Mehndi Cultivation: कड़ाके की ठंड में भी हरी-भरी रहेगी मेहंदी की फसल, बस इन बातों का रखें ध्यान

पाली. राजस्थान के मारवाड़ सहित देश के अन्य मेहंदी उत्पादक क्षेत्रों में सर्दियों की आहट के साथ ही फसलों की देखभाल को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं. आमतौर पर मेहंदी गर्म और शुष्क जलवायु का पौधा है, ऐसे में सर्दियों के दिनों में विशेषकर पाला पड़ने पर इसकी वृद्धि रुक सकती है और छोटे पौधों को नुकसान पहुंच सकता है. लेकिन सही कृषि प्रबंधन अपनाकर सर्दियों में भी मेहंदी की फसल को सुरक्षित और स्वस्थ रखा जा सकता है.
आज हम आपको बताएंगे कि कैसे ठंड के इन दिनों में हल्की सिंचाई, कतारों की निराई-गुड़ाई और उचित खाद प्रबंधन के जरिए आप अपनी फसल को बचा सकते हैं. राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में अपनी विशेष खुशबू, रंग और गुणवत्ता के लिए दुनियाभर में मशहूर ‘सोजत की मेहंदी’ को सर्दियों के मौसम में पाले और कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सही समय पर कृषि प्रबंधन अपनाकर किसान भाई अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं.
इसलिए विदेशों तक प्रसिद्ध है सोजत की मेहंदी
पाली जिले के सोजत क्षेत्र की मेहंदी अपनी अनूठी खूबियों के कारण ग्लोबल स्तर पर पहचान रखती है. यहां की मिट्टी की प्राकृतिक बनावट और जलवायु में पाया जाने वाला ‘लॉसनिन’ तत्व इस मेहंदी को गहरा और लंबे समय तक टिकने वाला लाल रंग प्रदान करता है. यही वजह है कि देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सोजत की मेहंदी की भारी मांग रहती है और इसे GI Tag का दर्जा भी प्राप्त है.
फरवरी से मार्च तक बुआई का रहता है सही समय
मेहंदी की खेती के लिए गर्म और शुष्क जलवायु सबसे अनुकूल मानी जाती है. इसकी बुआई के लिए सबसे सही समय फरवरी से मार्च का महीना होता है, जब तापमान पौधे के अंकुरण के लिए उपयुक्त होता है. इसके पौधों को तैयार करने के लिए खेत की अच्छी तरह जुताई करके पाटा लगाया जाता है, और फिर प्रमाणित बीजों या कटिंग के जरिए कतारों में इसकी बुआई की जाती है, ताकि पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिल सके.
सर्दियों में इस तरह की आती है परेशानी
मेहंदी मूल रूप से गर्म इलाकों का पौधा है, इसलिए सर्दियों के दिनों में विशेषकर जब तापमान में भारी गिरावट आती है और पाला पड़ता है तब इसकी फसल को काफी नुकसान पहुंचता है. अत्यधिक ठंड के कारण छोटे पौधों की वृद्धि रुक जाती है, पत्तियों का विकास प्रभावित होता है और कई बार पाला पड़ने से पौधे सूखने भी लगते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में किसानो को खास बाते जरूर ध्यान रखनी चाहिए.
पाले और ठंड से बचाव के जरूरी कृषि टिप्स
हल्की सिंचाई: ठंड के दिनों में खेत में नमी बनाए रखने के लिए समय पर हल्की सिंचाई करें. पानी देने से मिट्टी का तापमान बना रहता है और पाले का असर कम होता है.
निराई-गुड़ाई: कतारों के बीच नियमित रूप से निराई-गुड़ाई करने से मिट्टी में हवा का संचार बेहतर होता है और खरपतवार नष्ट होते हैं.
उचित खाद प्रबंधन: सर्दियों में पौधों को अंदरूनी मजबूती देने के लिए फॉस्फोरस और पोटाश युक्त उर्वरकों के साथ-साथ जैविक खाद का उपयोग करें, जो पौधे को ठंड से लड़ने की शक्ति देती है.
धुंआ करना: अत्यधिक पाले की संभावना होने पर खेत की मेड़ों पर सूखी पत्तियां या कचरा जलाकर धुआं करने से तापमान में सुधार होता है और फसल सुरक्षित रहती है.



