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Dharohar : उदयपुर की रानियों का गार्डन, 350 साल पुरानी ‘सहेलियों की बाड़ी’ आज भी सैलानियों की पहली पसंद!

Last Updated:November 11, 2025, 16:29 IST

Dharohar : झीलों की नगरी उदयपुर में स्थित ‘सहेलियों की बाड़ी’ सिर्फ एक बाग नहीं, बल्कि इतिहास, शाही ठाट और प्रकृति का संगम है. कभी रानियों का विश्राम स्थल रही यह बाड़ी आज भी अपने फव्वारों, संगमरमर की मूर्तियों और हरियाली से सैलानियों को मंत्रमुग्ध करती है. यहां की खूबसूरती हर मौसम में दिल जीत लेती है.

उदयपुर : झीलों की नगरी उदयपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. इन्हीं में से एक खास जगह है – ‘सहेलियों की बाड़ी’, जिसे मेवाड़ के महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय ने अपनी रानी और उनकी सहेलियों के मनोरंजन व विश्राम के लिए बनवाया था. यह बाड़ी आज भी उदयपुर की शाही संस्कृति और स्थापत्य कला का जीवंत प्रतीक बनी हुई है.

करीब 350 वर्ष पुरानी यह ऐतिहासिक बाड़ी आज भी अपने मनमोहक फव्वारों, संगमरमर की मूर्तियों और हरे-भरे बागानों से सैलानियों को आकर्षित करती है. यहां बने जलकुंड और कमल तालाब इसकी सुंदरता को चार चांद लगाते हैं. खास बात यह है कि इस बाड़ी के फव्वारे आज भी चालू हैं, जिनकी ठंडी फुहारें हर आने वाले पर्यटक को सुकून का अहसास कराती हैं.

रानियों का विश्राम स्थल ‘सहेलियों की बाड़ी’‘सहेलियों की बाड़ी’ को कभी रानियों और उनकी सहेलियों के विश्राम स्थल के रूप में जाना जाता था. यहां उन्हें शहर की भीड़-भाड़ से दूर शांति और प्रकृति के बीच समय बिताने की सुविधा मिलती थी. संगमरमर पर की गई बारीक नक्काशियां और हाथी, कमल जैसी आकृतियां मेवाड़ी कला की उत्कृष्टता को दर्शाती हैं. आज यह बाड़ी देशी और विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद बन चुकी है. रोजाना सैकड़ों की संख्या में सैलानी यहां पहुंचकर इसके फव्वारों, मूर्तियों और हरियाली के बीच फोटो खिंचवाते नजर आते हैं. कई विदेशी सैलानी इसे “Garden of Maidens” के नाम से जानते हैं और उदयपुर यात्रा का अहम हिस्सा मानते हैं.

उदयपुर की शान, सैलानियों की पहली पसंदउदयपुर पर्यटन विभाग के अनुसार, ‘सहेलियों की बाड़ी’ को शहर की प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संरक्षित किया गया है. यहां हर मौसम में सैलानियों की भीड़ बनी रहती है, खासतौर पर सर्दियों के दौरान यह जगह घूमने के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. स्थानीय लोगों के अनुसार, शाम के समय जब सूरज की किरणें फव्वारों की बौछारों पर गिरती हैं, तो बाड़ी का नजारा किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता. यही कारण हैं कि यह स्थान सिर्फ इतिहास प्रेमियों के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी खास आकर्षण बना हुआ है.

Rupesh Kumar Jaiswal

रुपेश कुमार जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस और इंग्लिश में बीए किया है. टीवी और रेडियो जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं. फिलहाल नेटवर्क18 से जुड़े हैं. खाली समय में उन…और पढ़ें

रुपेश कुमार जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस और इंग्लिश में बीए किया है. टीवी और रेडियो जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं. फिलहाल नेटवर्क18 से जुड़े हैं. खाली समय में उन… और पढ़ें

Location :

Udaipur,Rajasthan

First Published :

November 11, 2025, 16:27 IST

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उदयपुर की रानियों का गार्डन, 350 साल पुरानी ‘सहेलियों की बाड़ी’ आज भी मशहूर!

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