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Putin Doval Dhurandhar Moment | BRICS Summit 2026 | ब्रिक्स में पुतिन और डोभाल का ‘धुरंधर’ वाला मोमेंट, इशारों-इशारों में क्या बोल गए रूसी राष्ट्रपति?

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ब्रिक्स में पुतिन-डोभाल का धुरंधर मोमेंट, इशारों में क्या बोले रूसी राष्ट्रपति

Last Updated:September 11, 2026, 23:23 IST

दिल्ली ब्रिक्स समिट 2026 से एक बहुत खास वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. लोग इसे ‘धुरंधर मोमेंट’ बता रहे हैं. इसमें जब पीएम मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को गले लगाया, तब पुतिन की नजर पास खड़े अजित डोभाल पर पड़ी. पुतिन ने तुरंत मुस्कुराकर डोभाल की तरफ हाथ हिलाया. किसी देश के राष्ट्रपति का किसी सुरक्षा सलाहकार को ऐसा सम्मान देना बहुत बड़ी बात है. पुतिन का ये 2 सेकेंड का इशारा भारत और रूस के गहरे रिश्तों को दिखाता है. ये साफ बताता है कि दोनों देशों के बीच खुफिया साझेदारी और भरोसा कितना मजबूत है.ब्रिक्स में पुतिन-डोभाल का धुरंधर मोमेंट, इशारों में क्या बोले रूसी राष्ट्रपतिZoomब्रिक्स से पुतिन डोभाल का धुरंधर मोमेंट वायरल (फाइल फोटो)

भारत की मेजबानी में आयोजित हो रहे ब्रिक्स 2026 सम्मेलन के दौरान एक ऐसा खास पल देखने को मिला जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक-दूसरे से मिले और गले लगे, तब पुतिन ने पास में खड़े भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल की तरफ मुस्कुराते हुए हाथ हिलाया. ये सोशल मीडिया पर ‘धुरंधर मोमेंट’ बताकर खूब वायरल हो रहा है. कूटनीति की दुनिया में कोई राष्ट्राध्यक्ष जब किसी देश के सुरक्षा सलाहकार को इस तरह व्यक्तिगत तौर पर अहमियत देता है तो ये बहुत बड़ी बात मानी जाती है. पुतिन ने डोभाल की तरफ जो हाथ से इशारा किया, वो रूस और भारत के रिश्तों की गहराई का एक ट्रेलर है.

क्या था वो 2 सेकेंड का ‘धुरंधर’ फ्रेम?

जैसे ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कैमरों के सामने पीएम मोदी से मिलने पहुंचे, पूरा माहौल बेहद हाई-प्रोफाइल कूटनीतिक गहमागहमी से भर गया. पीएम नरेंद्र मोदी ने आगे बढ़कर पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत किया. दोनों नेता मुस्कुराए, हाथ मिलाया और एक-दूसरे को गले लगाया. लेकिन इस पूरे हाई-प्रोफाइल फ्रेम में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब पीएम मोदी से बात करते-करते पुतिन की नजर थोड़ा पीछे खड़े अजित डोभाल पर गई.

पुतिन ने सीधे डोभाल की तरफ देखा, चेहरे पर एक खास मुस्कान आई और उन्होंने हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया. अजित डोभाल ने भी अपने चिरपरित अंदाज में मुस्कुराकर रूसी राष्ट्रपति का अभिवादन स्वीकार किया. वीडियो में साफ दिख रहा है कि पुतिन का ये अंदाज किसी तय सरकारी प्रोटोकॉल का हिस्सा नहीं था. ये दो ऐसे लोगों का आपसी तालमेल था जो एक-दूसरे की रणनीतिक ताकत से अच्छी तरह वाकिफ हैं.

