हादसों में हाथ गंवाने वालों को मिली नई उम्मीद, इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम हाथ से अब खाना खाने जैसे काम होंगे आसान

Last Updated:September 08, 2026, 15:56 IST
Bikaner Hindi News: रोटरी क्लब बीकानेर के सचिव रोटेरियन कुनाल कोचर ने बताया कि शिविर में उन लोगों को इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम हाथ लगाए गए हैं, जिनके हाथ हादसे या किसी अन्य कारण से कट गए थे. उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण और अभ्यास के बाद लाभार्थी इस कृत्रिम हाथ की मदद से खाना खाने, सब्जी काटने और अन्य दैनिक कार्य कर सकते हैं.
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बीकानेर. किसी ने बचपन में हुए हादसे में अपना हाथ गंवा दिया तो किसी की जिंदगी कुछ ही सेकंड में पूरी तरह बदल गई. वर्षों से दूसरों पर निर्भर रहने को मजबूर ऐसे दिव्यांगजनों के चेहरों पर बीकानेर में आयोजित निःशुल्क इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम हाथ शिविर ने नई मुस्कान बिखेर दी. शिविर में नोखा निवासी 27 वर्षीय बलवीर सिंह और हनुमानगढ़ जिले की 27 वर्षीय किरना सहित करीब 180 जरूरतमंदों को आधुनिक कृत्रिम हाथ लगाए गए.
नोखा निवासी बलवीर सिंह के साथ करीब 19 वर्ष पहले दर्दनाक हादसा हुआ था. उस समय वह बकरियां चराने गया हुआ था. खेजड़ी के पेड़ की टहनियां काटते समय उसका बायां हाथ दुर्घटना का शिकार हो गया. चोट इतनी गंभीर थी कि चिकित्सकों को उसका पूरा हाथ काटना पड़ा. छोटी उम्र में हाथ गंवाने के बाद बलवीर को दैनिक जीवन के कई कामों में परेशानियों का सामना करना पड़ा. अब इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम हाथ लगने के बाद बलवीर को एक बार फिर अपने काम स्वयं करने की उम्मीद जगी है. कृत्रिम हाथ लगाने के बाद उसने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब वह पहले से बेहतर महसूस कर रहा है.
रोजमर्रा के काम स्वयं करने की नई उम्मीद मिली इसी तरह हनुमानगढ़ जिले की 27 वर्षीय किरना के दोनों हाथ एक हादसे में कट गए थे. गत 8 जुलाई को पशुओं के लिए चारा काटने वाली मशीन की चपेट में आने से उसके दोनों हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए. इसके बाद चिकित्सकों को दोनों हाथों का कुछ हिस्सा काटना पड़ा. इस हादसे ने किरना और उसके परिवार की जिंदगी बदल दी. इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम हाथ मिलने के बाद अब किरना को भी अपने रोजमर्रा के काम स्वयं करने की नई उम्मीद मिली है.
रोटरी क्लब बीकानेर के सचिव रोटेरियन कुनाल कोचररोटरी क्लब बीकानेर के सचिव रोटेरियन कुनाल कोचर ने बताया कि शिविर में उन लोगों को इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम हाथ लगाए गए हैं, जिनके हाथ हादसे या किसी अन्य कारण से कट गए थे. उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण और अभ्यास के बाद लाभार्थी इस कृत्रिम हाथ की मदद से खाना खाने, सब्जी काटने और अन्य दैनिक कार्य कर सकते हैं. इसकी सहायता से मोटरसाइकिल चलाने जैसे काम भी संभव हो सकते हैं.
इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम हाथ डिवाइस बीकानेरकोचर के अनुसार यह इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम हाथ फाइबर और चमड़े सहित विभिन्न सामग्रियों से तैयार किया गया है. इसमें चार्ज होने वाली बैटरी लगी है, जो एक बार चार्ज करने पर करीब दो दिन तक काम कर सकती है. एक कृत्रिम हाथ की अनुमानित लागत करीब 18 हजार रुपये है, लेकिन शिविर में संस्था की ओर से इसे पूरी तरह निःशुल्क लगाया गया. भविष्य में डिवाइस खराब होने पर इसे निःशुल्क बदलने की सुविधा भी दी जाएगी. उन्होंने दावा किया कि इस प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम हाथ डिवाइस बीकानेर में पहली बार उपलब्ध करवाई गई है.
180 जरूरतमंदों को लगाए कृत्रिम हाथरोटरी क्लब बीकानेर ने इनाली फाउंडेशन पुणे, रोटरी क्लब ऑफ पुणे और आचार्य श्री नानेश रोटरी नेत्र चिकित्सालय, गंगाशहर के सहयोग से दो दिवसीय निःशुल्क इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम हाथ शिविर आयोजित किया. यह शिविर स्वर्गीय सुन्दर देवी डागा धर्मपत्नी स्वर्गीय चम्पालाल डागा की स्मृति में लगाया गया. शिविर के पहले दिन करीब 180 दिव्यांगजनों की जांच और माप लेने के बाद उनकी आवश्यकता के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम हाथ लगाए गए. विशेषज्ञों ने लाभार्थियों को कृत्रिम हाथ के संचालन, बैटरी चार्ज करने और दैनिक कार्यों में इसके उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया.
जीवन में आत्मविश्वास लौटाना ही सच्ची मानव सेवा रोटरी क्लब बीकानेर के अध्यक्ष रोटेरियन प्रवीण गुप्ता ने कहा कि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. किसी जरूरतमंद के जीवन में आत्मविश्वास लौटाना ही सच्ची मानव सेवा है. रोटरी क्लब भविष्य में भी ऐसे सेवा प्रकल्प जारी रखेगा.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Bikaner,Rajasthan
First Published :
September 08, 2026, 15:56 IST



