मुकुल जोनवाल सिरोही सीबीएसई टॉपर | Mukul Jonwal CBSE 12th Result Success Story

Last Updated:May 15, 2026, 06:19 IST
Mukul Jonwal CBSE 12th Result Success Story: सिरोही जिले के आबूरोड निवासी मुकुल जोनवाल ने सीबीएसई 12वीं में 96.20% अंक प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है. एक साधारण दुकानदार के बेटे मुकुल ने जेईई मेंस में भी 97.80 परसेंटाइल हासिल किए हैं. मुकुल प्रतिदिन 10-12 घंटे पढ़ाई करते थे और उन्होंने सफलता के लिए सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी. मुकुल अब एक सफल आईआईटीयन बनना चाहते हैं. उनकी इस कामयाबी ने साबित कर दिया है कि लगन और सही प्लानिंग से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.
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Mukul Jonwal Success Story: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा घोषित 12वीं के परीक्षा परिणामों ने सिरोही जिले को गौरवान्वित किया है. जिले के आबूरोड स्थित गांधीनगर निवासी मुकुल जोनवाल ने 96.20 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले मुकुल की इस उपलब्धि से न केवल उनके माता-पिता, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोग और शिक्षा जगत में खुशी की लहर है. उनकी यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि हाल ही में जारी हुए जेईई मेंस (JEE Mains) के परिणामों में भी मुकुल ने 97.80 परसेंटाइल के साथ अपनी श्रेणी में 1065वीं रैंक हासिल कर अपनी योग्यता साबित की थी.
मुकुल की पृष्ठभूमि बेहद साधारण है. उनके पिता चंद्रप्रकाश जोनवाल आबूरोड में एक छोटी सी जनरल स्टोर (किराना दुकान) चलाते हैं और माता मोनिका जोनवाल एक गृहिणी हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद मुकुल के बड़े सपनों में परिवार का अटूट सहयोग रहा. सेंट पॉल सीनियर सेकंडरी स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने वाले मुकुल ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उनका अगला और मुख्य लक्ष्य देश के प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थान में प्रवेश लेकर एक सफल आईआईटीयन बनना है. मुकुल की शुरुआती पढ़ाई भी शानदार रही है, उन्होंने कक्षा 10वीं में भी 94.20 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे.
सफलता का मंत्र: सोशल मीडिया से तौबा और सटीक प्लानिंगअपनी तैयारी के बारे में विस्तार से बताते हुए मुकुल ने साझा किया कि वे प्रतिदिन औसतन 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे. उनकी सफलता के पीछे कोई जादू नहीं बल्कि एक फिक्स शेड्यूल और कड़ी मेहनत थी.
सब्जेक्ट वाइज प्लानिंग: मुकुल ने हर विषय के लिए समय निर्धारित किया था. उनका मानना है कि किस विषय को कितना वक्त देना है, यह तय होना बहुत जरूरी है.
सोशल मीडिया से दूरी: मुकुल ने आज के दौर के सबसे बड़े भटकाव यानी इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से पूरी तरह दूरी बनाए रखी.
सिर्फ ऑनलाइन कोचिंग: उनके पिता ने बताया कि मुकुल ने घर पर रहकर केवल ऑनलाइन कोचिंग के जरिए अपनी तैयारी की और अपनी लगन से जेईई और बोर्ड दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया.
आने वाली पीढ़ी के लिए संदेशमुकुल ने नए छात्रों को सलाह देते हुए कहा कि पढ़ाई में ‘कंसीस्टेंसी’ (निरंतरता) सबसे महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि यदि छात्र अपना लक्ष्य तय कर लें और बिना ध्यान भटकाए उस पर फोकस करें, तो सफलता निश्चित है. उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ कहीं भी कोई शंका या डाउट हो, तो अपने गुरुजनों से मदद लेने में कभी भी हिचकिचाना नहीं चाहिए. मुकुल अपनी इस बड़ी जीत का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के प्रोत्साहन और शिक्षकों के मार्गदर्शन को देते हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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