राष्ट्रपति पुतिन और NSA अजीत डोभाल के बीच 2 सेकेंड्स के इस जेस्टर ने साबित कर दिया है कि भारत और रूस के बीच इंटेलीजेंस शेयरिंग नेटवर्क कितना तगड़ा है. फिल्म ‘धुरंधर’ में जो कनेक्शन पर्दे पर दिखाया गया वो उससे भी कहीं ज्यादा गहरा साबित हुआ है.

कूटनीति में इस छोटे से इशारे के बड़े मायने

भारत और रूस के बीच खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान और सुरक्षा स्तर पर साझेदारी कोई नई बात नहीं है. KGB के पूर्व अधिकारी रहे व्लादिमीर पुतिन खुद खुफिया तंत्र की बारीकियों को समझते हैं, इसलिए वो भारत के ‘मास्टरमाइंड’ अजित डोभाल की अहमियत को बहुत अच्छी तरह जानते हैं.

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किसी देश का राष्ट्रपति आमतौर पर केवल दूसरे देश के राष्ट्रप्रमुख से ही सीधी बातचीत करता है. सुरक्षा सलाहकारों, मंत्रियों या डिप्लोमैट्स से सिर्फ एक औपचारिक हाथ मिलाना ही काफी माना जाता है. लेकिन जब दुनिया के सबसे पावरफुल नेताओं में शामिल व्लादिमीर पुतिन किसी सुरक्षा सलाहकार को अलग से तवज्जो दें, तो इसके कई बड़े कूटनीतिक मायने निकलते हैं.

आपसी भरोसा: ये इशारा साबित करता है कि पुतिन डोभाल को सिर्फ एक भारतीय अफसर नहीं, बल्कि एक बेहद भरोसेमंद रणनीतिकार मानते हैं.
डायरेक्ट इंटेलिजेंस चैनल: इसका मतलब है कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा और खुफिया मामलों पर बात करने के लिए किसी तीसरे माध्यम की जरूरत नहीं पड़ती.
बैकचैनल डिप्लोमेसी: जब सार्वजनिक तौर पर दो देशों के बीच बात अटकती है, तब डोभाल और पुतिन का ये सीधा संपर्क किसी मुश्किल को मिनटों में सुलझा देता है.

क्रेमलिन के दरवाजे: जब-जब मॉस्को पहुंचे डोभाल

अजित डोभाल और व्लादिमीर पुतिन के बीच का ये रिश्ता रातों-रात नहीं बना है. इतिहास गवाह है कि जब भी दुनिया में कोई बड़ा जियोपॉलिटिकल संकट आया है, अजित डोभाल ने मॉस्को जाकर सीधे राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की है. आमतौर पर पुतिन किसी दूसरे देश के एनएसए को अकेले में मिलने का समय नहीं देते, लेकिन डोभाल के लिए क्रेमलिन के दरवाजे हमेशा खुले रहे हैं.

सितंबर 2024 (सेंट पीटर्सबर्ग की सीक्रेट टॉक): ब्रिक्स सुरक्षा प्रमुखों की मीटिंग में जब डोभाल रूस गए, तो सेंट पीटर्सबर्ग के पैलेस में पुतिन ने उनके साथ अलग से अकेले में बैठक की. इस मुलाकात में डोभाल ने पीएम मोदी की रूस और यूक्रेन यात्राओं से जुड़े खास मैसेज पुतिन तक पहुंचाए.
फरवरी 2023 (क्रेमलिन में लंबी बैठक): रूस-यूक्रेन जंग के भारी तनाव के बीच अजित डोभाल अचानक मॉस्को पहुंचे. पुतिन ने खुद अपने दफ्तर क्रेमलिन में उनका स्वागत किया. इस बैठक में हथियारों की डील, एनर्जी सिक्योरिटी और पश्चिमी देशों के बैन से निपटने पर सीधी बात हुई.
अगस्त 2025 (सुरक्षा और व्यापार वार्ता): डोभाल ने एक बार फिर रूस का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन और रूस की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के साथ मिलकर कई संवेदनशील और अहम मुद्दों पर रणनीति बनाई.

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