Agriculture: नागौर मंडी ने बदला कमाई का गणित, राजस्व में 84.29% की उछाल, किसानों का ऐसे भरोसा लौटा

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नागौर मंडी ने कमाई में मारी बाजी, राजस्व में 84.29% की उछाल, ऐसे बदला गणित
Last Updated:October 04, 2026, 12:31 IST
Nagaur Mandi Revenue News: नागौर उपज मंडी ने राजस्व के मामले में इस बार अपने पुराने आंकड़ों को पीछे छोड़ते हुए 84.29 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है. मूंग और इसबगोल की कम आवक और इन पर कम मंडी टैक्स के साथ स्थानीय औद्योगिक इकाइयों को 100 प्रतिशत मंडी शुल्क छूट मिलने के बावजूद मंडी की आय 386.86 लाख रुपए पहुंच गई. इसके साथ नागौर मंडी अपने जोन की 16 मंडियों में आय के लिहाज से दूसरे स्थान पर रही. मेड़ता मंडी 960.50 लाख रुपए के साथ पहले स्थान पर है. नागौर मंडी की बढ़ी आय में सरसों, चना, जीरा और ग्वार की अच्छी आवक का बड़ा योगदान रहा. वहीं बोली की समय व्यवस्था में बदलाव से किसानों को भी राहत मिली.
उपज मंडी नागौर ने इस बार राजस्व के मामले में अपने ही पुराने आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है. मूंग और इसबगोल जैसी मुख्य फसलों पर कम मंडी टैक्स मिलने और स्थानीय औद्योगिक इकाइयों को राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजनाओं के तहत मिलने वाली 100% मंडी शुल्क छूट के बावजूद मंडी की आय में 84.29 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इस प्रदर्शन के साथ नागौर मंडी अपने जोन की 16 मंडियों में 386.86 लाख रुपए की आय के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गई है.
जोन में आय के मामले में मेड़ता मंडी 960.50 लाख रुपए की आय के साथ पहले स्थान पर है. वहीं नागौर मंडी प्रतिशत बढ़ोतरी के लिहाज से तीसरे स्थान पर रही. खास बात यह है कि पहले और दूसरे स्थान पर रहने वाली मंडियों में रीको क्षेत्र नहीं है. इसके बावजूद नागौर मंडी ने औद्योगिक क्षेत्र और मंडी शुल्क में मिलने वाली छूट की चुनौती के बीच टॉप-2 में जगह बनाई है. आवक के मामले में भी नागौर मंडी जोन में दूसरे स्थान पर रही है.
नागौर क्षेत्र को लंबे समय से मूंग, सरसों और इसबगोल की बंपर पैदावार के लिए जाना जाता है. इस बार मूंग और इसबगोल की आवक कम रही. साथ ही इनसे मंडी को मिलने वाला टैक्स भी अन्य जिंसों की तुलना में कम रहा. ऐसे में सामान्य तौर पर मंडी की आय पर असर पड़ने की संभावना थी, लेकिन सरसों, चना, जीरा और ग्वार जैसी जिंसों की बढ़ी आवक ने पूरा समीकरण बदल दिया. इन फसलों के कारोबार से मंडी को बेहतर राजस्व मिला.
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मंडी प्रशासन के अनुसार आय बढ़ने के पीछे सिर्फ फसलों की आवक ही वजह नहीं रही, बल्कि मंडी में सुविधाओं और व्यवस्था में हुए बदलाव का भी असर दिखाई दिया. किसानों को मंडी में ही बेहतर भाव और समय पर बोली की सुविधा मिलने से बाहरी व्यापारियों के पास फसल बेचने की प्रवृत्ति कम हुई. इससे मंडी में व्यापार बढ़ा और अलग-अलग जिंसों की आवक में भी सुधार देखने को मिला. यानी इस बार बढ़ी आय सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि मंडी के ढांचे को सुधारने का आधार भी बन सकती है.
नागौर मंडी में इस बार बोली की समय व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. मंडी प्रशासन के अनुसार अब करीब सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच बोली प्रक्रिया पूरी हो रही है. पहले किसानों को देर शाम तक मंडी में रुकना पड़ता था और कई बार रात करीब 9 बजे तक घर नहीं पहुंच पाते थे. ऐसे में समय बचाने के लिए किसान कम भाव पर बाहरी व्यापारियों को फसल बेचकर लौट जाते थे. समय पर बोली होने से किसानों को मंडी में फसल बेचने में सुविधा मिली है.
इस बार किसानों को मंडी में उपलब्ध सुविधाओं, बोली व्यवस्था और भावों की जानकारी देकर जागरूक किया गया. मंडी में बेहतर प्रक्रिया और अच्छे भाव मिलने से किसानों का रुझान फिर से बढ़ा है. यही बदलाव बढ़ी आवक के रूप में दिखाई दे रहा है. मंडी प्रशासन अब बढ़ी आय के बाद मूलभूत सुविधाओं को बेहतर करने की तैयारी में है. टूटे शौचालय, खराब सड़कें, नालियां, कचरा प्रबंधन और पेयजल व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे. मंडी के विकास के लिए बजट उपलब्ध होने पर इन कामों को प्राथमिकता से कराया जाएगा.
First Published :
October 04, 2026, 12:31 IST



