Rakhi Special: जयपुर में भाइयों से पहले गोविंद देव जी को क्यों बांधी जाती है राखी? जानें अनोखी परंपरा

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भाइयों से पहले गोविंद देव जी को क्यों बांधते हैं राखी? जानें जयपुर की परंपरा
Last Updated:August 24, 2026, 12:26 IST
Offering First Rakhi to Govind Dev Ji Tradition: रक्षाबंधन पर जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में आस्था का अनूठा रंग देखने को मिलता है. यहां भाई-बहन के रिश्ते के साथ भक्त और भगवान के बीच रक्षा और विश्वास का भाव भी इस पर्व से जुड़ा है. वर्षों पुरानी परंपरा के तहत रक्षाबंधन पर सबसे पहले ठाकुर श्री गोविंद देव जी को राखी अर्पित की जाती है. मंदिर में विशेष श्रृंगार, झांकी, पंचामृत अभिषेक और भोग का आयोजन होता है. श्रद्धालु भगवान को रक्षा सूत्र अर्पित कर अपने परिवार और प्रियजनों की रक्षा, सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं. सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भीड़ जुटती है और जयकारों से परिसर गूंज उठता है. इस परंपरा में जयपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी दिखाई देती है.
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रक्षाबंधन पर जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में आस्था का अनूठा रंग देखने को मिलता है.
जयपुर. गुलाबी नगरी जयपुर में रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम और रिश्ते का उत्सव तो है ही, इसके साथ ही यह शहर के आराध्य ठाकुर श्री गोविंद देव जी के प्रति गहरी आस्था और श्रद्धा का भी बड़ा पर्व माना जाता है. जयपुर में रक्षाबंधन की शुरुआत अपने आराध्य को पहली राखी अर्पित करने की परंपरा से होती है. रक्षाबंधन के मौके पर गोविंद देव जी मंदिर में विशेष श्रृंगार और झांकी सजाई जाती है. भगवान को राखियों से सजाया जाता है और विशेष पूजा-अर्चना के साथ पंचामृत अभिषेक और भोग लगाया जाता है.
सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर ठाकुर जी के दर्शन करते हैं और उनके चरणों में रक्षा सूत्र अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं. मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्ति का माहौल बना रहता है और भगवान के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो जाता है. भक्तों के लिए यह दिन भगवान के प्रति अपनी आस्था प्रकट करने और उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख-शांति की कामना करने का अवसर है.
ठाकुर जी को सबसे पहले अर्पित होती है राखी
जयपुर के आराध्य देव ठाकुर श्री गोविंद देव जी को रक्षाबंधन पर सबसे पहले राखी अर्पित करने की परंपरा वर्षों पुरानी बताई जाती है. श्रद्धालुओं के लिए यह केवल धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि भगवान के प्रति अपने समर्पण और विश्वास को व्यक्त करने का माध्यम है. श्रद्धालु मानते हैं कि ठाकुर जी को रक्षा सूत्र बांधने से भगवान अपने भक्तों की रक्षा करते हैं. इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष मंदिर पहुंचते हैं. बहनें ठाकुर जी को अपना रक्षक मानकर राखी अर्पित करती हैं और अपने भाई, परिवार और प्रियजनों के लिए सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं.
राजपरिवार से आम श्रद्धालु तक जुड़ी है आस्था
गोविंद देव जी मंदिर से जयपुर के राजपरिवार की आस्था भी गहराई से जुड़ी हुई है. रक्षाबंधन के अवसर पर यहां राजपरिवार से लेकर आम श्रद्धालुओं तक की आस्था देखने को मिलती है. मंदिर में पहुंचने वाले भक्त भगवान के दर्शन कर रक्षा सूत्र अर्पित करते हैं और अपने परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं. रक्षाबंधन पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ पंचामृत अभिषेक और भोग की परंपरा भी निभाई जाती है. ठाकुर जी के विशेष श्रृंगार के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह नजर आता है. मंदिर परिसर में हर-हर गोविंद और ठाकुर जी के जयकारों से भक्तिमय माहौल बना रहता है.
भक्त और भगवान के रिश्ते का अनूठा पर्व
जयपुर में रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते से आगे बढ़कर भक्त और भगवान के बीच विश्वास और सुरक्षा के भाव का पर्व बन जाता है. श्रद्धालु ठाकुर जी को रक्षा सूत्र अर्पित कर उनसे अपने परिवार और अपनों की रक्षा का आशीर्वाद मांगते हैं. राखियों से सजे ठाकुर जी, विशेष श्रृंगार, पंचामृत अभिषेक, भोग और मंदिर में उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़ रक्षाबंधन के इस पर्व को खास बना देती है. यही वजह है कि जयपुर में रक्षाबंधन की शुरुआत ठाकुर श्री गोविंद देव जी को पहली राखी अर्पित करने की परंपरा से जुड़ी हुई है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Jaipur,Rajasthan
First Published :
August 24, 2026, 12:26 IST



