प्रिया की शादी में किन्नर समाज ने दिया मायरा, मिसाल बनी इंसानियत

Last Updated:December 11, 2025, 18:17 IST
बीकानेर की गोपेश्वर बस्ती में आज कुछ अलग ही रौनक थी, शादी की खुशियों में जो खलल आमतौर पर दूरी या समाजिक भेदभाव से आता है, वह किन्नर समाज की इंसानियत ने मिटा दिया. प्रिया की शादी में मायरा भरने वाला परिवार नहीं था, लेकिन किन्नर मुस्कान बाई ने अपने पूरे समूह के साथ ढोलक और मंगलगीतों के बीच बेटी को कपड़े, गहने और नगदी देकर मायरा भरा. गीता देवी की आंखों में खुशी और लोगों के दिलों में अपनापन साफ दिखाई दे रहा था.
बीकानेर. गोपेश्वर बस्ती की तंग गलियों में आज कुछ अलग ही रौनक थी, वजह सिर्फ एक बेटी की खुशी में समाज का एक ऐसा वर्ग शामिल होना था, जिसे अक्सर लोग हाशिए पर खड़ा कर देते हैं. लेकिन आज वही वर्ग इंसानियत का सबसे उजला चेहरा बनकर सामने आया, हम बात कर रहे हैं बीकानेर की प्रिया की, जिसकी कल शादी है, लेकिन उसके पिता, भाई और ननिहाल पक्ष में कोई नहीं है. ऐसे में मायरा कौन भरेगा, यह चिंता उसकी मां गीता देवी की रातों की नींद उड़ाए हुए थी. समाज के कई दरवाजे खटखटाने के बावजूद कोई मदद सामने नहीं आई, लेकिन कहते हैं मदद वहीं से मिलती है, जहां से उम्मीद न हो, और हुआ भी कुछ ऐसा ही. इस मदद में समाज का अहम वर्ग आगे बढ़ा.
जब किन्नर मुस्कान बाई को इस परिवार की स्थिति का पता चला, उन्होंने बिना एक पल गंवाए कहा, “बेटी की शादी है, मायरा तो हम ही भरेंगे.” यह सिर्फ एक वादा नहीं, बल्कि भावनाओं का सबसे सुंदर स्पर्श था. शादी वाले घर में आज सुबह किन्नर मुस्कान बाई अपने पूरे समूह के साथ ढोलक की थाप और मंगलगीतों के बीच पहुंची. किन्नर मुस्कान बाई अन्य किन्नरों के साथ मायरा लेकर विवाह स्थल पर पहुंची और कपड़े, गहने और नगदी में बेटी को सौंपकर मायरा भरा.
रिश्ते हमारी सोच से नहीं, बनते है दिल की सच्चाई से
हाथों में कपड़े, गहने और नगदी और चेहरे पर वही अपनापन, जो मायरा लेकर आने वाले रिश्तेदारों में होता है. जिस घर में मायरे की चिंता थी, आज उसी घर में उत्साह और आशीर्वाद की बरसात थी. लोग दूर-दूर से इस अनोखे मायरे को देखने पहुंचे, कई की आंखें नम थी. गीता देवी ने भर्राई आवाज़ में कहा, “भगवान ने हमारे घर रिश्ते भेज दिए, ये लोग सिर्फ किन्नर नहीं, हमारे लिए फरिश्ते हैं.” किन्नर समाज की इस पहल ने एक बार फिर साबित किया कि रिश्ते हमारी सोच से नहीं, हमारे कर्मों और दिल की सच्चाई से बनते हैं. आज प्रिया की शादी का मायरा सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि इंसानियत की एक मिसाल बन गया. मायरे के मंगलगीतों की गूंज आने वाले सालों तक इस बस्ती में सुनाई देती रहेगी.
About the AuthorMonali Paul
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
Location :
Bikaner,Rajasthan
First Published :
December 11, 2025, 18:17 IST
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बीकानेर में प्रिया की शादी में किन्नर समाज ने दिया मायरा, मिसाल बनी इंसानियत!



