्का रास्ता और अन्य सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया. ग्रामीणों ने बताया कि श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते भी कच्चे और जर्जर हैं.

बरसात के मौसम में शवयात्रा निकालना भी कठिनबरसात के मौसम में शवयात्रा निकालना भी कठिन हो जाता है. वहीं श्मशान घाट पर पेयजल, बैठने की व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी अभाव है. ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन अंतिम संस्कार जैसी सबसे जरूरी व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं कराई गई. उनका कहना है कि किसी भी परिवार को अपने परिजन की अंतिम विदाई के समय ऐसी पीड़ा नहीं झेलनी चाहिए.

अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर न होना पड़ेग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पंचायत समिति से मांग की है कि गणेशपुरा, नाड़ी और रात्या के श्मशान घाटों पर तत्काल टीन शेड का निर्माण कराया जाए, श्मशान घाट तक पक्के रास्ते बनाए जाएं तथा पेयजल, बैठने की व्यवस्था सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को बारिश और विपरीत परिस्थितियों में खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर न होना पड़े.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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Ajmer,Rajasthan

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