Sikar News | Rajasthan Yojana

Last Updated:August 17, 2026, 22:26 IST
Sikar Cow Shelter : सीकर के फूटाला में 85 लाख रुपये की लागत से मॉडल गोमाता आश्रय बनेगा. यह गो-संरक्षण, चारागाह विकास और पर्यावरण संरक्षण का केंद्र होगा. योजना के तहत चारागाहों का विकास, हरियाली बढ़ाना, किसानों की फसलों को आवारा पशुओं से बचाना और पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने का काम भी किया जा जाएगा. यानी फूटाला में बनने वाला यह केंद्र आने वाले समय में गांव के लिए एक ऐसा मॉडल बन सकता है.
Sikar News: सीकर जिले के श्रीमाधोपुर पंचायत समिति की फूटाला ग्राम पंचायत में अब निराश्रित गोवंश के लिए ऐसा आश्रय स्थल तैयार होगा, जहां सिर्फ गायों को छत ही नहीं मिलेगी, बल्कि उनके चारे, पानी और बेहतर देखभाल की भी पूरी व्यवस्था होगी. यहां करीब 85 लाख रुपए की लागत से मॉडल गोमाता आश्रय बनेगा. यह जगह गांव में गो-संरक्षण के साथ-साथ चारागाह विकास और पर्यावरण संरक्षण का भी केंद्र बनेगा. खास बात यह है कि इसे केवल गोशाला के रूप में नहीं, बल्कि ग्रामीण अन्य व्यवस्थाओं से जोड़कर विकसित किया जाएगा.
इस परियोजना का मकसद सड़क और खेतों में भटकने वाले निराश्रित गोवंश को सुरक्षित ठिकाना देना है. इसके अलावा इसे योजना के तहत चारागाहों का विकास, हरियाली बढ़ाना, किसानों की फसलों को आवारा पशुओं से बचाना और पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने का काम भी किया जा जाएगा. यानी फूटाला में बनने वाला यह केंद्र आने वाले समय में गांव के लिए एक ऐसा मॉडल बन सकता है, जहां गो-संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन और ग्रामीण रोजगार एक साथ आगे बढ़ेंगे.
दरअसल, वर्ष 2026 को संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से अंतरराष्ट्रीय पशुपालन एवं चारागाह वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. इसी क्रम में राज्य सरकार ने पंचायत स्तर पर मॉडल गोमाता आश्रय स्थलों को विकसित करने की पहल की है. प्रथम चरण में प्रदेश की प्रत्येक पंचायत समिति की एक ग्राम पंचायत में 20 से 25 हेक्टेयर क्षेत्र में पंडित दीनदयाल उपाध्याय चारागाह विकास एवं गौमाता आश्रय स्थल विकसित किया जाएगा. श्रीमाधोपुर में फूटाला और अजीतगढ़ पंचायत समिति में करड़का का चयन इसी योजना के तहत हुआ है.
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फूटाला के मॉडल आश्रय स्थल में पानी की एक-एक बूंद बचाने से लेकर पशुओं के लिए चारे तक की व्यवस्था को योजना में शामिल किया गया है. 2.50 लाख रुपए की लागत से 55 गुणा 55 फीट का फार्म पॉण्ड बनाया जाएगा, जो वर्षा जल संरक्षण का काम करेगा. इसके अलावा 6 हेक्टेयर में 7 लाख रुपए की लागत से सिल्वी पाश्चर सिस्टम और 6 हेक्टेयर क्षेत्र में 14 लाख रुपए से सघन वृक्षारोपण किया जाएगा. इससे आश्रय स्थल में हरियाली के साथ पशुओं के लिए प्राकृतिक चारा उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम होगा.
गोवंश की सुरक्षा के लिए 20 हेक्टेयर क्षेत्र में 8.50 लाख रुपए की लागत से तारबंदी की जाएगी. पशुओं को मौसम से बचाने के लिए 150 गुणा 30 फीट का टीनशेड 15 लाख रुपए की लागत से बनाया जाएगा. वहीं 3 लाख रुपए से 50 गुणा 5 फीट की पशु खेली और 7 लाख रुपए की लागत से ट्यूबवेल बनाया जाएगा. इस तरह आश्रय स्थल में पानी, छाया और पशुओं की मूलभूत जरूरतों को एक ही परिसर में पूरा करने का प्रयास किया जाएगा.
योजना की खासियत यह भी है कि यहां गोवंश से निकलने वाले संसाधनों को भी उपयोगी बनाने पर जोर रहेगा. 15 लाख रुपए की लागत से 75 गुणा 30 फीट का चारा भंडारण केंद्र बनाया जाएगा. स्वयं सहायता समूहों के लिए 4 लाख रुपए की लागत से कक्ष तैयार होगा, जबकि 9 लाख रुपए से 30 गुणा 75 फीट का वर्मीकम्पोस्ट शेड बनाया जाएगा. इससे गोशाला की गतिविधियों को ग्रामीण महिलाओं और समूहों से जोड़कर अतिरिक्त आय के अवसर पैदा किए जा सकेंगे.
प्रदेश में प्रथम चरण के बाद आने वाले वर्षों में प्रत्येक ग्राम पंचायत तक ऐसे मॉडल आश्रय स्थल पहुंचाने की योजना है. फूटाला और करड़का के चयन से शेखावाटी क्षेत्र में इस मॉडल की शुरुआत हो रही है. पूरी परियोजना की मॉनिटरिंग पंचायती राज विभाग द्वारा वीबी-जीराम-जी अनुभाग, ग्रामीण विकास विभाग तथा जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के माध्यम से की जाएगी. ऐसे में फूटाला का 85 लाख रुपए का यह प्रोजेक्ट केवल एक गोशाला नहीं, बल्कि गो-संरक्षण, चारागाह, जल संरक्षण, हरियाली और ग्रामीण आजीविका को जोड़ने वाला गांव
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August 17, 2026, 22:26 IST



