अब साफ-सुथरा दिखेगा नागौर! 51 टन कचरा रोज खत्म करने वाला आधुनिक प्लांट तैयार, शहरवासियों को जल्द मिलेगी राहत

Last Updated:May 14, 2026, 07:20 IST
Nagaur Garbage Disposal Plant: नागौर शहर के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. शहर में स्थापित 51 टन क्षमता वाले कचरा निस्तारण प्लांट का सफल ट्रायल पूरा हो गया है. इस प्लांट के शुरू होने से शहर की सफाई व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा. लंबे समय से कचरे के ढेर, बदबू और प्रदूषण की समस्या से परेशान लोगों को अब काफी राहत मिलने की उम्मीद है. नगर परिषद की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा. इससे ना केवल शहर स्वच्छ बनेगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी.
नागौर शहर में लंबे समय से बनी कचरा निस्तारण की समस्या के समाधान की दिशा में बड़ी पहल हुई है. बालवा रोड स्थित डंपिंग यार्ड में बनाए गए नए ठोस कचरा निस्तारण प्लांट का सफल ट्रायल शुरू कर दिया गया है. स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत तैयार इस प्लांट से शहर के 60 वार्डों से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि अगले एक माह में प्लांट पूरी क्षमता के साथ संचालन शुरू कर देगा, जिससे शहरवासियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
डंपिंग यार्ड में पिछले तीन वर्षों से कचरे का निस्तारण लगभग बंद पड़ा था. इस दौरान यहां अक्सर आग लगने की घटनाएं सामने आती थीं, जिससे जहरीला धुआं और बदबू पूरे क्षेत्र में फैल जाती थी. इसका सबसे अधिक असर आसपास स्थित मॉडल स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, कृषि महाविद्यालय और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के लोगों पर पड़ रहा था. विद्यार्थियों और स्थानीय निवासियों को लंबे समय से गंदगी और प्रदूषण की समस्या का सामना करना पड़ रहा था.
नगर परिषद क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग 50 टन कचरा निकलता है. अब तक इस कचरे के निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बालवा रोड स्थित डंपिंग यार्ड में कचरे का विशाल ढेर जमा हो गया था. करीब 12 बीघा क्षेत्र में फैले इस लिगेसी वेस्ट से आसपास का वातावरण लगातार प्रदूषित हो रहा था. नए प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 51 टन कचरे के निस्तारण की है, जिससे दिनभर का पूरा कचरा उसी दिन प्रोसेस किया जा सकेगा.
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शहर में बढ़ती आबादी और रोजाना निकलने वाले कचरे को देखते हुए यह प्लांट नागौर के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है. यदि यह व्यवस्था सफल रहती है तो आने वाले समय में शहर की सफाई व्यवस्था और बेहतर हो सकेगी. स्वच्छ भारत मिशन के तहत शुरू हुई यह पहल न केवल शहर को स्वच्छ बनाएगी बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम कदम साबित होगी.
एक्सईएन हनुमान कापड़ी के अनुसार प्लांट करीब डेढ़ बीघा जमीन पर अत्याधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया है. ट्रायल के दौरान मशीनों के माध्यम से गीले और सूखे कचरे को अलग करने की प्रक्रिया शुरू की गई. इसके साथ ही कचरे में मौजूद रेत, कंकड़ और पत्थरों को भी पृथक किया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि निदेशालय के निर्देशों के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक पद्धति से संचालित होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी.
नए प्लांट के शुरू होने से अब क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद जगी है. नगर परिषद का मानना है कि नियमित कचरा प्रोसेसिंग होने से डंपिंग यार्ड में कचरे के पहाड़ बनने की समस्या धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी. साथ ही आग लगने की घटनाओं में भी कमी आएगी. इससे आसपास रहने वाले लोगों को जहरीले धुएं और दुर्गंध से राहत मिलेगी तथा पर्यावरण भी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित रहेगा.



