Sikar Onion Farming | सीकर के मीठे प्याज की बुवाई पर बारिश का ब्रेक

Sikar: सीकर जिले की सबसे बड़ी पहचान बन चुके मीठे प्याज की खेती पर इस बार मौसम की मार पड़ती दिखाई दे रही है. अगस्त महीने में लगातार रुक-रुककर हो रही बारिश ने स्थानीय किसानों के सामने भारी संकट खड़ा कर दिया है. सीजन का एक पखवाड़े से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद प्याज की पौध (नर्सरी) की बुवाई शुरू नहीं हो पाई है. खेतों में जरूरत से ज्यादा नमी और मिट्टी के गीलेपन के कारण किसान न तो खेत तैयार कर पा रहे हैं और न ही बीज डालने का काम शुरू कर पा रहे हैं.
प्याज की अगेती खेती के लिए अगस्त का पहला पखवाड़ा बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. किसान आमतौर पर अगस्त के पहले सप्ताह में ही पौध तैयार करने के लिए बीज की बुवाई कर देते हैं. इसके बाद करीब 50 से 55 दिनों में पौध तैयार होती है, जिसे 15 सितंबर से 15 अक्टूबर के बीच मुख्य खेतों में रोपा जाता है. लेकिन इस बार खेत गीले होने से पूरा फसल चक्र प्रभावित होता दिख रहा है. किसानों को डर है कि यदि क्यारियां तैयार करने के बाद दोबारा बारिश हो गई तो पूरी मेहनत और महंगा बीज बर्बाद हो जाएगा.
किसानों की जुबानी समझिए संकट की गहराई
स्थानीय किसान जवान सिंह बताते हैं कि वे हर साल कई क्विंटल बीज से प्याज की पौध तैयार करते हैं, लेकिन इस बार उनका अधिकांश समय खेतों की जुताई के इंतजार में ही बीत रहा है. वहीं किसान ओमप्रकाश का कहना है कि वे हर साल 30 से 40 किलो बीज की पौध तैयार करते हैं, परंतु अत्यधिक नमी के कारण इस बार अभी तक जुताई भी संभव नहीं हो सकी है. किसानों के लिए यह देरी केवल बुवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लागत, उत्पादन और मंडी के भाव तीनों प्रभावित होने का बड़ा जोखिम बन गया है.
मंडी में देरी से पहुंचेगी फसल, शुरुआती भाव का फायदा छूटने की आशंका
सीकर मंडी के थोक व्यापारियों का मानना है कि बुवाई में देरी का सीधा असर बाजार और किसानों की आय पर पड़ेगा. समय पर तैयार होने वाली फसल से किसानों को शुरुआत में काफी बेहतर दाम मिलते हैं. लेकिन इस बार फसल देरी से फरवरी के अंत तक मंडी में पहुंचेगी. उस समय राजस्थान के अन्य जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी नई प्याज की बंपर आवक शुरू हो जाएगी, जिससे शेखावाटी के प्याज के दाम गिरने और मांग प्रभावित होने की पूरी संभावना है.
सीकर में 22 से 25 हजार हेक्टेयर में प्याज, 500 करोड़ का कारोबार
उद्यान विभाग के अनुसार शेखावाटी क्षेत्र में हर साल लगभग 45 से 50 हजार हेक्टेयर में प्याज उगाया जाता है, जिसमें अकेले सीकर की हिस्सेदारी 22 से 25 हजार हेक्टेयर है. सीकर में प्याज की खेती से सालाना करीब 500 करोड़ रुपये का कारोबार जुड़ा हुआ है. धोद, दांतारामगढ़ और लक्ष्मणगढ़ ब्लॉक के रसीदपुरा, केतली नगर, भैरूंपुरा, आकवा, बठोठ, दादिया और मैलासी सहित 70 से अधिक गांवों में प्याज की बड़े पैमाने पर खेती होती है. उद्यान विभाग के उपनिदेशक मदन लाल जाट का कहना है कि अब सभी किसानों की उम्मीदें पूरी तरह मौसम साफ होने पर टिकी हुई हैं.


