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‘मेरी बहन दर्द से चीखती रही और वो रास्ता साफ करते रहे…’ जयपुर VIP मूवमेंट हादसे की पूरी आपबीती, खुशबू की जुबानी

Last Updated:June 27, 2026, 10:46 IST

Jaipur Police Brutality: जयपुर के जगतपुरा में पुलिस की संवेदनहीनता के कारण एक बड़ा हादसा हो गया. पीड़िता की बड़ी बहन खुशबू गुप्ता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान पुलिस ने बिना चेतावनी मोमोज के ठेले को जबरन धक्का दे दिया. इस वजह से ठेले पर रखा खौलता हुआ पानी उसकी छोटी बहन रेशु पर गिर गया, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गई. यह परिवार 2020 में पिता की मौत के बाद इसी ठेले की कमाई से अपना गुजारा चला रहा था.

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'मेरी आंखों के सामने बहन खौलते पानी में झुलस गई' खुशबू ने सुनाई पूरी कहानीZoom‘मेरी बहन चीखती रही…’ जयपुर हादसे पर खुशबू की दर्दनाक आपबीती ( AI Image )

Jaipur News: उस शाम को याद करके आज भी मेरी रूह कांप जाती है. रोज की तरह मैं और मेरी छोटी बहन रेशु जगतपुरा महल रोड पर अक्षय पात्र के पास अपने मोमोज के ठेले पर खड़े थे. शाम के करीब पौने सात बजे का वक्त था. बर्तन में मोमोज पकाने के लिए पानी पूरी तरह खौल रहा था. कुछ ग्राहक आ चुके थे और हम काम में व्यस्त थे. हमें अंदाज़ा भी नहीं था कि अगले कुछ मिनटों में हमारी जिंदगी बदलने वाली है.

अचानक पुलिस की गाड़ियां हूटर बजाती हुई आईं. पुलिस वाले चिल्लाने लगे कि तुरंत रास्ता खाली करो, मुख्यमंत्री का काफिला (VIP Movement) आने वाला है. वे हमारे ठेले के पास आए और उसे तुरंत हटाने के लिए चिल्लाने लगे.

मैंने और रेशु ने पुलिसवालों के सामने हाथ जोड़े. हमने गिड़गिड़ाते हुए कहा, “साहब, बर्तन में पानी उबल रहा है, इसे उतारने का थोड़ा सा वक्त दे दो, नहीं तो कोई हादसा हो जाएगा.” लेकिन खाकी के रौब के आगे हमारी गरीब बहनों की आवाज दब गई. उन्होंने हमारी एक बात नहीं सुनी. पुलिस वाले ने बिना चेतावनी दिए पूरी ताकत से हमारे ठेले को पीछे की तरफ धकेल दिया.

मेरी आंखों के सामने खौलते पानी में झुलस गई मेरी छोटी बहनजैसे ही पुलिसवाले ने जोर का धक्का दिया, ठेला डगमगाया और उस पर रखा खौलता हुआ पानी सीधे मेरी छोटी बहन रेशु के ऊपर जाकर पलट गया. रेशु की एक ऐसी चीख निकली जिसे मैं जिंदगी भर नहीं भूल पाऊंगी. वह दर्द से तड़पने लगी. उबलते पानी से उसका हाथ, छाती, पेट और जांघ बुरी तरह झुलस गए. वह तड़प रही थी, लेकिन वीआईपी सुरक्षा में लगी पुलिस के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी. मैंने हिम्मत जुटाकर तुरंत रामनगरिया थाने में इस बर्बरता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई.

पिता को पहले ही खो चुके थे, यह ठेला ही हमारा आखिरी सहारा थासाल 2020 में कोरोना महामारी ने हमारे पिता को हमसे हमेशा के लिए छीन लिया था. पूरा परिवार बिखर गया था. साल 2022 में जब मेरा चयन जयपुर के एक कॉलेज में फिजियोथैरेपी कोर्स के लिए हुआ, तो मां और रेशु भी मेरे साथ जयपुर आ गईं. प्रताप नगर में हमने एक छोटा सा कमरा किराए पर लिया.

जयपुर जैसे शहर में पढ़ाई और रहने का खर्च उठाना हमारे बस में नहीं था. कमाने वाला कोई नहीं था, इसलिए हम दोनों बहनों ने सड़क पर मोमोज का ठेला लगाने का फैसला किया. रोज रात 10 बजे तक ठेला लगाकर जो पैसे मिलते, उसी से हमारा घर चलता और मेरी पढ़ाई होती थी. लेकिन पुलिस की इस बेदर्दी ने हमारी रोजी-रोटी और मेरी बहन की सेहत, दोनों को एक झटके में छीन लिया. अब पुलिस मामले की जांच और सीसीटीवी फुटेज देखने की बात कह रही है, लेकिन मेरी बहन का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कौन करेगा?

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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