Puraani Note | 786 से लेकर 667788 तक… घर में छिपा है भारत के नोटों का ऐसा संग्रह, जिसे देखकर हैरान रह जाते हैं लोग!

Last Updated:July 06, 2026, 13:06 IST
Jaipur Man Old Currency Note Collection : जयपुर के विष्णु कुमार भार्गव ने 50 वर्षों से अधिक समय से भारतीय नोटों का अनोखा संग्रह किया है. उनके पास 500 से अधिक दुर्लभ नोट हैं, जिनमें आजादी के बाद के नोट शामिल हैं. विष्णु कुमार भार्गव बताते हैं कि दुनिया के हर देश की करंसी अपने आप में एक अलग इतिहास समेटे होती है. भारत में भी एक रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक के अलग-अलग समय में प्रचलित रहे नोटों का उनके पास संग्रह मौजूद है. उनके अनुसार भारतीय नोट हमेशा अपनी खूबसूरत डिजाइन, प्रतीक चिन्हों और भारतीय संस्कृति से जुड़े चित्रों के कारण खास रहे हैं.
जयपुर. जयपुर कला, संस्कृति और विरासत का शहर है, जहां आज भी लोग अपने पूर्वजों की धरोहर को सहेजकर आगे बढ़ा रहे हैं. शहर में ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने पुरानी और दुर्लभ वस्तुओं को संभालना अपना शौक बना लिया है. ऐसा ही एक नाम है चारदीवारी क्षेत्र के हवामहल बाजार स्थित राजा भट्ट की हवेली में रहने वाले विष्णु कुमार भार्गव का. पिछले करीब 50 वर्षों से उन्होंने आजादी के बाद से अब तक जारी हुए भारतीय नोटों का अनोखा संग्रह तैयार किया है. वर्षों से संजोए गए इस संग्रह को देखने के लिए आज देश-विदेश से पर्यटक भी उनके पास पहुंचते हैं.
लोकल-18 ने हवामहल के पास स्थित राजा भट्ट की हवेली में पहुंचकर विष्णु कुमार भार्गव से उनके इस अनोखे संग्रह के बारे में बात की. 75 वर्षीय भार्गव बताते हैं कि वह वर्षों से अपने परिवार के पुराने सिक्के, स्टाम्प पेपर, डाक टिकट, बही-खाते और नोटों का संग्रह करते आ रहे हैं. यह उनके परिवार की पुश्तैनी परंपरा का हिस्सा रहा है. उनके पास भारतीय मुद्रा के 500 से अधिक दुर्लभ नोटों का संग्रह है, जिसे देखना हर किसी के लिए आसान नहीं है.
आजादी के दौर से जुड़े नोटों का अनमोल खजानाविष्णु कुमार भार्गव बताते हैं कि दुनिया के हर देश की करंसी अपने आप में एक अलग इतिहास समेटे होती है. भारत में भी एक रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक के अलग-अलग समय में प्रचलित रहे नोटों का उनके पास संग्रह मौजूद है. उनके अनुसार भारतीय नोट हमेशा अपनी खूबसूरत डिजाइन, प्रतीक चिन्हों और भारतीय संस्कृति से जुड़े चित्रों के कारण खास रहे हैं. समय के साथ नोटों की सुरक्षा विशेषताओं में भी बदलाव आया है, जिससे नकली नोटों की पहचान करना आसान हुआ है. भार्गव बताते हैं कि वर्ष 1950 से वह लगातार इन नोटों को एकत्र कर रहे हैं. उनके संग्रह में फैंसी नोट, अलग-अलग नंबर सीरीज वाले नोट और एक ही मूल्य वर्ग के कई अलग-अलग संस्करण शामिल हैं. हालांकि कुछ दुर्लभ नोट अब भी उनके संग्रह में नहीं हैं, लेकिन वह आज भी चलन में आने वाले हर नए और अलग नंबर वाले नोट पर नजर रखते हैं और विशेष नोट मिलते ही उसे अपने संग्रह में शामिल कर लेते हैं.
दुर्लभ नंबर सीरीज वाले नोट हैं सबसे खासभार्गव बताते हैं कि 1950 के बाद भारत सरकार ने समय-समय पर कई नए नोट जारी किए, जिन पर भारतीय किसान, ऐतिहासिक धरोहरों और देश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े चित्र अंकित किए गए. उनके संग्रह की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 667788 जैसी डबल डिजिट सीरीज और 786 जैसे विशेष नंबरों वाले कई दुर्लभ नोट भी शामिल हैं. ऐसे नोटों की बाजार में काफी मांग रहती है और कई लोग इनके बदले बड़ी रकम देने को तैयार रहते हैं. इसके बावजूद भार्गव इन नोटों को बेचने के पक्ष में नहीं हैं. उनका कहना है कि यह केवल नोट नहीं, बल्कि भारतीय मुद्रा की विरासत हैं, जिन्हें वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना चाहते हैं. उनका यह अनोखा संग्रह देखने के लिए खासतौर पर जयपुर आने वाले पर्यटक और भारतीय करंसी के इतिहास में रुचि रखने वाले लोग बड़ी संख्या में उनके पास पहुंचते हैं.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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