NEET Success Story: सड़क किनारे आलू बेचे, दोस्तों के नोट्स पढ़े; आठवीं कोशिश में अल्ताफ बने डॉक्टर

Last Updated:August 26, 2026, 12:28 IST
Altaf Success Story: बरेली के नवाबगंज निवासी अल्ताफ ने अपनी 8वीं कोशिश में NEET-2026 क्वालिफाई कर 563 अंक हासिल किए हैं. सड़क किनारे आलू बेचने वाले परिवार से आने वाले अल्ताफ ने आर्थिक तंगी के कारण दोस्तों के नोट्स और ऑनलाइन लेक्चर से शुरुआत की थी. बाद में खुद पैसे जुटाकर कोटा में पढ़ाई की. भाई के एक्सीडेंट के बाद डॉक्टर बनने का संकल्प लेने वाले अल्ताफ का संघर्ष हजारों छात्रों के लिए प्रेरणादायक है.
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Kota Success Story: पिता के साथ बेचे आलू, खुद जुटाई कोचिंग फीस, 8वीं कोशिश में NEET क्रैक
Kota News: कोटा की कोचिंग सिर्फ बड़े शहरों और संपन्न परिवारों के बच्चों की कहानी नहीं है. यहां ऐसे भी सपने पूरे होते हैं, जिनके पीछे संघर्ष की लंबी कहानी होती है. उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के नवाबगंज के रहने वाले अल्ताफ की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. परिवार सड़क किनारे आलू बेचकर गुजर-बसर करता है. शुरुआती दौर में जब कोटा जाने के पैसे नहीं थे, तो अल्ताफ ने कोटा से पढ़कर लौटे दोस्तों के नोट्स से पढ़ाई शुरू की. लेकिन जब लगा कि बेहतर गाइडेंस के बिना मंजिल मुश्किल है, तो पिता के साथ आलू बेचकर फीस के पैसे जुटाए और कोटा पहुंचे. आखिरकार उनकी अटूट जिद रंग लाई और उन्होंने अपनी आठवीं कोशिश में NEET-2026 की परीक्षा पास कर ली.
अल्ताफ ने NEET-2026 में 563 अंक हासिल किए हैं. उनकी ऑल इंडिया रैंक 27910 और ओबीसी (OBC) कैटेगरी रैंक 13437 है. इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने लंबा संघर्ष देखा है. साल 2019 में पहली बार NEET देने पर उन्हें 323 अंक मिले थे. इसके बाद ऑनलाइन लेक्चर और दोस्तों के स्टडी मैटेरियल से तैयारी की, जिससे 2022 में अंक बढ़कर 516 हो गए. 2023 और 2024 में 590 अंक तक हासिल किए, लेकिन उच्च कटऑफ के कारण मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिल पाया. साल 2025 में अंक घटकर 501 रह गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी.
भाई के एक्सीडेंट ने बदला जीवन का नजरिया
12वीं के बाद अल्ताफ अपने पिता के साथ आलू की फड़ पर बैठने लगे थे. इसी दौरान बड़े भाई के साथ हुआ एक सड़क हादसा उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बना. उनके बड़े भाई रात करीब 2 बजे बरेली मंडी से आलू लेने जाया करते थे, जहां उनका एक्सीडेंट हो गया. इस दर्दनाक हादसे ने अल्ताफ को अंदर तक झकझोर दिया और उन्होंने हर हाल में डॉक्टर बनने की जिद पकड़ ली.
कच्चे मकान से निकलकर पूरा किया डॉक्टर बनने का सपना
अल्ताफ का परिवार बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आता है. पिता इकबाल हुसैन सिर्फ नौवीं कक्षा तक पढ़े हैं और मां निरक्षर हैं. 8 बहनें और 1 बड़े भाई वाले इस परिवार में 2015 तक 12 सदस्य दो कमरों के मकान में रहते थे. पिता पर सभी बहनों की शादी की जिम्मेदारी भी थी. ऐसी आर्थिक तंगी के बावजूद अल्ताफ ने हार नहीं मानी, मेहनत से फीस के पैसे जोड़े और कोटा पहुंचकर अपनी तैयारी को नई दिशा दी. अल्ताफ की यह सफलता उन हजारों विद्यार्थियों के लिए एक मिसाल है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Kota,Kota,Rajasthan
First Published :
August 26, 2026, 12:28 IST



