पढ़ाई का वीजा और शूटरों का खौफ! कैसे कनाडा में बिश्नोई गैंग ने बनाया क्रिमिनल नेटवर्क? रिपोर्ट में खुलासा

Last Updated:August 06, 2026, 07:12 IST
Bishnoi Gang Canada: कनाडा में स्टूडेंट वीजा के जरिए बिश्नोई गैंग के कथित क्रिमिनल नेटवर्क के विस्तार को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. CBSA की क्लासिफाइड इंटेलिजेंस रिपोर्ट का हवाला दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार कुछ भारतीय स्टडी और वर्क परमिट धारकों के संगठित अपराध में शामिल होने की जांच की गई है. गोल्डी बराड़ का नाम भी इस नेटवर्क से जोड़ा गया है. रिपोर्ट में 2016 से 2024 के बीच भारतीय स्टूडेंट परमिट लेने वालों से जुड़े क्राइम के आरोपों में भारी बढ़ोतरी का दावा किया गया है. कनाडाई एजेंसियां अब एक्सटॉर्शन और गैंग नेटवर्क की जांच तेज कर रही हैं.
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बिश्नोई गैंग, स्टूडेंट वीजा और कनाडा में कथित क्रिमिनल नेटवर्क का बड़ा खुलासा. (फाइल फोटो)
Bishnoi Gang Canada: कनाडा में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले हजारों भारतीय छात्रों के बीच एक रिपोर्ट ने नया सवाल खड़ा कर दिया है. सवाल सिर्फ स्टूडेंट वीजा का नहीं है. सवाल यह है कि क्या इसी रास्ते का इस्तेमाल कुछ आपराधिक नेटवर्क अपने लोगों को कनाडा पहुंचाने के लिए कर रहे हैं. एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी यानी CBSA की क्लासिफाइड इंटेलिजेंस रिपोर्ट का हवाला दिया गया है. इसमें भारत में जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े ट्रांसनेशनल क्राइम सिंडिकेट की कनाडा में बढ़ती गतिविधियों पर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्टडी और वर्क परमिट के जरिए कनाडा पहुंचे कुछ भारतीय नागरिक कथित तौर पर एक्सटॉर्शन, हिंसा और दूसरे संगठित अपराधों में शामिल पाए गए हैं. यही वजह है कि अब स्टूडेंट वीजा सिस्टम भी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है.
ग्लोबल न्यूज रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे मामले में गोल्डी बराड़ का नाम खास तौर पर सामने आता है. रिपोर्ट के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई का करीबी माने जाने वाला बराड़ 2017 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा पहुंचा था. उसने ब्रिटिश कोलंबिया की थॉम्पसन रिवर्स यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के नाम पर एंट्री लिया था. हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उसने वास्तव में क्लास में हिस्सा लिया या नहीं इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं है. बाद में उस पर बिश्नोई नेटवर्क के कनाडाई ऑपरेशन को मजबूत करने का आरोप लगा. यही मॉडल अब जांच एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है. रिपोर्ट के अनुसार कुछ युवाओं को पहले स्टूडेंट या वर्क परमिट के जरिए कनाडा भेजा गया और फिर कथित तौर पर उन्हें गैंग के लिए फुट सोल्जर की तरह इस्तेमाल किया गया.
भारतीय छात्रों की कनाडा में संख्या पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी थी.
स्टूडेंट वीजा से गैंग के नेटवर्क तक कैसे पहुंची जांच?
इसके बाद सवाल उठता है कि पढ़ाई के लिए आए युवाओं का इस्तेमाल क्राइम में कैसे हुआ. रिपोर्ट के अनुसार CBSA की जांच में स्टडी और वर्क परमिट पर कनाडा पहुंचे कुछ भारतीय नागरिकों के संगठित आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के संकेत मिले. बिश्नोई से जुड़े कथित एक्सटॉर्शन नेटवर्क के बढ़ने को भी इसी जांच से जोड़ा गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा में पुलिस जांच के दौरान दो बातें बार-बार सामने आईं. पहला नाम गोल्डी बराड़ का था. दूसरा कई संदिग्ध स्टूडेंट या वर्क परमिट पर कनाडा पहुंचे थे. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय छात्र क्राइम में शामिल हैं. रिपोर्ट खुद यह बताती है कि आरोपी भारतीय छात्रों की कुल संख्या की तुलना में एक छोटा हिस्सा हैं. चिंता इस बात की है कि ऐसे मामलों में बढ़ोतरी की स्पीड काफी तेज बताई गई है.
