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Rajasthan Unique Temple : अफसरों का प्रमोशन से लेकर मानव नसों जैसी प्रतिमा तक; अनोखा है नाड़ी वाले गणपति का इतिहास

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अफसरों का प्रमोशन, मानव नसों जैसी प्रतिमा तक; जानें नाड़ी वाले गणपति का इतिहास

Last Updated:September 16, 2026, 16:35 IST

Story Of Bhinmal Nadi Wale Ganpati: भीनमाल का नाड़ी वाले गणपति मंदिर प्राचीन इतिहास और अनोखी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. गणेश महोत्सव में विशेष आयोजन होते हैं. मूर्ति में मानव शरीर जैसी नसें दिखती हैं. इसी स्थान पर भगवान विनायक की तपस्या की थी. मान्यता है कि उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर विनायक यहां अवतरित हुए और राजा को श्राप से मुक्ति मिली.

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जालौर. जालोर जिले के भीनमाल में खजूरिया नाले के पास स्थित नाड़ी वाले गणपति मंदिर आस्था के साथ अपने प्राचीन इतिहास और अनोखी मान्यताओं के लिए भी जाना जाता है. गणेश महोत्सव के दौरान मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. वहीं, हर बुधवार को मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल रहता है.

मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, जब भीनमाल को श्रीमाल के नाम से जाना जाता था, उस समय राजा क्षेम ने इसी स्थान पर भगवान विनायक की तपस्या की थी. मान्यता है कि उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर विनायक यहां अवतरित हुए और राजा को श्राप से मुक्ति मिली. इसके बाद यहां गणपति की स्थापना कर पूजा-अर्चना शुरू हुई.

मूर्ति में दिखाई देती हैं मानव शरीर जैसी नसेंसिद्धिविनायक मंदिर विकास समिति के सचिव अमृतलाल डी. प्रजापत ने लोकल18 को जानकारी दी कि यह मंदिर बहुत ही प्राचीन और चमत्कारी माना जाता है. जब भगवान का श्रृंगार किया जाता है तो मूर्ति में मानव शरीर जैसी नसें दिखाई देती हैं. यहां कई सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी अपनी पदोन्नति की मन्नत लेकर आते हैं. भीनमाल के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों से भी अधिकारी अपनी मनोकामना लेकर यहां पहुंचते हैं. ऐसी मान्यता है कि मन्नत पूरी होने के बाद कई अधिकारी ऊंचे पदों पर पहुंचे हैं. पूर्व में भीनमाल के एसडीएम भी यहां आए थे और बाद में उनका प्रमोशन हुआ.

गुंबद से गिरा कारीगर, नहीं आई चोटसमिति सचिव ने मंदिर से जुड़ी एक घटना का भी जिक्र किया. उनके अनुसार, मंदिर के रंग-रोगन के दौरान एक कारीगर गुंबद की छत से नीचे गिर गया था, लेकिन उसे किसी तरह की चोट नहीं लगी. मंदिर से जुड़े ऐसे कई प्रसंग श्रद्धालुओं के बीच आस्था और चमत्कार की मान्यताओं को मजबूत करते हैं.

50 वर्ष पहले हुआ वर्तमान मंदिर का निर्माणमंदिर के सचिव बताते हैं कि पुराने मंदिर के ध्वस्त होने के बाद लंबे समय तक यहां प्राचीन अवशेष रहे. करीब 50 वर्ष पहले वर्तमान मंदिर का निर्माण करवाया गया. इसके बाद मंदिर के विकास और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए साल 2007 में सिद्धिविनायक मंदिर विकास समिति का गठन किया गया. समिति की ओर से मंदिर का जीर्णोद्धार, चारदीवारी, नाड़ी का सौंदर्यीकरण और परिसर में पौधरोपण जैसे कार्य करवाए गए.

गणेश महोत्सव में होते हैं विशेष आयोजनगणेश महोत्सव के दौरान मंदिर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाता है और विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. वहीं, प्रत्येक बुधवार को भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. इतिहास, मान्यताओं और आस्था से जुड़ा नाड़ी वाले गणपति मंदिर आज भी भीनमाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अपनी अलग पहचान रखता है.

About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…

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Jalor,Jalor,Rajasthan

First Published :

September 16, 2026, 16:30 IST

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