Pratapgarh News: विकास से कोसों दूर, नाव और जंगल का रास्ता तय कर पंचायत चुनाव में उमड़े कर्मी गांव के मतदाता

Last Updated:November 03, 2026, 19:49 IST
Pratapgarh News: बुनियादी सुविधाओं और पक्के रास्तों से महरूम प्रतापगढ़ के कर्मी गांव के ग्रामीणों ने 3 किलोमीटर नाव की सवारी और 10 किलोमीटर जंगल का जोखिम भरा सफर तय कर पंचायत चुनाव में मतदान किया. जाखम बांध के पानी से घिरे इस गांव के लोगों ने तमाम दुश्वारियों के बावजूद लोकतंत्र के प्रति अपनी अटूट निष्ठा का मजबूत संदेश दिया है.
प्रतापगढ़. जिले के धमोतर पंचायत समिति क्षेत्र में स्थित जाखम बांध के पानी से घिरे कर्मी गांव के निवासियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में आस्था और मतदान का अधिकार हर बाधा से बड़ा होता है. तमाम दुश्वारियों और मूलभूत सुविधाओं के घोर अभाव के बीच यहां के ग्रामीणों ने पंचायतीराज चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने मताधिकार का मजबूत संदेश दिया.
करीब 250 की आबादी वाले इस छोटे से गांव में आज भी विकास की रोशनी पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है. यहां के बाशिंदे सड़क, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं. आधुनिक युग में भी इस गांव का संपर्क मुख्यधारा से कटा हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन बेहद संघर्षपूर्ण बना हुआ है.
13 किलोमीटर का कठिन और जोखिम भरा सफर
कर्मी गांव के निवासियों को अपनी हर छोटी-बड़ी जरूरत और मतदान जैसे राष्ट्रीय कर्तव्यों को पूरा करने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है. गांव तक पहुंचने या गांव से बाहर निकलने के लिए ग्रामीणों को कुल 13 किलोमीटर का लंबा और जोखिम भरा सफर तय करना पड़ता है. सबसे पहले ग्रामीणों को जाखम बांध के पानी के बीच से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी नाव के जरिए तय करनी होती है. नाव से उतरने के बाद लगभग 10 किलोमीटर का सफर घने जंगल के कच्चे और दुर्गम रास्तों से पैदल या अन्य सीमित साधनों से पूरा करना पड़ता है.
प्रशासनिक बदलाव और पंचायत का दायरा
प्रशासनिक रूप से यह गांव पहले ग्राम पंचायत ग्यासपुर के अंतर्गत आता था. हालांकि, समय के साथ हुए बदलावों और नई ग्राम पंचायत अनूपपुर के गठन के बाद अब कर्मी गांव को इसी नई पंचायत में शामिल कर लिया गया है. पंचायत बदलने के बावजूद गांव की भौगोलिक और बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं.
लोकतंत्र के प्रति अटूट निष्ठा और उत्साह
सुविधाओं के इस भीषण अभाव और प्रशासनिक उपेक्षा के बावजूद, पंचायत चुनाव के दौरान ग्रामीणों का उत्साह जरा भी कम नहीं हुआ. चुनाव के दिन गांव के महिला और पुरुष मतदाताओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर नाव से खतरनाक सफर तय किया और फिर जंगल के रास्ते चलकर अपने मतदान केंद्र तक पहुंचे. मतदाताओं का यह अनुकरणीय जज्बा इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिस्थितियां भी जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों और देश के प्रति उनके कर्तव्यों को डिगा नहीं सकती. स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि उनकी इन गंभीर समस्याओं पर जल्द ध्यान दिया जाए ताकि उन्हें इस तरह के संघर्षों से मुक्ति मिल सके.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Pratapgarh,Uttar Pradesh
First Published :
November 03, 2026, 19:49 IST



