अब ट्रेन की छत भी बनाएगी बिजली, जोधपुर में जल्द दौड़ेगा सोलर पैनल वाला कोच

Last Updated:August 11, 2026, 12:17 IST
जोधपुर में जल्द ट्रेन के डिब्बों की छत पर सोलर पैनल लगाने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो सकता है. 7 किलोवाट क्षमता वाला सिस्टम सालाना करीब 13,400 यूनिट बिजली बनाएगा. इससे एक कोच पर 2.80 लाख रुपए की बिजली और करीब 11 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी का अनुमान है.
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जोधपुर: जोधपुर में जल्द ही ट्रेन के डिब्बों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बनाने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा. इन पैनलों के जरिए डिब्बे में उसकी जरूरत के हिसाब से बिजली पैदा होगी. भारतीय रेलवे ने हरित ऊर्जा की दिशा में पहल करते हुए उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में सोलर-असिस्टेड कोच लगाए हैं. वहां प्रयोग सफल रहने पर इसको जोधपुर मंडल सहित अन्य मंडलों में भी लागू किया जाएगा.
एक कोच की छत पर 7 किलोवाट-पीक क्षमता के पैनल
प्रयागराज मंडल में तैयार किए गए सोलर-असिस्टेड कोच की छत पर करीब 7 किलोवाट-पीक क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाया गया है. रेलवे के अनुमान के अनुसार यह सिस्टम सालभर में करीब 13,400 यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन करेगा. इस बिजली का उपयोग कोच की बैटरी को चार्ज करने में किया जाएगा. इससे एक कोच पर सालाना करीब 2.80 लाख रुपए कीमत की बिजली पैदा होने का अनुमान है.
हर साल 11 टन कार्बन उत्सर्जन में आएगी कमी
सौर ऊर्जा के इस्तेमाल का सीधा फायदा पर्यावरण को भी मिलेगा. रेलवे के अनुसार एक सोलर-असिस्टेड कोच से सालाना करीब 11 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम किया जा सकता है. रेलवे का लक्ष्य पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटाकर स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है. जोधपुर मंडल में परियोजना लागू होने पर इसका फायदा लंबे समय में ऊर्जा बचत के रूप में भी देखने को मिल सकता है.
पहियों से बनती है बिजली, अब सूरज भी देगा ऊर्जा
परंपरागत आईसीएफ कोचों में बिजली उत्पादन के लिए एक्सल-चालित अल्टरनेटर का इस्तेमाल किया जाता है. ट्रेन के पहिए घूमने के साथ अल्टरनेटर बिजली पैदा करता है. हालांकि, सभी ट्रेनों और कोचों में यह व्यवस्था नहीं होती. सोलर पैनल इस मौजूदा व्यवस्था के साथ अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत के तौर पर काम करेंगे. दिन में धूप से बनने वाली बिजली बैटरी चार्ज करने में इस्तेमाल होगी.
प्रयोग सफल हुआ तो जोधपुर में बढ़ेगा दायरा
फिलहाल प्रयागराज मंडल में एक आईसीएफ गैर-वातानुकूलित कोच पर इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाया गया है. इसके जरिए बिजली उत्पादन, बचत और तकनीकी प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा. अगर प्रयोग उम्मीद के मुताबिक सफल रहता है तो रेलवे अन्य मंडलों के साथ जोधपुर मंडल में भी इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से लागू कर सकता है. इससे ट्रेनों में हरित ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ेगा और रेलवे के ऊर्जा बचत व पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा मिलेगी.
About the AuthorKarishma VermaRajasthan Coordinator
करिश्मा वर्मा पिछले 10 वर्षों से मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2014 में ईटीवी (ETV) में इंटर्नशिप से की थी. इसके बाद उन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों म…
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Jodhpur,Rajasthan
First Published :
August 11, 2026, 12:15 IST