2016 से 2024 के बीच अपराधों में 8,800 फीसदी उछाल का दावा
ग्लोबल न्यूज की रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े इस मामले को और गंभीर बनाते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 से 2024 के बीच भारतीय स्टडी परमिट पर कनाडा पहुंचे छात्रों से जुड़े क्राइम के आरोपों में 8,800 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई. 2019 से 2023 के बीच स्टडी परमिट पर कनाडा पहुंचे करीब 4,000 भारतीय नागरिकों पर 17,929 आपराधिक आरोप लगाए गए. इनमें 4,920 आरोप गंभीर या संगठित अपराध से जुड़े बताए गए हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 में अकेले स्टडी वीजा पर आए भारतीयों के खिलाफ 13,000 से ज्यादा आपराधिक आरोप दर्ज किए गए. हालांकि इन आंकड़ों को भारतीय छात्रों की पूरी आबादी से जोड़कर नहीं देखा जा सकता. रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट किया गया है कि आरोपी छात्रों की संख्या कुल भारतीय छात्रों का एक छोटा हिस्सा है. इसके बावजूद कनाडाई एजेंसियों के लिए यह बढ़ता ट्रेंड चिंता का कारण है.
गोल्डी बराड़ से शुरू हुआ नेटवर्क का मॉडल?
रिपोर्ट में गोल्डी बराड़ को कनाडा में बिश्नोई नेटवर्क का सबसे अहम और पुराना सदस्य बताया गया है. वह 2017 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा पहुंचा था. बाद में 2019 में उसने कथित तौर पर रिफ्यूजी स्टेटस का दावा भी किया. बराड़ पर भारत में कई गंभीर मामलों में आरोप हैं. इनमें पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या की साजिश से जुड़े आरोप भी शामिल हैं. हालांकि अलग-अलग मामलों में आरोपों और कानूनी स्थिति को संबंधित जांच व अदालत की प्रक्रिया के संदर्भ में देखना जरूरी है. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इसके बाद भी कई अन्य संदिग्ध स्टूडेंट वीजा के जरिए कनाडा पहुंचे. एडमोंटन के जशंदीप सिंह का उदाहरण दिया गया है. उसे कथित तौर पर नेटवर्क के निचले स्तर का फुट सोल्जर बताया गया है. उसके खिलाफ निर्वासन का आदेश जारी होने की भी बात कही गई है.
फुट सोल्जर बनाकर कराई जाती थी एक्सटॉर्शन और हिंसा?
रिपोर्ट के मुताबिक बिश्नोई नेटवर्क भारत में युवाओं की कथित भर्ती करता है और उन्हें स्टडी या टेंपररी वर्क परमिट के जरिए कनाडा भेजने के बाद वहां इस्तेमाल करता है. आरोप है कि वहां पहुंचने वाले कुछ लोगों से एक्सटॉर्शन कॉल, धमकी, शूटिंग और आगजनी जैसी गतिविधियां कराई गईं. ड्रग्स और हथियारों से जुड़े काम में भी उनके इस्तेमाल का दावा किया गया है.
ब्रिटिश कोलंबिया और एडमोंटन की पुलिस जांच से जुड़े मामलों का भी रिपोर्ट में बताया गया है. एक पुलिस अधिकारी ने अदालत में कथित तौर पर कहा कि जांच में सामने आए लोग या तो टेंपररी फॉरेन वर्कर थे या स्टूडेंट वीजा पर कनाडा आए थे. CBSA ने एक्सटॉर्शन से जुड़े सैकड़ों मामलों की जांच शुरू की है. कई रिमूवल ऑर्डर जारी होने और विदेशी नागरिकों को कनाडा से बाहर भेजे जाने की भी जानकारी रिपोर्ट में दी गई है.
