Sanwaliyaji Temple: सांवलियाजी सेठ मंदिर में बदलेगी चढ़ावा गिनने की व्यवस्था, कर्मचारियों को पहनने होंगे बिना जेब के कपड़े

चित्तौड़गढ़. राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल चित्तौड़गढ़ के श्री सांवलियाजी मंदिर और नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में चढ़ावे की गिनती व्यवस्था को पहले से अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. हाल के दिनों में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बाद अब राजस्थान के इन दोनों बड़े मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला लिया गया है. बढ़ती दानराशि और करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास को देखते हुए मंदिर प्रबंधन आधुनिक तकनीक, कड़ी निगरानी और सख्त प्रशासनिक व्यवस्था लागू करने जा रहा है.
श्री सांवलियाजी मंदिर में नोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले विशेष कपड़े लागू करने की तैयारी है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या संदेह की गुंजाइश खत्म हो सके. वहीं गणना कक्ष के बाहर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाया जाएगा और पूरी प्रक्रिया पर सीसीटीवी कंट्रोल रूम से लगातार नजर रखी जाएगी. दूसरी ओर नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में स्थानीय प्रतिष्ठित लोगों को शामिल कर नई समिति बनाने, चार-स्तरीय ऑडिट सिस्टम को और मजबूत करने तथा निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है. दोनों मंदिरों में किए जा रहे ये बदलाव श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं.
सांवलियाजी मंदिर में बिना जेब वाले कपड़े पहनेंगे कर्मचारी
श्री सांवलियाजी मंदिर मंडल के अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव ने बताया कि चढ़ावे की गणना में शामिल कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले कपड़े लागू करने की तैयारी की जा रही है. गणना कक्ष के बाहर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे कोई भी व्यक्ति धातु या संदिग्ध वस्तु अंदर-बाहर नहीं ले जा सके. जरूरत के अनुसार नई तकनीकों और एक्सपर्ट के सुझावों को भी व्यवस्था में शामिल किया जाएगा. सीसीटीवी कंट्रोल रूम से निगरानी और अधिक मजबूत की जाएगी.
वीडियो कैमरों की निगरानी में होती है पूरी गणना
वर्तमान में मंदिर के सीईओ एवं एडीएम दिनेशचंद्र धाकड़ की देखरेख में गणना प्रक्रिया पूरी होती है. पहले नोटों की गिनती जमीन पर की जाती थी, लेकिन अब करीब 4 फीट चौड़ी और 6 इंच ऊंची विशेष टेबल पर नोट रखकर गिनती की जाती है. गिने गए नोट उसी दिन बैंक स्टाफ अपने सुपुर्द लेकर बैंक में जमा करता है. गणना कक्ष में कई सीसीटीवी और वीडियो कैमरे लगे हैं. सोने-चांदी की प्रत्येक भेंट पर तुरंत रसीद भी जारी की जाती है.
हर महीने 35 करोड़ तक का चढ़ावा, एक साल में 101 करोड़ की बढ़ोतरी
सांवलियाजी मंदिर में हर अमावस्या से पहले चढ़ावे की गणना शुरू होती है, जो करीब 5 से 7 दिन तक चलती है. मंदिर में हर महीने औसतन 35 करोड़ रुपये तक नकद चढ़ावा आता है. वित्त वर्ष 2025-26 में मंदिर को नकद और ऑनलाइन मिलाकर 337.66 करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला, जबकि 2024-25 में यह राशि 235.96 करोड़ रुपये थी. यानी एक साल में करीब 101.70 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज हुई. इसके अलावा श्रद्धालुओं ने करीब 11 किलो सोना और 1000 किलो चांदी भी भेंट की.
श्रीनाथजी मंदिर में बनेगी नई समिति, चार स्तर पर होगी जांच
नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में भी चढ़ावे की गणना प्रणाली को और पारदर्शी बनाने की तैयारी है. मंदिर मंडल स्थानीय प्रतिष्ठित लोगों को शामिल कर नई समिति गठित करने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिस पर बोर्ड की मंजूरी के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा. वर्तमान में यहां चार सुरक्षा गार्ड, दो गणना प्रभारी और चार मशीन ऑपरेटर की मौजूदगी में नोटों की गिनती होती है. एक टीम नोट गिनती है, दूसरी टीम मशीन से दोबारा सत्यापन करती है. इसके बाद बाहरी जांच होती है और अंत में राज्य सरकार द्वारा नियुक्त वैधानिक ऑडिटर पूरी प्रक्रिया का ऑडिट करते हैं.
दानराशि में लगातार बढ़ोतरी, दो महीने चलती है गणना
श्रीनाथजी मंदिर में पिछले चार वर्षों से दानराशि लगातार बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2022-23 में मंदिर को 20.71 करोड़ रुपये, 2023-24 में 22.94 करोड़ रुपये, 2024-25 में 21.84 करोड़ रुपये और 2025-26 में 25.69 करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला. पिछले वर्ष की तुलना में यह करीब 18 प्रतिशत की वृद्धि है. मंदिर में गणना प्रक्रिया करीब दो महीने तक चलती है. इस दौरान 18 दान पेटियां खोली जाती हैं और प्रत्येक पेटी से 15 से 17 बोरे तक नोट निकलते हैं. वर्ष 2017 से अब तक मंदिर के तीन खातों में 20 एफडीआर के माध्यम से करीब 14 करोड़ रुपये की एफडी की जा चुकी है. पूरी गणना प्रक्रिया सरकारी कर्मचारियों की मौजूदगी और सीसीटीवी निगरानी में संपन्न होती है.
श्रद्धालुओं का भरोसा और मजबूत करने की तैयारी
मंदिर प्रशासन का कहना है कि इन सभी बदलावों का उद्देश्य चढ़ावे की गणना को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है. आधुनिक तकनीक, कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल, वीडियो निगरानी और बहु-स्तरीय ऑडिट व्यवस्था के जरिए न केवल दानराशि की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि श्रद्धालुओं का मंदिर प्रबंधन पर विश्वास भी पहले से अधिक मजबूत होगा. राजस्थान के दोनों प्रमुख मंदिर अब देश के अन्य धार्मिक संस्थानों के लिए पारदर्शी चढ़ावा प्रबंधन का मॉडल बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.



