Su-30 MKI में लगेंगे ‘रावण के बाजू’, लाहौर-कराची संग पूरा पाकिस्तान एक ही वार में होगा स्वाहा, चीनी J-20 का गेम भी एंड

भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस पहले ही दुनिया के सबसे घातक हथियारों में गिनी जाती है. अब इसका अगला और कहीं ज्यादा एडवांस अवतार ब्रह्मोस-एनजी (BrahMos-Next Generation) भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा करने जा रहा है. इस नई ब्रह्मोस-एनजी के हल्के वजन की वजह से भारतीय वायुसेना का सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI) लड़ाकू विमान अब एक साथ पांच ब्रह्मोस मिसाइलें लेकर उड़ान भर सकेगा. अगर यह क्षमता पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाती है तो भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक पावर कई गुना बढ़ जाएगी. अब तक जहां एक Su-30MKI बस एक ही ब्रह्मोस मिसाइल लेकर मिशन पर जाता था, वहीं भविष्य में वही विमान एक ही उड़ान में पांच अलग-अलग या एक ही लक्ष्य पर पांच सुपरसोनिक मिसाइलें दाग सकेगा. इसका सीधा मतलब है कि दुश्मन के एयरबेस, कमांड सेंटर, रडार स्टेशन, मिसाइल ठिकाने और नौसैनिक जहाज एक साथ भारतीय निशाने पर होंगे. रावण के बाजू जैसे मजबूत ये पांच ब्रह्मोस पाकिस्तान के कराची, लाहौर, इस्लामाबाद, रावलपिंडी और पेशावर जैसे बड़े शहरों को एक ही झटके में साफ करने के लिए काफी होंगे.
क्या है ये ब्रह्मोस-एनजी?
ब्रह्मोस-एनजी मौजूदा ब्रह्मोस मिसाइल का अगली पीढ़ी का संस्करण है. इसे पहले से छोटा, हल्का और अधिक आधुनिक बनाया जा रहा है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी सुपरसोनिक रफ्तार और घातक क्षमता लगभग पहले जैसी ही बनी रहेगी.
मौजूदा एयर-लॉन्च ब्रह्मोस-ए का वजन लगभग 2.5 टन होता है. इतनी भारी मिसाइल को केवल Su-30MKI के सबसे मजबूत सेंटरलाइन हार्डप्वाइंट पर ही लगाया जा सकता है. इसके लिए विमान में विशेष स्ट्रक्चरल बदलाव भी किए गए थे.
इसके उलट ब्रह्मोस-एनजी का वजन करीब 1.2 टन होगा. यानी इस बेहद घातक मिसाइल का वजन लगभग आधा हो जाएगा. यही बदलाव भारतीय वायुसेना के लिए गेमचेंजर साबित होने वाला है.
कैसे एक साथ पांच मिसाइलें ले जाएगा Su-30MKI?
Su-30MKI भारतीय वायुसेना का सबसे शक्तिशाली हेवी मल्टीरोल फाइटर जेट है. इसमें कुल 12 हार्डप्वाइंट मौजूद हैं, जिन्हें खास कॉन्फिगरेशन में 14 तक बढ़ाया जा सकता है. हालांकि सभी हार्डप्वाइंट भारी हथियार ले जाने के लिए नहीं बने हैं. सबसे मजबूत सेंटरलाइन पायलन के अलावा इसके दोनों इनबोर्ड विंग पायलन भी भारी हथियार उठाने में सक्षम हैं. BrahMos-NG के हल्के होने के कारण इन्हीं हार्डप्वाइंट्स पर विशेष लॉन्चर और ड्यूल-इजेक्टर रैक लगाए जा सकते हैं.
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में एक Su-30MKI पर सेंटरलाइन के साथ दोनों इनबोर्ड विंग्स पर कई BrahMos-NG मिसाइलें लगाई जा सकेंगी, जिससे कुल संख्या पांच तक पहुंच सकती है. इससे विमान का संतुलन भी बना रहेगा और उसकी उड़ान क्षमता पर भी ज्यादा असर नहीं पड़ेगा.