कनाडा की इमिग्रेशन स्क्रीनिंग पर उठे सवाल
यह पूरा मामला सिर्फ बिश्नोई गैंग तक सीमित नहीं है. इससे कनाडा की टेंपररी इमिग्रेशन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि स्टडी और वर्क परमिट जैसी इमिग्रेशन स्ट्रीम का क्राइम ग्रुप्स द्वारा दुरुपयोग कोई बिल्कुल नई समस्या नहीं है. भारतीय छात्रों की कनाडा में संख्या पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी थी. 2023 में करीब 2.78 लाख भारतीय छात्रों को स्टडी परमिट जारी किए गए थे. बाद में कनाडा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए नियमों में बदलाव किए. रिपोर्ट के मुताबिक FINTRAC जैसी एजेंसियों ने भी ऐसे मामलों पर चिंता जताई है, जहां कनाडा में पहले से रह रहे युवाओं को कथित तौर पर मनी म्यूल, एनफोर्सर या फुट सोल्जर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.
CBSA के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
CBSA की रिपोर्ट में कथित तौर पर कहा गया है कि बिश्नोई से जुड़े एक्सटॉर्शन नेटवर्क और स्टूडेंट या वर्क परमिट धारकों की भागीदारी एजेंसी के ऑपरेशन के लिए गंभीर चिंता है. असल चुनौती यह है कि वैध इमिग्रेशन सिस्टम के जरिए आने वाले लोगों और अपराध के लिए भेजे जा रहे कथित लोगों के बीच फर्क कैसे किया जाए. कनाडा की सुरक्षा एजेंसियां अब ऐसे मामलों में ज्यादा सख्ती बरत रही हैं. जांच का फोकस केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई पर नहीं है. यह भी पता लगाया जा रहा है कि संदिग्धों को कनाडा पहुंचाने में किसने मदद की, दस्तावेज कैसे तैयार हुए और वहां पहुंचने के बाद उन्हें किस नेटवर्क ने अपने साथ जोड़ा.
भारत-कनाडा रिश्तों पर भी पड़ेगा असर
इस रिपोर्ट का असर भारत और कनाडा के रिश्तों पर भी पड़ सकता है. दोनों देशों के बीच पहले से ही संगठित अपराध, खालिस्तानी गतिविधियों और प्रत्यर्पण जैसे मुद्दों को लेकर तनाव रहा है. अब अगर स्टूडेंट वीजा के जरिए अपराधी नेटवर्क के विस्तार के आरोपों की जांच आगे बढ़ती है तो इमिग्रेशन सिस्टम दोनों देशों के बीच बातचीत का एक और बड़ा मुद्दा बन सकता है. हालांकि इस पूरे मामले में एक बात साफ रखना जरूरी है. कनाडा में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों को किसी गैंग या अपराध से जोड़ना सही नहीं होगा. रिपोर्ट में भी ऐसे आरोपियों को कुल भारतीय छात्र समुदाय का छोटा हिस्सा बताया गया है. असली सवाल उन कथित नेटवर्कों का है, जो युवाओं की कमजोर आर्थिक स्थिति या इमिग्रेशन सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर उन्हें अपराध में धकेलने की कोशिश करते हैं.
रिपोर्ट में सामने आया सबसे बड़ा सवाल
ग्लोबल न्यूज की रिपोर्ट ने एक ऐसी तस्वीर सामने रखी है जिसमें स्टूडेंट वीजा, संगठित अपराध और अंतरराष्ट्रीय गैंग नेटवर्क एक-दूसरे से जुड़ते नजर आते हैं. अगर जांच में ये आरोप पुष्ट होते हैं तो कनाडा के लिए चुनौती सिर्फ गैंगस्टरों से निपटने की नहीं होगी. उसे अपने इमिग्रेशन सिस्टम की स्क्रीनिंग और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा. वहीं भारत के लिए चुनौती यह होगी कि विदेशों में बैठे कथित अपराधी नेटवर्क की फंडिंग, भर्ती और ऑपरेशनल चेन को कैसे तोड़ा जाए.
About the AuthorSumit KumarSenior Sub Editor
सुमित कुमार हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…
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August 06, 2026, 07:09 IST



