World Lung Day: सितंबर खत्म होते ही बढ़ने लगा दिल्ली में प्रदूषण, डॉक्टर ने दी बच्चों-बुजुर्गों के लिए खास सलाह

Last Updated:September 24, 2026, 12:49 IST
World Lung Day 2026: दिल्ली में सितंबर खत्म होने के साथ ही प्रदूषण का असर बढ़ने लगा है. बीते दो दिनों में AQI करीब 224 तक पहुंच गया है. डॉक्टरों के अनुसार, सितंबर से जनवरी तक दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है. इसका असर खास तौर पर अस्थमा, टीबी और COPD जैसी सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ सकता है. बच्चों और बुजुर्गों को भी ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. डॉक्टरों ने प्रदूषण बढ़ने पर बाहर निकलने, खेलने, टहलने और एक्सरसाइज से बचने की सलाह दी है. PM2.5 और PM10 जैसे महीन कण फेफड़ों को प्रभावित कर सकते हैं.
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में सितंबर का महीना खत्म होने वाला है. इसके साथ ही दिल्ली की हवा में प्रदूषण और धुंध का असर भी नजर आने लगा है. बीते दो दिनों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) करीब 224 तक पहुंच गया है. प्रदूषण का बढ़ता स्तर लोगों की सेहत के लिए चिंता बढ़ा रहा है. 25 सितंबर को वर्ल्ड लंग डे मनाया जाएगा. इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली के मॉडल टाउन स्थित यथार्थ हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी (पल्मोनरी मेडिसिन) विभाग में कंसल्टेंट डॉ. दिव्येंदु शर्मा और यथार्थ हॉस्पिटल, नोएडा के पल्मोनोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अरुणाचलम एम से खास बातचीत की गई.
सितंबर से जनवरी तक प्रदूषणडॉक्टरों ने बताया कि दिल्ली में हर साल सितंबर से जनवरी तक प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है. इस दौरान कई बार एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 से 500 तक पहुंच जाता है. फिलहाल सितंबर में AQI करीब 224 से 230 के बीच बना हुआ है. यह स्तर भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है. डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे प्रदूषण का असर खास तौर पर उन लोगों पर ज्यादा पड़ता है, जिन्हें पहले से सांस से जुड़ी बीमारी है. अस्थमा, टीबी और क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) से पीड़ित लोगों को अभी से सावधान रहने की जरूरत है.
बच्चे और बुजुर्ग रहें ज्यादा सावधानडॉ. दिव्येंदु शर्मा ने कहा कि खराब हवा और प्रदूषण का असर बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा हो सकता है. इसलिए दोनों वर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. अगर प्रदूषण ज्यादा हो तो बच्चों और बुजुर्गों को बाहर निकलने से बचना चाहिए. जरूरत पड़ने पर बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए. घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने की सलाह दी गई है. संभव हो तो घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
प्रदूषण बढ़ने के दौरान क्या न करेंडॉक्टरों के मुताबिक, प्रदूषित हवा फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है. इससे सांस लेने में परेशानी और सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है. कुछ मामलों में यह समस्या गंभीर भी हो सकती है. ऐसे में प्रदूषण बढ़ने के दौरान बाहर खेलना, टहलना और एक्सरसाइज करना भी कम या बंद कर देना चाहिए.
फेफड़ों तक पहुंचते हैं प्रदूषण के कणडॉ. अरुणाचलम एम ने बताया कि प्रदूषित हवा में लगातार सांस लेने से फेफड़ों पर असर पड़ सकता है. खासकर PM2.5 और PM10 जैसे महीन कण चिंता का कारण बन सकते हैं. सांस के साथ ये कण शरीर के अंदर पहुंच सकते हैं. ऐसी हवा में रहने से गले में खराश और खांसी हो सकती है. सीने में जलन या भारीपन महसूस हो सकता है. सांस फूलने की समस्या भी हो सकती है. आंखों और नाक में जलन भी हो सकती है.
फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावितइसके साथ ही, लगातार प्रदूषण के संपर्क में रहने से फेफड़ों में सूजन आ सकती है. इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है. अस्थमा या एलर्जी से परेशान लोगों की समस्या बढ़ सकती है. डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है.
About the AuthorAmita kishor
न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…
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September 24, 2026, 12:49 IST



