न डर, न लालच… सिर्फ जुनून! परबतसर का ‘स्नेक मैन’ अब तक 1000 से ज्यादा सांपों का किया रेस्क्यू, बचा रहा जान

Last Updated:July 07, 2026, 16:59 IST
Parbatsar Snake Man: नागौर जिले के परबतसर का एक युवा अपनी अनोखी सेवा के कारण ‘स्नेक मैन’ के नाम से पहचान बना चुका है. अब तक वह 1000 से अधिक सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें जंगलों में छोड़ चुका है. जहरीले सांपों के रेस्क्यू के दौरान वह अपनी जान जोखिम में डालकर न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण में भी अहम योगदान दे रहा है. जैसे ही किसी गांव, खेत या आबादी वाले क्षेत्र में सांप निकलने की सूचना मिलती है, वह तुरंत मौके पर पहुंचकर बिना नुकसान पहुंचाए सांप को सुरक्षित पकड़ता है और प्राकृतिक आवास में छोड़ देता है. उसकी इस निस्वार्थ सेवा से कई लोगों की जान बच चुकी है और वन्यजीवों का संरक्षण भी हो रहा है.
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Nagaur News: जहां अधिकांश लोग सांप का नाम सुनते ही डर जाते हैं, वहीं नागौर जिले के परबतसर के युवा स्नेक रेस्क्यूअर सतीश बागड़ा हर कॉल को एक जिम्मेदारी मानकर मौके पर पहुंचते हैं. पिछले कई वर्षों से वे अपनी जान जोखिम में डालकर न केवल लोगों की सुरक्षा कर रहे हैं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण की मिसाल भी पेश कर रहे हैं. अब तक वे 1000 से अधिक सांपों का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित रूप से उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ चुके हैं. यह काम आज उन्हें क्षेत्र में अलग पहचान दिला चुका है.
परबतसर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बारिश के मौसम के दौरान अक्सर कोबरा, कॉमन करैत, धामण, रैट स्नेक और पानी वाले सांप रिहायशी क्षेत्रों में निकल आते हैं. ऐसे में अधिकांश लोग डर के कारण सांपों को मारने की कोशिश करते हैं. लेकिन सूचना मिलते ही सतीश बागड़ा बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचते हैं और सांप का सुरक्षित रेस्क्यू करते हैं.
सांप प्रकृति के लिए बेहद खाससतीश बागड़ा बताते हैं कि सांप प्रकृति के लिए बेहद खास जीव हैं. वे खेतों और आसपास के क्षेत्रों में चूहों जैसी फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली प्रजातियों की संख्या नियंत्रित करते हैं, जिससे पर्यावरण का संतुलन बना रहता है. उनका कहना है कि किसी भी सांप को देखकर घबराने या उसे मारने के बजाय प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यूअर को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित और जिम्मेदार कदम है.
परबतसर गौरव सम्मान मिल चुका वे बताते हैं कि विषैले कोबरा और कॉमन करैत जैसे सांपों का रेस्क्यू बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. छोटी सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है, लेकिन वन्यजीवों को बचाने का संकल्प उन्हें हर बार जोखिम उठाने की हिम्मत देता है. यही वजह है कि वे केवल रेस्क्यू तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं. इसी वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए सतीश बागड़ा को ‘परबतसर गौरव’ सम्मान से नवाजा जा चुका है.
पर्यावरण संरक्षण का सच्चा प्रहरीइसके अलावा 26 जनवरी के उपखंड स्तरीय समारोह में भी उन्हें सम्मानित किया गया. सतीश बागड़ा का मानना है कि सांपों को मारना समस्या का समाधान नहीं है. जागरूकता, सावधानी और वैज्ञानिक सोच अपनाकर इंसानों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है. उनका यही संदेश उन्हें सिर्फ एक स्नेक रेस्क्यूअर नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का सच्चा प्रहरी बनाता है.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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Nagaur,Rajasthan



