Rajasthan

राजस्थान के पाली में छिपे हैं महादेव के 5 रहस्यमयी धाम, हर मंदिर की कहानी है अनोखी

Last Updated:August 20, 2026, 08:30 IST

Rajasthan Mysterious Temples: राजस्थान के पाली जिले में 5 अति प्राचीन और रहस्यमयी शिव मंदिर स्थित हैं, जिनका इतिहास पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है. इनमें पांडवकालीन निम्बो का नाथ और जवाई बांध के डूब क्षेत्र में जलमग्न होने वाला भद्रेश्वर महादेव मंदिर शामिल है. इसके अलावा गुजरात की सोलंकी शैली में बना सोमनाथ मंदिर, अरावली की प्राकृतिक गुफा में बसा परशुराम महादेव मंदिर और मारवाड़ का प्रसिद्ध सोनाना खेतलाजी धाम धार्मिक आस्था व ऐतिहासिक वास्तुकला का अद्भुत प्रतीक हैं.

निम्बो का नाथ सांडेराव और फालना के नजदीक स्थित भगवान शिव का एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है. इस मंदिर का पौराणिक महत्व महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पांडवों की माता कुंती ने अपने अज्ञातवास के दौरान इसी स्थान पर शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव की आराधना की थी. मंदिर परिसर में विशाल पीपल और नीम के वृक्षों की घनी छांव और शांत वातावरण यहां आने वाले भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है. प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का संगम होने के कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है.

भद्रेश्वर महादेव मंदिर दूदनी स्थित जवाई बांध के कैचमेंट क्षेत्र में मौजूद 11वीं सदी का ऐतिहासिक और पांडवकालीन मंदिर माना जाता है. इस धाम की सबसे अनोखी खासियत यह है कि मानसून के दौरान जब जवाई बांध का जलस्तर बढ़ता है, तो पूरा मंदिर परिसर और शिवलिंग पानी में जलमग्न हो जाते हैं. वर्ष के कुछ महीने मंदिर के पानी के भीतर रहने से ऐसा अद्भुत दृश्य दिखाई देता है, मानो जलदेवता स्वयं भगवान महादेव का निरंतर अभिषेक कर रहे हों. जलस्तर कम होने और पानी उतरने के बाद मंदिर दोबारा पानी से बाहर दिखाई देने लगता है और श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन कर सकते हैं. प्राकृतिक परिवेश और अनोखी धार्मिक मान्यता के कारण भद्रेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र के प्रमुख आस्था स्थलों में शामिल है.

सोमनाथ मंदिर पाली शहर के मुख्य बाजार क्षेत्र में स्थित अपनी बेजोड़ वास्तुकला और उत्कृष्ट शिल्प कला के लिए प्रसिद्ध ऐतिहासिक शिवालय है. मान्यता के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 1209 में गुजरात के सोलंकी राजवंश के राजा कुमारपाल ने करवाया था. इतिहास के अनुसार, राजा कुमारपाल सौराष्ट्र गुजरात से मूल शिवलिंग लाकर यहां स्थापित करवाया था. मंदिर के शिखरों और स्तंभों पर की गई बारीक नक्काशी सोलंकी कालीन स्थापत्य शैली की शानदार झलक प्रस्तुत करती है. धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक और वास्तुकला की दृष्टि से भी यह मंदिर पाली की महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है. मंदिर की कलात्मक संरचना और प्राचीन शैली यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है.

Add as Preferred Source on Google

परशुराम महादेव मंदिर अरावली की पहाड़ियों के बीच प्राकृतिक गुफा में स्थित एक अति प्राचीन और रहस्यमयी धाम है. इसे राजस्थान का अमरनाथ भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम ने इसी गुफा में कठोर तपस्या कर भगवान शिव से दिव्य फरसा यानी परशु प्राप्त किया था. गुफा के अंदर प्राकृतिक रूप से निर्मित शिवलिंग विराजमान है. मान्यता है कि शिवलिंग के ठीक ऊपर स्थित पहाड़ी से लगातार जल की बूंदें गिरती रहती हैं, जिससे भगवान शिव का प्राकृतिक अभिषेक होता है. अरावली की पहाड़ियों, प्राकृतिक गुफा और धार्मिक मान्यताओं का अनोखा संगम इस धाम को श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बनाता है.

सोनाना खेतलाजी मंदिर पाली जिले के देसूरी क्षेत्र में स्थित मारवाड़ के लोक देवता खेतलाजी के प्रसिद्ध और सिद्ध पीठों में से एक माना जाता है. खेतलाजी को भैरव रूप में पूजने की परंपरा है और यह मंदिर राजस्थान के प्रमुख आस्था स्थलों में शामिल है. मंदिर विशेष रूप से बच्चों के मुंडन संस्कार और नवविवाहित जोड़ों की जात-जड़ूला देने की परंपरा के लिए प्रसिद्ध है. हर वर्ष होली के बाद यहां आयोजित होने वाले लक्की मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना लेकर मंदिर में दर्शन करते हैं और मनोकामना पूरी होने पर ध्वजा चढ़ाकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं. धार्मिक परंपराओं और लोक आस्था से जुड़ा होने के कारण सोनाना खेतलाजी मंदिर पाली जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष स्थान रखता है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|First Published :

August 20, 2026, 08:30 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj