Rajasthan

कचरे में डूबा जयपुर! सफाई कर्मचारियों की ‘झाड़ू डाउन’ हड़ताल, नगर निगम की बढ़ी मुश्किलें

Last Updated:June 28, 2026, 13:20 IST

Jaipur Sanitation Workers Broom-Down Strike: राजधानी जयपुर में सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन ‘झाड़ू डाउन’ हड़ताल का असर पूरे शहर में दिखाई देने लगा है. संयुक्त वाल्मीकि एवं सफाई श्रमिक संघ के आह्वान पर कर्मचारी कार्य बहिष्कार पर हैं, जिससे डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और सफाई व्यवस्था ठप हो गई है. बड़ी चौपड़, छोटी चौपड़ और कई रिहायशी इलाकों में कचरे के ढेर लग गए हैं. कर्मचारी अपनी 6 सूत्री मांगों पर अड़े हैं, जिनमें वाल्मीकि समाज को भर्ती में प्राथमिकता और आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म करने की मांग शामिल है. नगर निगम वैकल्पिक व्यवस्था से हालात संभालने की कोशिश कर रहा है.

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 कचरे में डूबा जयपुर! सफाई कर्मचारियों की 'झाड़ू डाउन' हड़ताल, बढ़ी मुश्किलेंZoom राजधानी जयपुर में सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन ‘झाड़ू डाउन’ हड़ताल से चरमराई व्यवस्था

जयपुर. राजधानी जयपुर में सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन ‘झाड़ू डाउन’ हड़ताल का असर अब पूरे शहर में साफ दिखाई देने लगा है. संयुक्त वाल्मीकि एवं सफाई श्रमिक संघ के आह्वान पर जयपुर सहित पूरे राजस्थान में सफाई कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है. हड़ताल के चलते नगर निगम की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. शहर के प्रमुख बाजारों, चौराहों और रिहायशी इलाकों में कचरे के बड़े-बड़े ढेर लग गए हैं.

वहीं डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण भी पूरी तरह ठप हो गया है. इससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हड़ताल का सबसे अधिक असर बड़ी चौपड़, छोटी चौपड़, परकोटा क्षेत्र, प्रमुख बाजारों और कई आवासीय कॉलोनियों में देखने को मिल रहा है. नियमित सफाई नहीं होने और कचरा वाहन नहीं पहुंचने से जगह-जगह गंदगी फैल गई है. कई इलाकों में लोगों ने विरोध स्वरूप सड़कों पर कचरा डाल दिया, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं.

6 सूत्री मांगों पर अड़े हैं सफाई कर्मचारी

संयुक्त वाल्मीकि एवं सफाई श्रमिक संघ का कहना है कि जब तक उनकी 6 सूत्री मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि सफाई कर्मचारियों की भर्ती में वाल्मीकि समाज को प्राथमिकता दी जाए. इसके अलावा संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर नियमित भर्ती की जाए. पुरानी भर्ती से जुड़े लंबित मामलों का समाधान किया जाए और वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों के अनुभव को भी मान्यता दी जाए. कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से इन मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन के समक्ष आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है.

नगर निगम वैकल्पिक व्यवस्था में जुटा

हड़ताल के बीच नगर निगम प्रशासन वैकल्पिक संसाधनों के जरिए सफाई व्यवस्था संभालने का प्रयास कर रहा है. हालांकि, कर्मचारियों की बड़ी संख्या के हड़ताल पर होने के कारण व्यवस्था सामान्य नहीं हो पा रही है. निगम अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक स्थानों पर सीमित संसाधनों से सफाई कराने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन पूरी व्यवस्था बहाल करने में समय लग सकता है.

प्रतिदिन निकलता है 1500 से 2000 टन कचरा

जयपुर नगर निगम क्षेत्र से सामान्य दिनों में प्रतिदिन औसतन 1150 से 1700 मीट्रिक टन कचरा उठाया जाता है, जबकि शहर से कुल 1500 से 2000 टन तक कचरा प्रतिदिन निकलता है. त्योहारों, विशेष आयोजनों और स्वच्छता अभियानों के दौरान यह मात्रा बढ़कर 6000 मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंच जाती है. ऐसे में हड़ताल के चलते कचरा निस्तारण व्यवस्था प्रभावित होने से शहर में गंदगी बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो राजधानी में सफाई व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है.About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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Jaipur,Rajasthan

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