Rajasthan

कनिष्का गौड़ के अंगदान से तीन मरीजों को मिली नई जिंदगी

जोधपुर. झालामंड स्थित बापू नगर की 16 वर्षीय कनिष्का गौड़, जिसका नाम भले ही ‘कनिष्क’ यानी छोटा अर्थ रखता है, लेकिन उसने अपने साहस और मानवता से एक बहुत बड़ा काम कर दिखाया. उसका सपना था कि वह एनडीए में चयन होकर फोर्स में जाए और देश की सेवा करे. लेकिन 12 नवंबर को एक अप्रत्याशित हादसे ने उसकी ज़िंदगी बदल दी, इलाज के दौरान उसे ब्रेन डेड घोषित किया गया. लेकिन ऐसे कठिन समय में उसके माता-पिता, अशोक गौड़ और संगीता गौड़, ने बड़ा और निस्वार्थ निर्णय लिया, उन्होंने अपनी बेटी के अंगदान के लिए सहमति दी. जिसके बाद एम्स जोधपुर में अंगदान की पूरी प्रक्रिया सम्पन्न हुई. कम उम्र में ही कनिष्का ने अपने लिवर और दोनों किडनी से तीन लोगों को नई ज़िंदगी दी. इसके अलावा दो मरीजों को उनकी दृष्टि लौटाकर दुनिया को और भी खूबसूरत बना दिया.

कनिष्का की एक किडनी के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया और साढ़े चार घंटे की तेज़ रफ्तार से उसे जयपुर पहुंचाया गया. दूसरी किडनी और लिवर का प्रत्यारोपण एम्स जोधपुर में ही सफलतापूर्वक किया गया.

सफल प्रत्यारोपण में कई विभागों का सराहनीय योगदान

डॉ. भारद्वाज ने बताया कि सफल प्रत्यारोपण में कई विभागों का योगदान रहा, यूरोलॉजी टीम में डॉ. ए.एस. संधू, डॉ. गौतमराम चौधरी, डॉ. शिवचरण नावरिया, डॉ. दीपक भीरुड और डॉ. महेन्द्र सिंह ने मुख्य भूमिका निभाई. गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी टीम में डॉ. सुभाष सोनी, डॉ. पीयूष वार्ष्णेय, डॉ. सेल्वकुमार बी, डॉ. वैभव वार्ष्णेय और डॉ. लोकेश अग्रवाल शामिल थे. एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. निखिल कोठारी, डॉ. अनिता और डॉ. भारत पालीवाल और न्यूरोसर्जरी विभाग से डॉ. जसकरन ने अहम योगदान दिया. ट्रांसप्लांट समन्वयक के रूप में नटवर कुलदीप सिंह, नेहा, रमेश और दशरथ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके अलावा न्यूरोलॉजी, नर्सिंग, तकनीकी टीमों, प्रशासन एवं ट्रैफिक विभाग का भी सहयोग सराहनीय रहा.

एम्स में अब तक 9 अंगदानियों ने 24 अंग दिए

एम्स जोधपुर ने मार्च 2024 में अंगदान कार्यक्रम की शुरुआत की थी, अब तक 14 किडनी, 6 लिवर, 3 हृदय और 1 पैंक्रियाज का प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया जा चुका है. जोधपुर संभाग में एम्स के अलावा अंगदान की सुविधा और कहीं नहीं है, एम्स ने अब तक 9 अंगदानियों से कुल 24 अंग हासिल किए हैं. AIIMS जोधपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. पुरी ने कनिष्का के माता-पिता, अशोक और संगीता गौड़, के प्रति आभार व्यक्त किया. डॉ. पुरी ने कहा कि परिवार का साहस और मानवता कई अन्य जिंदगियों को रोशन कर रही है. जिन मरीजों को आज नया जीवन और दृष्टि मिली, उनमें कनिष्का की निस्वार्थ विरासत हमेशा जीवित रहेगी, उनका यह प्रयास अंगदान के महत्व को और मजबूत बनाएगा.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj