Thermal Ash Bricks In Kota: थर्मल की राख से बन रही सस्ती और मजबूत ईंटें, 3 हजार लोगों को मिल रहा रोजगार

Last Updated:September 08, 2026, 15:33 IST
Thermal Ash Bricks In Kota: कोटा थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख अब कचरा नहीं, बल्कि कमाई और रोजगार का जरिया बन गई है. राख और सीमेंट से तैयार हो रही सस्ती व मजबूत ईंटों की मांग बढ़ रही है. पारंपरिक लाल ईंटों के मुकाबले कम कीमत वाली इन ईंटों से निर्माण लागत घटने के साथ ही प्रदूषण में कमी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं.
कोटा. कोटा थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली वेस्ट मटेरियल राख अब शहर के ईंट भट्ठों और स्थानीय निवासियों के लिए कमाई और मुनाफे का बड़ा जरिया बन गई है. पहले इस राख को कचरा या बेकार समझकर फेंक दिया जाता था लेकिन अब यह राख ट्रक-ट्रक भरकर ईंट भट्ठों तक पहुंच रही है, जिससे पर्यावरण को बिना नुकसान पहुचाए सस्ती ईंटें तैयार की जा रही हैं. स्थानीय निवासी और इस कारोबार से जुड़े जयकिशन सरकार ने बताया कि पहले लाल ईंटों को भट्ठियों में पकाया जाता था, जिससे भारी एयर पॉल्यूशन, गर्मी और आसपास के इलाकों में कई तरह की परेशानियां होती थी. साथ ही, लाल ईंटें लाने के लिए लाखेरी या केथून जैसे दूरदराज के क्षेत्रों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती थी. अब थर्मल की राख और सीमेंट के मिलाकर तैयार होने वाली इन ईंटों से प्रदूषण की समस्या भी खत्म हुई है और यह आसपास ही आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं.
लागत और मजबूती में आगे आम उपभोक्ताओं का कहना है कि पारंपरिक लाल ईंटें बाजार में करीब 5 से 5.50 रुपये प्रति पीस पड़ती हैं, जबकि थर्मल की राख से बनी ये ईंटें लगभग 3.50 रुपये से 4 रुपये प्रति ईंट तक मिल जाती हैं. इधर मकान मालिक भीमराज गुर्जर ने बताया कि उन्होंने अपने मकान और दुकान के निर्माण में इन्हीं ईंटों का इस्तेमाल किया है. इन ईंटों की स्ट्रेंथ और कटिंग काफी अच्छी होती है, इनमें सीपेज (सीलन) की समस्या भी नहीं आती और प्लास्टर का खर्चा भी बचता है. एक मकान के निर्माण में औसतन 15 से 20 हजार ईंटों की जरूरत होती है, ऐसे में यह विकल्प सस्ता ओर किफायती साबित हो रहा है.
रोजगार के नए अवसर और क्षेत्र का विकासकोटा थर्मल प्लांट के पास ही उद्धोग स्थापित किए गए है जिसमे स्थानीय ग्रामीण क्षेत्रों में 1-2 किलोमीटर के दायरे में कई ईंट भट्ठे और आधुनिक मशीनें स्थापित हो चुकी हैं. इस कारोबार से क्षेत्र के लगभग 2 से 3 हजार मजदूरों और कामगारों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है, जो राख पहले थर्मल पावर प्लांट के लिए केवल एक वेस्ट मैटेरियल और सिरदर्द थी, उसने अब कचरे से कंचन बनाने वाली कहावत को पूरी तरह सच साबित कर दिया है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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September 08, 2026, 15:33 IST



