खेती का नया फॉर्मूला! कम जमीन में बंपर कमाई, भरतपुर के किसानों की मालामाल बना रही यह तकनीक

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कम जमीन में बंपर कमाई, भरतपुर के किसानों की मालामाल बना रही यह तकनीक
Last Updated:June 18, 2026, 08:30 IST
Trellis Farming Technique: मचान विधि भरतपुर के किसानों के लिए खेती का सफल मॉडल बनकर उभर रही है. इस तकनीक में बांस, खंभों और जाली की मदद से ऊंचा ढांचा तैयार किया जाता है, जिस पर बेल वाली सब्जियां उगाई जाती हैं. पर्याप्त धूप और हवा मिलने से फसल में रोग व कीटों का खतरा कम होता है और रासायनिक दवाओं का उपयोग घट जाता है. इससे लागत कम होने के साथ उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ते हैं. तुड़ाई और देखभाल भी आसान हो जाती है. यही वजह है कि किसान इस तकनीक को अपनाकर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं.
भरतपुर क्षेत्र में किसान अब खेती के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ते हुए आधुनिक तकनीकों को अपना रहे हैं. इन्हीं में से एक है मचान विधि जो इन दिनों किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इस विधि के जरिए किसान कम जमीन में अधिक उत्पादन हासिल कर रहे हैं. जिससे उनकी आमदनी में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है. खासकर बेल वाली सब्जियों की खेती में यह तकनीक किसानों के लिए एक नया और सफल मॉडल बनकर सामने आई है.
मचान विधि के तहत किसान लौकी, करेला, खीरा, तोरई, परवल और टमाटर जैसी बेल वाली फसलों की खेती कर रहे हैं. इन फसलों को जमीन पर फैलाने के बजाय ऊपर बनाए गए ढांचे यानी मचान पर चढ़ाया जाता है. इससे फसल जमीन के संपर्क में नहीं आती, जिससे सड़न की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है और सब्जियों की गुणवत्ता बेहतर रहती है. साफ-सुथरी और आकर्षक सब्जियां बाजार में भी अच्छी कीमत दिला रही है.
इस तकनीक का एक बड़ा फायदा यह भी है कि पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है. खुले वातावरण में रहने से फसल पर रोग और कीटों का प्रकोप कम हो जाता है. जिससे रासायनिक दवाओं का उपयोग भी घटता है. इससे लागत में कमी आती है और खेती अधिक लाभकारी बनती है. साथ ही पर्यावरण के लिहाज से भी यह विधि सुरक्षित मानी जा रही है.
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मचान बनाने के लिए किसान बांस या मजबूत खंभों का उपयोग करते हैं. आमतौर पर 6 से 7 फीट ऊंचा ढांचा तैयार किया जाता है. जिस पर तार या प्लास्टिक जाली बांधी जाती है. इसी जाली पर बेलें फैलती है और फल ऊपर की ओर विकसित होते हैं. इस तरह का ढांचा एक बार तैयार करने के बाद लंबे समय तक उपयोग में लाया जा सकता है. जिससे यह निवेश के लिहाज से भी फायदेमंद साबित हो रहा है.
मचान विधि से खेती करने का एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि फसल की देखभाल और तुड़ाई करना काफी आसान हो जाता है. किसान बिना झुके ही आसानी से सब्जियों को तोड़ सकते हैं. जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है. इसके अलावा, फसल साफ-सुथरी रहती है. जिससे बाजार में इसकी मांग भी बढ़ जाती है और बेहतर दाम मिलते हैं.
भरतपुर के किसानों के लिए मचान विधि अब एक मजबूत सहारा बनती जा रही है. कम जमीन में अधिक उत्पादन बेहतर गुणवत्ता और कम लागत के कारण यह तकनीक किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है. आने वाले समय में उम्मीद की जा रही है कि और अधिक किसान इस विधि को अपनाकर अपनी खेती को लाभकारी और आधुनिक बनाएंगे.



