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आज ही शुरू करें यह कारोबार, पहले महीने से ही होने लगेगी 1 लाख की आमदनी, साल भर आते रहेंगे नोट ही नोट

Last Updated:April 09, 2026, 16:34 IST

वर्तमान में बिहार के कई जिलों में बी कीपिंग का कारोबार विस्तृत रूप से किया जाने लगा है. खासकर पश्चिम चम्पारण ज़िले के वन वर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग इसे अपना मुख्य पेशा बनाने में लगे हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि इस व्यवसाय से सलाना 12 लाख रुपए तक की आमदनी संभव हो पाती है. मधुमक्खी पालन को शुरू करने के ठीक एक महीने बाद से शहद की हार्वेस्टिंग का सिलसिला शुरू हो जाता है, जिसे बाजार में एक हजार रुपए किलो की भाव तक बेचा जाता है.

पश्चिम चम्पारण. यदि हम आपसे ये कहें कि महज ढाई लाख रुपए की लागत से एक ऐसे व्यवसाय को शुरू किया जा सकता है, जिसमें पहले महीने से ही एक लाख रुपए की आमदनी आनी शुरू हो जाती है, तो क्या यकीन करेंगे? मानना थोड़ा मुश्किल होगा, लेकिन यह बात बिल्कुल सच है. शुरुआती दौर में ही बेहतर कमाई होने के बाद वर्तमान में बिहार के कई जिलों में इस कारोबार को और विस्तृत रूप से किया जाने लगा है. खासकर पश्चिम चंपारण जिले के वन वर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग इस कारोबार को अपना मुख्य पेशा बनाने लगे हैं. बताते चलें कि यह व्यवसाय कुछ और नहीं, बल्कि मधुमक्खी पालन है.

विशेषज्ञों का मानना है कि मधुमक्खी पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसमें व्यावसायिकों को सिर्फ बॉक्सेस में रह रही मधुमक्खियों के उचित देखभाल की आवश्यकता होती है. फल फूलों से घिरे उचित वातावरण में मधुमक्खियां आजादी से घूमती हैं और वनस्पतियों से रस का पान करती हैं. दिन भर विचरण करने के बाद वो पुनः बॉक्सेस में वापस लौट आती हैं और उसमें मौजूद फ्रेम में बने छत्ते की आकृति वाले कॉम्ब में शहद का निर्माण करती हैं.

50 बॉक्सेस से शुरू करें कारोबारमधुमक्खी पालन को शुरू करने के ठीक एक महीने बाद से शहद की हार्वेस्टिंग का सिलसिला शुरू हो जाता है, जिसे बाजार में एक हजार रुपए किलो की भाव तक बेचा जाता है. गौर वाली बात यह है कि ढाई लाख रुपए की लागत से आप मधुमक्खियों से भरे करीब 50 बॉक्सेस की खरीदारी कर सकते हैं. इन सभी बॉक्सेस से हर महीने 100 से 250 किलो तक शहद की हार्वेस्टिंग की जा सकती है.

8 महीने होती है शहद की हार्वेस्टिंगयहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मधुमक्खी पालन का व्यवसाय साल के कुछ खास महीनों में ही शुरू करना चाहिए. अक्टूबर से लेकर मई तक बॉक्सेस में शहद का निर्माण होता है, जबकि जून से लेकर सितंबर तक बरसात की वजह से मधुमक्खियां बाहर नहीं निकल पाती है जिससे शहद का निर्माण संभव नहीं हो पाता है.

सर्दियों में बढ़ जाता है शहद का उत्पादनजिले की प्रसिद्ध मधुमक्खी पालक सुमन देवी बताती हैं कि सर्दियों में (सरसों के मौसम में) अक्टूबर से लेकर फरवरी तक हर बॉक्स से 5 किलो तक शहद की हार्वेस्टिंग हो जाती है, लेकिन मार्च से मई तक प्रति बॉक्स सिर्फ दो किलो तक ही शहद की हार्वेस्टिंग हो पाती है. बाकी जून से लेकर सितंबर तक हार्वेस्टिंग बंद रहती है और मधुमक्खियों का ध्यान रखना बेहद अनिवार्य हो जाता है.

करीब ढाई लाख रुपए की लागतअब बात लागत और कमाई के आंकड़ों पर कर लेते हैं. सुमन बताती हैं कि मधुमक्खी का एक बॉक्स करीब 4 हजार रुपए में आता है. कमर्शियल रूप से कारोबार के लिए 50 बॉक्सेक्स काफी हैं. इस प्रकार इसे शुरू करने में दो लाख रुपए और साल भर के मेंटेनेंस और बरसात में मधुमक्खियों के आहार पर करीब 50 हजार रुपए का खर्च हो जाता है. यानी कुल मिलाकर ढाई लाख रुपए की लागत.

सालाना 12 लाख रुपए तक का कारोबारसाल के चार महीने छोड़ कर 8 महीनों में करीब 1200 किलो तक शहद की हार्वेस्टिंग हो जाती है, जिसे हज़ार रुपए की दर से बेचने पर 12 लाख और 500 रुपए प्रति किलो की दर से बेचने पर 6 लाख रुपए की आमदनी पक्की हो जाती है. अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मधुमक्खी पालन में समय देना आपको किस कदर लाभ दे सकता है.

About the AuthorMohd Majid

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Bettiah,Pashchim Champaran,Bihar

First Published :

April 09, 2026, 16:34 IST

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