Navratri Special: एक पैर पर 3 साल की तपस्या, फिर बना मां काली का भव्य मंदिर; जानें बीकानेर के इस अनोखे धाम की कहानी

बीकानेर. नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का विशेष महत्व है. ऐसे में बीकानेर के सुजानदेसर स्थित काली माता मंदिर में श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर नौ देवियों के दर्शन करने का अवसर मिलता है. यहां मां काली की 11 फीट 3 इंच ऊंची विशाल प्रतिमा विराजमान है. करीब 25 साल पुराने इस मंदिर में सुबह से देर रात तक भक्तों की भीड़ रहती है. नवरात्र के दौरान यहां मेला भरता है और बीकानेर के अलावा दूसरे शहरों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन करने पहुंचते हैं.
सुजानदेसर स्थित काली माता मंदिर में मां की विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है. मंदिर के पुजारी राधेश्याम के अनुसार, मां काली की प्रतिमा की ऊंचाई 11 फीट 3 इंच है. इसे तैयार करने में करीब डेढ़ साल का समय लगा था. पांच धातुओं से बनी इस प्रतिमा के दर्शन करने के लिए बीकानेर के अलावा कोलकाता, मुंबई और राजस्थान के विभिन्न शहरों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं.
एक साथ विराजमान हैं नौ देवियों के रूपइस मंदिर की एक खास विशेषता यहां स्थापित देवी-देवताओं की प्रतिमाएं हैं. मंदिर में सबसे पहले भगवान गणेश की प्रतिमा विराजमान है. इसके बाद नौ देवियों के रूपों की प्रतिमाएं स्थापित हैं. इनमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, महागौरी, सिद्धिदात्री, सती और सरस्वती शामिल हैं. इसके अलावा मंदिर में हनुमानजी, सीताराम, लक्ष्मण, महादेव और राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं भी हैं. परिसर में काला और गौरा भैरव की विशाल प्रतिमाएं भी स्थापित हैं. मंदिर में सुबह और शाम आरती के समय श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है.
एक पैर पर तीन साल की तपस्या से जुड़ी है मंदिर की कहानी
पुजारी राधेश्याम ने बताया कि यह मंदिर करीब 25 साल पुराना है. मान्यता के अनुसार, लगभग 25 साल पहले हरियाणा से आए एक बाबा ने यहां एक पैर पर खड़े होकर तीन साल तक तपस्या की थी. बताया जाता है कि तपस्या के दौरान माता ने अपना स्थान मांगा, जिसके बाद बाबा ने इसी जगह पर मंदिर की स्थापना की. धीरे-धीरे मंदिर का स्वरूप विकसित होता गया और आज यह श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है.
नवरात्र में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़नवरात्र के दौरान काली माता मंदिर में विशेष रौनक रहती है. इन दिनों मंदिर में मेला भी भरता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. भक्त मां के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं. मंदिर परिसर में पेड़-पौधे भी लगाए गए हैं. दर्शन के बाद कई लोग यहां कुछ समय बैठकर सुकून के पल बिताते हैं.
सुबह 4:15 बजे खुलते हैं मंदिर के पटमंदिर के पट सुबह 4:15 बजे खुलते हैं और रात 12 बजे तक श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं. सुबह से शाम और देर रात तक भक्तों का आना-जाना लगा रहता है. विशाल प्रतिमा, देवी के नौ रूपों की स्थापना और तपस्या से जुड़ी मान्यता के चलते सुजानदेसर का यह काली माता मंदिर बीकानेर ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.



