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Science Club In Rajasthan Schools: 5000 सरकारी स्कूलों में बनेंगे विज्ञान क्लब, रटने की जगह प्रयोग और नवाचार से पढ़ेंगे बच्चे

Last Updated:September 27, 2026, 14:20 IST

Science Club in Rajasthan Govt Schools: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में विज्ञान शिक्षा को व्यावहारिक बनाने के लिए 5 हजार ‘विज्ञान क्लब’ गठित किए जा रहे हैं. अब तक 1100 से अधिक क्लब पंजीकृत हो चुके हैं. माध्यमिक शिक्षा विभाग और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग मिलकर इसे लागू कर रहे हैं. इस पहल का मकसद छात्रों में रटने की आदत को खत्म कर STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, गणित) और लाइव प्रोजेक्ट्स के माध्यम से वैज्ञानिक सोच विकसित करना है. स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल और पीएम-श्री स्कूल भी इसमें शामिल हैं.

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब विज्ञान की पढ़ाई केवल किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रहेगी. विद्यार्थियों को विज्ञान को समझने के साथ-साथ प्रयोगों के जरिए सीखने का अवसर मिलेगा. राज्य सरकार ने छात्रों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से सरकारी स्कूलों में विज्ञान क्लब गठित करने की मुहिम शुरू की है. प्रदेशभर में 5 हजार विज्ञान क्लब बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि अब तक 1100 से अधिक क्लबों का पंजीकरण हो चुका है.

इस पहल का उद्देश्य छात्रों में रटने की प्रवृत्ति को कम कर उन्हें सवाल पूछने, प्रयोग करने और समस्याओं के समाधान तलाशने के लिए प्रेरित करना है. विज्ञान क्लबों के माध्यम से विद्यार्थियों को एसटीईएम यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स से जुड़ी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा. प्रयोगात्मक कार्यशालाओं, लाइव प्रोजेक्ट, मॉडल निर्माण और नवाचार आधारित गतिविधियों के जरिए बच्चे यह समझ सकेंगे कि स्कूल में पढ़ाया जाने वाला विज्ञान उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में किस तरह उपयोगी है.

इस योजना को माध्यमिक शिक्षा विभाग और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं. माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक ललित कुमार ने सभी संयुक्त निदेशकों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं. वहीं मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों और पदेन जिला परियोजना समन्वयकों को जिला स्तर पर नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है. इन अधिकारियों को संबंधित स्कूलों की सूची तैयार करने और पात्र विद्यालयों में विज्ञान क्लब के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं.

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विज्ञान क्लब के गठन के लिए स्कूल के संस्था प्रधान या प्रधानाचार्य को निर्धारित प्रारूप में आवेदन तैयार करना होगा. यह आवेदन संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भेजा जाएगा, जहां से इसे आगे की कार्रवाई के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को अग्रेषित किया जाएगा. इसके बाद विभाग की ओर से आवेदन की संवीक्षा और आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद संबंधित सरकारी स्कूल में विज्ञान क्लब का पंजीकरण किया जाएगा. इस तरह स्कूल स्तर से आवेदन से लेकर विभागीय सत्यापन और पंजीकरण तक की पूरी प्रक्रिया निर्धारित की गई है.

विज्ञान क्लब बनने के बाद विद्यार्थियों को केवल प्रयोगशाला में पुराने प्रयोग दोहराने तक सीमित नहीं रखा जाएगा. उन्हें अपने आसपास की समस्याओं को वैज्ञानिक नजरिए से समझने और उनके समाधान के लिए प्रोजेक्ट तैयार करने का अवसर मिलेगा. मॉडल बनाना, छोटे-छोटे प्रयोग करना, तकनीक का इस्तेमाल करना और नई चीजों पर काम करना क्लब की प्रमुख गतिविधियों में शामिल होगा. इससे खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के उन विद्यार्थियों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है, जिन्हें स्कूल के बाहर वैज्ञानिक गतिविधियों से जुड़ने के सीमित अवसर मिलते हैं.

शिक्षक संघ राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि विज्ञान संकाय वाले स्कूलों में इस योजना को लेकर उत्साह है. उनके अनुसार विज्ञान क्लबों के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और प्रयोगों से जुड़ने का अवसर मिलेगा. इससे छात्र राज्य और राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान प्रतियोगिताओं की तैयारी भी बेहतर तरीके से कर सकेंगे. उन्होंने योजना का दायरा बढ़ाकर प्रदेश के सभी पात्र स्कूलों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई.

विज्ञान क्लब की इस पहल में केवल सामान्य राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल ही नहीं, बल्कि स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल और पीएम-श्री स्कूलों को भी शामिल किया गया है. जिन सरकारी विद्यालयों में विज्ञान विषय ऐच्छिक संकाय के रूप में संचालित है, वे भी विज्ञान क्लब के लिए आवेदन कर सकते हैं. इससे योजना का दायरा अलग-अलग श्रेणी के सरकारी स्कूलों तक पहुंचने की उम्मीद है. लक्ष्य पूरा होने के बाद प्रदेश के 5 हजार स्कूलों के विद्यार्थियों को किताबों से आगे बढ़कर प्रयोग, प्रोजेक्ट और नवाचार के माध्यम से विज्ञान सीखने का अवसर मिलेगा.

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September 27, 2026, 14:20 IST

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