Rajasthan

रस्सी पर चलती नटनी और अचानक हुआ खौफनाक खेल… जालोर की पहाड़ियों में दफ्न है राज

Last Updated:May 13, 2026, 17:59 IST

Jalore Famous Story: जालोर की पहाड़ियों पर बनी पुरानी छतरी नट समाज की नटनी की लोककथा से जुड़ी, राजा की शर्त, रस्सी काटने से नटनी की मौत, नट समाज ने जालोर छोड़ने की कसम खाई. बताया जाता है कि नटनी आधे से ज्यादा रास्ता पार कर चुकी थी और जीत अब उससे कुछ ही कदम दूर थी. तभी कहानी ने दर्दनाक मोड़ ले लिया. राजा को अपना वचन याद आया और सत्ता खोने का डर मन में बैठ गया.

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जालौर. जालोर की पहाड़ियों पर खड़ी यह पुरानी छतरी सिर्फ एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि एक ऐसी लोककथा की गवाह मानी जाती है, जिसे आज भी यहां के लोग भावुक होकर सुनाते हैं. यह कहानी करीब चार सौ साल पुरानी बताई जाती है, जिसमें साहस, वचन और विश्वासघात तीनों का अनोखा मेल देखने को मिलता है.

कहा जाता है कि उस दौर में जालोर के राजा और नट समाज के बीच एक अनोखी शर्त लगी थी. राजा ने चुनौती दी थी कि अगर नट समाज की एक नटनी स्वर्णगिरी की टेकरी से कालकाजी पहाड़ी तक करीब 500 मीटर लंबी रस्सी पर चलकर दिखा दे, तो उसे आधा राज्य दे दिया जाएगा. यह शर्त जितनी आकर्षक थी, उतनी ही खतरनाक भी मानी जा रही थी.

रस्सी पर बढ़ते कदम और थमती सांसेंलोककथाओं के अनुसार नटनी ने बिना डरे इस चुनौती को स्वीकार कर लिया. ऊंची पहाड़ियों के बीच बंधी पतली रस्सी पर उसने कदम रखा और धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी. नीचे गहरी खाई थी और ऊपर खुला आसमान, लेकिन उसके हौसले कमजोर नहीं पड़े. जैसे-जैसे वह आगे बढ़ती गई, लोगों की सांसें भी थमती चली गईं.

बताया जाता है कि नटनी आधे से ज्यादा रास्ता पार कर चुकी थी और जीत अब उससे कुछ ही कदम दूर थी. तभी कहानी ने दर्दनाक मोड़ ले लिया. राजा को अपना वचन याद आया और सत्ता खोने का डर मन में बैठ गया. कहा जाता है कि राजा के इशारे पर रस्सी काट दी गई, जिससे नटनी गहरी खाई में गिर गई और उसकी मौत हो गई. उसकी जिंदगी खत्म हो गई, लेकिन उसकी कहानी हमेशा के लिए अमर हो गई.

सभी को जाननी चाहिए ये लोककथाइस घटना के बाद नट समाज काफी आहत हुआ. कहा जाता है कि उन्होंने जालोर को हमेशा के लिए छोड़ने का फैसला कर लिया. लोगों के मुताबिक नट समाज ने कसम खाई थी कि वे अब कभी जालोर का पानी तक नहीं पीएंगे. आज भी कई लोग इस परंपरा को अपने स्वाभिमान से जोड़कर देखते हैं.

स्थानीय दादी कमला देवी ने लोकल18 को बताया कि राजा ने जालोर की तीन पहाड़ियों के बीच लंबा सूत बांधकर उस पर चलने की शर्त रखी थी. राजा ने वादा किया था कि जो यह चुनौती पूरी करेगा, उसे आधा राज्य दिया जाएगा. नट समाज की एक साहसी नटनी ने यह चुनौती स्वीकार की और रस्सी पर चलना शुरू कर दिया.

उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे नटनी अपने लक्ष्य के करीब पहुंच रही थी, राजा को अपना वचन निभाने का डर सताने लगा. तभी धोखे से रस्सी कटवा दी गई और नटनी नीचे गिर गई. उसकी मौत के बाद उसकी याद में वहां यह छतरी बनाई गई. कहा जाता है कि आज भी नट समाज के लोग अगर जालोर आते हैं तो शहर के बाहर ही रुकते हैं और इस घटना को अपने इतिहास का दर्द मानते हैं.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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Jalor,Jalor,Rajasthan

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