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SKRAU की नई खोज! चने की यह वैरायटी देगी बेहतर पैदावार, देर से बुवाई करने पर भी मिलेगी बंपर उपज

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SKRAU की नई खोज! देर से बुवाई करने पर भी चने की यह वैरायटी देगी बंपर उपज

Last Updated:April 20, 2026, 12:13 IST

Gram New Variety Keshav Speciality: बीकानेर में स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने चने की नई किस्म “केशव” (GNG 2261) विकसित की है, जो देर से बुवाई के बावजूद अच्छा उत्पादन देती है. यह किस्म 25 नवंबर तक बोई जा सकती है, जिससे किसानों को समय की कमी में भी राहत मिलती है. प्रति बीघा 3.5 से 4 क्विंटल तक उत्पादन की क्षमता, बेहतर दाल गुणवत्ता और बाजार में अच्छे दाम इसकी खासियत हैं. साथ ही इसमें अधिक शाखाएं और 3-4 दानों वाली फलियां उत्पादन बढ़ाती हैं, जिससे किसानों की आय में इजाफा हो सकता है.

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बीकानेर. खरीफ फसल की कटाई में देरी होने के कारण अक्सर रबी सीजन की बुवाई प्रभावित हो जाती है, जिससे किसानों को उत्पादन में नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में किसानों की इस बड़ी समस्या का समाधान सामने आया है. स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने चने की एक उन्नत किस्म “केशव” विकसित की है, जो देर से बुवाई के बावजूद बेहतर उत्पादन देने में सक्षम है. “केशव” चना किस्म बीकानेर सहित प्रदेश के किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है, जो उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन और आय का अवसर प्रदान करती है.

कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर के अधिष्ठाता डॉ. विजय प्रकाश के अनुसार, इस किस्म का वैज्ञानिक नाम जीएनजी 2261 है. इसे विश्वविद्यालय के नाम से प्रेरित होकर “केशव” नाम दिया गया है. यह किस्म पहले से प्रचलित जीएनजी 1581 के समान दिखती है, लेकिन उत्पादन क्षमता और अनुकूलन के मामले में इसे अधिक प्रभावी पाया गया है. आमतौर पर चने की बुवाई अक्टूबर माह तक पूरी कर ली जाती है, लेकिन कई बार खरीफ फसलों की कटाई में देरी के कारण किसान समय पर बुवाई नहीं कर पाते. ऐसी स्थिति में “केशव” किस्म किसानों के लिए राहत लेकर आई है. इसकी बुवाई 25 नवंबर तक भी की जा सकती है, और इसके बावजूद फसल से अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.

प्रति बीघा चार क्विंटल तक उत्पादन ले सकते हैं किसान

उत्पादन की दृष्टि से भी यह किस्म काफी लाभकारी है. वैज्ञानिकों के अनुसार, किसान इससे प्रति बीघा लगभग साढ़े तीन से चार क्विंटल तक उत्पादन ले सकते हैं. इसके दाने पीले, आकर्षक और मध्यम आकार के होते हैं, जिन्हें बाजार में अच्छी कीमत मिलने की संभावना रहती है. साथ ही, इससे बनने वाली दाल की गुणवत्ता भी उच्च स्तर की मानी जाती है, जिससे उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. इस किस्म की एक और महत्वपूर्ण विशेषता इसकी पौध संरचना है. “केशव” चना किस्म में सामान्य किस्मों की तुलना में अधिक शाखाएं निकलती हैं, जिससे पौधे पर फलियों की संख्या बढ़ जाती है.  प्रत्येक फली में 3 से 4 दाने होते हैं, जो कुल उत्पादन को बढ़ाने में सहायक होते हैं. यही कारण है कि यह किस्म उत्पादन की दृष्टि से किसानों के लिए अधिक लाभदायक मानी जा रही है.

151 दिनों में पककर तैयार हो जाती है यह वैरायटी

इसके अलावा, यह किस्म लगभग 151 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, जो इसे समय प्रबंधन की दृष्टि से भी उपयुक्त बनाती है. इसमें विभिन्न रोगों के प्रति अच्छी प्रतिरोधक क्षमता पाई जाती है, जिससे फसल के खराब होने की संभावना कम हो जाती है. इससे किसानों को न केवल बेहतर उत्पादन मिलता है, बल्कि उनकी लागत भी कम होती है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम और खेती के पैटर्न को देखते हुए इस तरह की किस्में किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगी. “केशव” चना किस्म खासतौर पर उन किसानों के लिए वरदान बन सकती है, जो किसी कारणवश समय पर बुवाई नहीं कर पाते, लेकिन फिर भी अच्छी पैदावार की उम्मीद रखते हैं.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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Location :

Bikaner,Rajasthan

First Published :

April 20, 2026, 12:13 IST

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