क्या आप भी करती हैं 9 से 5 की नौकरी? डॉक्टर की ये चेतावनी कर देगी हैरान, हड्डियों की कमजोरी के 5 लक्षण न करें इग्नोर

Desk Jobs Side Effect : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नौकरीपेशा महिलाओं के लिए सुबह घर के कामों से लेकर ऑफिस की डेडलाइन तक संभालना एक रोजमर्रा की रूटीन बन चुका है. डेस्क जॉब्स ने हमें लैपटॉप और मीटिंग रूम तक सीमित कर दिया है, जहाँ उठने-बैठने या चलने-फिरने का ज्यादा मौका ही नहीं मिलता. हम सोचते हैं कि कभी-कभार होने वाला पीठ दर्द काम की थकान है, लेकिन यह समस्या अंदर ही अंदर हमारी सेहत को खोखला कर रही है.
हाल ही में इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, दिल्ली के जाने-माने ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. हर्ष भर्गव ने कामकाजी महिलाओं के लिए एक चौंकाने वाली चेतावनी जारी की है. उनका कहना है कि कई कामकाजी महिलाओं के लिए शरीर का लगातार दर्द होना कमजोर होती हड्डियों का एक शुरुआती और साइलेंट संकेत हो सकता है.
अब सिर्फ बुजुर्ग महिलाएं ही नहीं, बल्कि 20 और 30 साल की कम उम्र की युवतियां भी इस समस्या की चपेट में आ रही हैं, जिसे डॉक्टर ‘9-to-5 इफेक्ट’ कहते हैं.
क्यों कमजोर हो रही हैं हड्डियां?एचटी की एक खबर के मुताबिक, आमतौर पर महिलाओं में हड्डियों की कमजोरी को उम्र और मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) से जोड़कर देखा जाता है. महिलाओं के शरीर में ‘एस्ट्रोजन’ (Oestrogen) हार्मोन हड्डियों की सेहत की रक्षा करने में अहम भूमिका निभाता है. लेकिन मेनोपॉज के बाद जब इस हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, तो हड्डियां कमजोर होने लगती हैं.
लेकिन सच यह है कि अब सिर्फ बुजुर्ग महिलाएं ही नहीं, बल्कि 20 और 30 साल की कम उम्र की युवतियां भी इस समस्या की चपेट में आ रही हैं, जिसे डॉक्टर ‘9-to-5 इफेक्ट’ कहते हैं.
दरअसल, लगातार घंटों तक एक ही जगह बैठे रहने से हड्डियों को जरूरी मूवमेंट नहीं मिल पाता. व्यस्त दिनचर्या के कारण शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिलती, जिससे कैल्शियम सोखने में दिक्कत आती है. इसके अलावा, जल्दबाजी में डेस्क पर ही कुछ भी खा लेना और दिनभर में बहुत ज्यादा चाय या कॉफी का सेवन करना शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को और कम कर देता है.
हड्डियों की कमजोरी की 5 संकेत-
हड्डियों की कमजोरी बहुत धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए शुरुआती लक्षणों को पहचानना मुश्किल हो जाता है. डॉ. भर्गव के मुताबिक इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
पीठ या घुटनों में लगातार दर्द: बिना किसी भारी काम के भी जोड़ों और पीठ में हमेशा दर्द बने रहना.
बिना वजह थकान महसूस होना: शरीर में हमेशा ऊर्जा की कमी और कमजोरी महसूस होना.
झुका हुआ पोश्चर: उठने-बैठने के दौरान रीढ़ की हड्डी का झुक जाना.
लंबाई में कमी आना: उम्र बढ़ने के साथ या धीरे-धीरे शरीर की लंबाई में हल्का अंतर महसूस होना.
मसूड़े पीछे खिसकना या कमजोर नाखून: नाखूनों का बार-बार टूटना और मसूड़ों में कमजोरी आना भी इसका एक संकेत हो सकता है.
कैसे करें बचाव और सुधार?चूंकि हड्डियों का सीधा संबंध हमारे हॉर्मोन्स से है, इसलिए अनियमित पीरियड्स या समय से पहले मेनोपॉज होने पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. अगर परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास रहा है, तो डॉक्टर से मिलकर बोन डेंसिटी स्कैन (Bone Density Scan) जरूर करवाएं. अपनी लाइफस्टाइल में कुछ छोटे बदलाव करके आप अपनी हड्डियों को मजबूत रख सकती हैं:
रोज थोड़ी देर धूप में जरूर बैठें. हर एक घंटे के बाद अपनी सीट से उठकर थोड़ा टहलें.
अपने हर मील में प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर चीजें शामिल करें.
नियमित रूप से वॉक करें, सीढ़ियों का इस्तेमाल करें या हल्की-फुल्की एक्सरसाइज को अपनी रूटीन का हिस्सा बनाएं.
कैल्शियम और विटामिन डी हड्डियों के इलाज में मुख्य भूमिका निभाते हैं.
अपनी दिनचर्या में इन्हें कैसे शामिल करना है, इस बारे में किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
अपनी सेहत को प्राथमिकता दें, क्योंकि स्वस्थ शरीर ही आपकी असली पूंजी है!
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी और सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं और इन्हें किसी पेशेवर चिकित्सा सलाह, डॉक्टर की जाँच या इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. हड्डियों से जुड़ी किसी भी समस्या, लगातार दर्द या स्वास्थ्य संबंधी लक्षण महसूस होने पर हमेशा किसी योग्य ऑर्थोपेडिक सर्जन या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें.