पाकिस्तान के लिए क्यों बढ़ेगी मुश्किल?
अब तक पाकिस्तान की रणनीति यह रही है कि अगर कोई भारतीय लड़ाकू विमान ब्रह्मोस लेकर आता है तो उसे केवल एक बड़े खतरे का सामना करना होगा. लेकिन भविष्य में एक ही Su-30MKI पांच सुपरसोनिक मिसाइलें लेकर पहुंचेगा.
इसका मतलब है कि एक ही मिशन में पाकिस्तान के कई एयरबेस, रडार स्टेशन, कमांड पोस्ट, हथियार डिपो या नौसैनिक ठिकानों पर एक साथ हमला किया जा सकता है.
अगर किसी बड़े सैन्य अभियान की स्थिति बनती है तो भारतीय वायुसेना कम विमानों के जरिये कहीं ज्यादा बड़े इलाके में तबाही मचा सकती है. यही वजह है कि रक्षा विशेषज्ञ इसे भारतीय एयर स्ट्राइक क्षमता में सबसे बड़े बदलावों में से एक मान रहे हैं.
लाहौर से कराची तक कई टारगेट एक साथ
BrahMos-NG का सबसे बड़ा फायदा इसकी मल्टी-टारगेट स्ट्राइक क्षमता होगी. पहले जहां एक विमान केवल एक महत्वपूर्ण लक्ष्य को नष्ट कर सकता था, वहीं अब वही विमान एक ही उड़ान में कई अलग-अलग सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकेगा.
जरूरत पड़ने पर एक ही Su-30MKI अलग-अलग दिशाओं में मौजूद कई लक्ष्यों पर मिसाइलें दाग सकता है या फिर किसी अत्यधिक सुरक्षित सैन्य ठिकाने पर एक साथ कई मिसाइलें छोड़कर उसके एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह ओवरलोड कर सकता है.
चीन के J-20 के लिए भी नई चुनौती
पाकिस्तान लगातार चीन से आधुनिक हथियार हासिल कर रहा है. चीन का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर J-20 उसकी सबसे बड़ी सैन्य ताकतों में गिना जाता है. हालांकि BrahMos-NG की तैनाती के बाद तस्वीर कुछ बदल सकती है.
इसकी वजह यह है कि Su-30MKI को दुश्मन के एयर डिफेंस क्षेत्र में गहराई तक घुसने की जरूरत नहीं होगी. वह काफी दूरी से ही सुपरसोनिक BrahMos-NG लॉन्च कर सकेगा. इससे J-20 जैसे स्टील्थ विमान की मौजूदगी का प्रभाव सीमित हो सकता है, क्योंकि हमला करने वाला विमान दुश्मन की पहुंच से बाहर रहकर भी स्ट्राइक करने में सक्षम होगा.
नौसेना के लिए भी बनेगा बड़ा हथियार
BrahMos-NG सिर्फ वायुसेना तक सीमित नहीं रहेगा. इसका छोटा आकार और हल्का वजन भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और भविष्य के कई लड़ाकू विमानों पर भी इसे लगाने की संभावना बढ़ाता है. इससे भारतीय सेनाओं के पास एक ऐसा कॉमन सुपरसोनिक हथियार होगा जिसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म से इस्तेमाल किया जा सकेगा.
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि BrahMos-NG केवल एक नई मिसाइल नहीं बल्कि भारत की भविष्य की एयर स्ट्राइक रणनीति का आधार बनने जा रही है. हल्का वजन, ज्यादा मिसाइल क्षमता, कई लक्ष्यों पर एक साथ हमला करने की क्षमता और लंबी दूरी से सटीक प्रहार जैसी खूबियां इसे भारतीय वायुसेना के लिए बेहद अहम बना देंगी.



